मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 तुम हमारे थे प्रभु जी – तुम हमारे हो
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(Tum Hamare The Prabhu Ji – Tum Hamare Ho) – शरणागति भजन / कृष्ण भजन
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो
तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम
हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं
हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रियतम
तुम्हें छोड़ सुन नंद दुलारे,
कोई ना मीत हमारो
तुम्हें छोड़ सुन नंद दुलारे,
कोई ना मीत हमारो
किसके द्वारे जाए पुकारूँ,
और ना कोई सहारो
किसके द्वारे जाए पुकारूँ,
और ना कोई सहारो
अब तो आके बाह पकड़ लो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो....
तेरे कारण सब जग छोड़ा,
तुम संग नाता जोड़ा
तेरे कारण सब जग छोड़ा,
तुम संग नाता जोड़ा
एक बार प्रभु बस ये कह दो,
तू मेरा, मैं तेरा
एक बार प्रभु बस ये कह दो,
तू मेरा, मैं तेरा
साची प्रीति की रीति निभा दो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो........
दास की यह विनती सुन लीजो,
ओ ब्रजराज दुलारे
दास की यह विनती सुन लीजो,
ओ ब्रजराज दुलारे
आखिरी आस यही जीवन की,
पूर्ण करना प्यारे
आखिरी आस यही जीवन की,
पूर्ण करना प्यारे
एक बार हृदय से लगा लो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो......
तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो
तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम
हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं
हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रियतम
✍️ रचनाकार :- लोक परम्परा / शरणागति भजन
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत भावपूर्ण शरणागति भजन है, जिसमें भक्त प्रभु से अपने नित्य संबंध का स्मरण कराता है। “तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो, तुम हमारे ही रहोगे” – भक्त विश्वास दिलाता है कि प्रभु सदा उसके थे, हैं और रहेंगे। वहीं “हम तुम्हारे थे, हम तुम्हारे हैं, हम तुम्हारे ही रहेंगे” – यह परस्पर संबंध का अटूट बंधन है। यह भक्ति का अभेद भाव है – “तू मेरा, मैं तेरा”।
पहले अंतरे में – भक्त कहता है कि हे नंददुलारे, तुम्हें छोड़कर कोई मित्र नहीं। किसके द्वार पर जाकर पुकारूँ? कोई और सहारा नहीं। अब तुम आकर मेरी बाँह पकड़ लो।
दूसरे अंतरे में – तुम्हारे कारण मैंने सब संसार छोड़ दिया, तुमसे नाता जोड़ लिया। बस एक बार यह कह दो – “तू मेरा, मैं तेरा”। सच्चे प्रेम की रीति निभा दो।
तीसरे अंतरे में – हे ब्रजराज दुलारे, यह विनती सुन लो। यही जीवन की आखिरी आशा है, इसे पूर्ण कर दो। एक बार हृदय से लगा लो।
यह भजन सिखाता है कि सच्चा भक्त वह है जो प्रभु को अपना सर्वस्व मानता है और उससे “तू मेरा, मैं तेरा” का संबंध स्थापित करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
“तू मेरा, मैं तेरा” – भक्ति का सर्वोच्च भाव: यह पंक्ति राधा-कृष्ण के प्रेम और सूफी फना-फिल्लाह (ईश्वर में विलीन होने) के भाव को दर्शाती है।
अतीत, वर्तमान और भविष्य का अटूट संबंध: “तुम हमारे थे, हो, रहोगे” – यह तीनों कालों में प्रभु की उपस्थिति और भक्त के विश्वास को दर्शाता है।
ब्रजराज संबोधन: कृष्ण को “ब्रजराज” (ब्रज के राजा) कहकर भक्त ब्रज की लीलाओं और उनके वात्सल्य स्वरूप का स्मरण करता है।
💖 शरणागति का परम रस
🎯 संदेश
भक्त और प्रभु का नाता अनादि और अनंत है। प्रभु सदा हमारे हैं, और हम सदा उनके। यह विश्वास ही शरणागति का आधार है। “तू मेरा, मैं तेरा” का अहसास ही सच्ची भक्ति है।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो प्रभु से अपना नित्य संबंध अनुभव करना चाहते हैं। “तुम हमारे थे, तुम हमारे हो” का उच्चारण मात्र हृदय को सुरक्षा और विश्वास का अहसास कराता है।
🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो (शरणागति भजन) लिरिक्स | Tum Hamare The Prabhu Ji Tum Hamare Ho Sharnagati Bhajan Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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