🙏 तुम हमारे थे प्रभु जी – तुम हमारे हो

(Tum Hamare The Prabhu Ji – Tum Hamare Ho) – शरणागति भजन / कृष्ण भजन

🌸 हम तुम्हारे थे, हम तुम्हारे हैं – पूर्ण समर्पण का भाव

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: शरणागति भजन / कृष्ण भजन
🎶 भाव: समर्पण, प्रेम, आत्मीयता, विश्वास
📍 विशेषता: तुम-हम का अटूट संबंध – “तू मेरा, मैं तेरा” का भाव
📀 प्रचलन: कृष्ण भक्तों में प्रिय, विशेषकर शरणागति रस में डूबने के लिए

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो
तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम
हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं
हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रियतम

तुम्हें छोड़ सुन नंद दुलारे,
कोई ना मीत हमारो
तुम्हें छोड़ सुन नंद दुलारे,
कोई ना मीत हमारो
किसके द्वारे जाए पुकारूँ,
और ना कोई सहारो
किसके द्वारे जाए पुकारूँ,
और ना कोई सहारो
अब तो आके बाह पकड़ लो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो....

तेरे कारण सब जग छोड़ा,
तुम संग नाता जोड़ा
तेरे कारण सब जग छोड़ा,
तुम संग नाता जोड़ा
एक बार प्रभु बस ये कह दो,
तू मेरा, मैं तेरा
एक बार प्रभु बस ये कह दो,
तू मेरा, मैं तेरा
साची प्रीति की रीति निभा दो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो........

दास की यह विनती सुन लीजो,
ओ ब्रजराज दुलारे
दास की यह विनती सुन लीजो,
ओ ब्रजराज दुलारे
आखिरी आस यही जीवन की,
पूर्ण करना प्यारे
आखिरी आस यही जीवन की,
पूर्ण करना प्यारे
एक बार हृदय से लगा लो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो......

तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो
तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम
हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं
हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रियतम

✍️ रचनाकार :- लोक परम्परा / शरणागति भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत भावपूर्ण शरणागति भजन है, जिसमें भक्त प्रभु से अपने नित्य संबंध का स्मरण कराता है। “तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो, तुम हमारे ही रहोगे” – भक्त विश्वास दिलाता है कि प्रभु सदा उसके थे, हैं और रहेंगे। वहीं “हम तुम्हारे थे, हम तुम्हारे हैं, हम तुम्हारे ही रहेंगे” – यह परस्पर संबंध का अटूट बंधन है। यह भक्ति का अभेद भाव है – “तू मेरा, मैं तेरा”।

पहले अंतरे में – भक्त कहता है कि हे नंददुलारे, तुम्हें छोड़कर कोई मित्र नहीं। किसके द्वार पर जाकर पुकारूँ? कोई और सहारा नहीं। अब तुम आकर मेरी बाँह पकड़ लो।

दूसरे अंतरे में – तुम्हारे कारण मैंने सब संसार छोड़ दिया, तुमसे नाता जोड़ लिया। बस एक बार यह कह दो – “तू मेरा, मैं तेरा”। सच्चे प्रेम की रीति निभा दो।

तीसरे अंतरे में – हे ब्रजराज दुलारे, यह विनती सुन लो। यही जीवन की आखिरी आशा है, इसे पूर्ण कर दो। एक बार हृदय से लगा लो।

यह भजन सिखाता है कि सच्चा भक्त वह है जो प्रभु को अपना सर्वस्व मानता है और उससे “तू मेरा, मैं तेरा” का संबंध स्थापित करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

“तू मेरा, मैं तेरा” – भक्ति का सर्वोच्च भाव: यह पंक्ति राधा-कृष्ण के प्रेम और सूफी फना-फिल्लाह (ईश्वर में विलीन होने) के भाव को दर्शाती है।

अतीत, वर्तमान और भविष्य का अटूट संबंध: “तुम हमारे थे, हो, रहोगे” – यह तीनों कालों में प्रभु की उपस्थिति और भक्त के विश्वास को दर्शाता है।

ब्रजराज संबोधन: कृष्ण को “ब्रजराज” (ब्रज के राजा) कहकर भक्त ब्रज की लीलाओं और उनके वात्सल्य स्वरूप का स्मरण करता है।

💖 शरणागति का परम रस

🎯 संदेश

भक्त और प्रभु का नाता अनादि और अनंत है। प्रभु सदा हमारे हैं, और हम सदा उनके। यह विश्वास ही शरणागति का आधार है। “तू मेरा, मैं तेरा” का अहसास ही सच्ची भक्ति है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो प्रभु से अपना नित्य संबंध अनुभव करना चाहते हैं। “तुम हमारे थे, तुम हमारे हो” का उच्चारण मात्र हृदय को सुरक्षा और विश्वास का अहसास कराता है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो ।।

॥ इति शरणागति भजनम् ॥
॥ तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो – तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम ॥