आरती कीजै हनुमान लला की लिरिक्स (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki Lyrics in Hindi) - प्रेम प्रकाश दुबे
श्री हनुमान जी की पावन आरती "आरती कीजै हनुमान लला की" सनातन धर्म, विशेषकर रामभक्तों के बीच अत्यधिक प्रसिद्ध, पूजनीय और ऊर्जावान प्रार्थना है। यह केवल एक आरती मात्र नहीं है, बल्कि कलयुग के जागृत देवता संकटमोचन हनुमान जी के प्रति साधक की अनन्य निष्ठा, समर्पण और प्रेम का सजीव प्रतीक है। प्रेम प्रकाश दुबे की स्वर लहरी और विभिन्न पारंपरिक संगीत परंपराओं में इस आरती का गायन भक्त जनों के हृदय में अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मबल और सुरक्षा का भाव जागृत करता है। संध्या वंदन, सुंदरकांड पाठ के उपरांत, हनुमान जन्मोत्सव, मंगलवार व्रत और प्रत्येक मांगलिक अनुष्ठान के समय इस आरती का गान करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समस्त बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरवर कांपै। रोग दोष जाके निकट न झांपै॥
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संता के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लागी॥
लंक जारि असुर संहारे। सियाराम जी के काज संवारे॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े॥
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा सब जन को तारे॥
सुर नर मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लछाई। आरती करत अनुमंत माई॥
लंक विजय कृत जो नर गावै। गावै संकट निकट न आवै॥
अमृत वाणी जो जन गावै। हनुमान जी को मन भायै॥
తులसीदास जी के पद गावै। सहज प्रभु दर्शन पावै॥
आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Aarti Meaning & Bhavarth
आरती कीजै हनुमान लला की... इस पावन आरती का प्रत्येक शब्द भगवान हनुमान के पराक्रम, उनकी निष्काम सेवा और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के प्रति उनकी अगाध भक्ति का बखान करता है। प्रथम पंक्ति में ही भक्त हनुमान जी को 'दुष्ट दलन रघुनाथ कला की' कहकर संबोधित करते हैं, जिसका अर्थ है कि हनुमान जी भगवान श्री राम की ही शक्ति और कला का विस्तार हैं, जो दुष्टों और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करने वाले हैं। जिनके बल और हुंकार से बड़े-बड़े पर्वत भी कांप जाते हैं और जिनकी शरण में जाने मात्र से रोग, शोक, और मानसिक संताप साधक के निकट नहीं आते, ऐसे महाबली अंजनि पुत्र की महिमा अपरंपार है।
आरती के मध्य भाग में लंका दहन, रावण की अशोक वाटिका का विध्वंस, माता सीता की खोज, लक्ष्मण जी के प्राण रक्षा हेतु संजीवनी बूटी लाना और पाताल लोक जाकर अहिरावण का वध करने जैसे ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया गया है। यह प्रसंग हमें यह सिखाते हैं कि प्रभु श्री राम के कार्यों को पूर्ण करने में हनुमान जी ने अपनी संपूर्ण शक्ति समर्पित कर दी थी। जो भक्त प्रेम और श्रद्धा के साथ इस आरती का गान करते हैं, उनके जीवन के समस्त संकट दूर हो जाते हैं और उन्हें अंत में श्री राम चरणों की भक्ति प्राप्त होती है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Words
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| लला | प्यारा बालक / वीर योद्धा | श्री हनुमान जी के बाल स्वरूप एवं प्रिय संबोधन हेतु |
| दुष्ट दलन | असुरों और बुराइयों का नाश करने वाला | धर्म की रक्षा और अहंकार का दमन |
| गिरवर | विशाल पर्वत | हनुमान जी के विशालकाय रूप और बल का वर्णन |
| अंजनि पुत्र | माता अंजनी के नंदन | हनुमान जी की माता का नाम |
| संजीवन | संजीवनी बूटी | लक्ष्मण मूर्छा के समय हिमालय से लाई गई जड़ी-बूटी |
| अहिरावण | पाताल लोक का राजा / रावण का मित्र | अहिरावण वध प्रसंग |
आरती में वर्णित देवता की महिमा | Glory of the Deity
श्री हनुमान जी सनातन संस्कृति में चिरंजीवी, अष्टसिद्धियों और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजे जाते हैं। उन्हें रुद्र अवतार (भगवान शिव का अंश) माना गया है, जिनमें अपार शक्ति, गाढ़ बुद्धि, अनुपम ज्ञान और शरणागत वत्सलता का अद्भुत संगम है। जब भी इस संसार में धर्म की हानि होती है या भक्त संकट में घिरते हैं, हनुमान जी अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। इस आरती में उनके इन्हीं गुणों—जैसे संकटमोचन, रामदूत, वज्र शरीर और महाबली—का सुंदर गुणगान किया गया है, जो साधक को निर्भय बनाता है।
आरती का धार्मिक महत्व एवं फल | Religious Significance & Traditional Benefits
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित रूप से सुबह और संध्या के समय श्री हनुमान जी की आरती करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता, शांति एवं समृद्धि का वास होता है। मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से हनुमान मंदिर या घर के पूजा गृह में दीप प्रज्वलित कर यह आरती गाने से शनि के कुप्रभाव, भूत-प्रेत बाधा, भय और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है। यह आरती साधक को मानसिक दृढ़ता और अटूट आत्मविश्वास प्रदान करती है।
आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation
हनुमान जी की आरती करने के लिए एक स्वच्छ और सुंदर थाली तैयार करनी चाहिए। थाली में शुद्ध घी का दीपक (या कपूर), धूप, चंदन, अक्षत (अतूट चावल), पुष्प, और प्रसाद (लड्डू या गुड़-चने का भोग) रखना अनिवार्य है। आरती शुरू करने से पहले भगवान श्री गणेश और श्री राम-सीता का स्मरण करें। इसके पश्चात पूरी श्रद्धा और लयबद्ध स्वर में 'आरती कीजै हनुमान लला की' का गायन करते हुए थाली को clockwise (घड़ी की सुई की दिशा में) कम से कम तीन बार घुमाएं। आरती पूर्ण होने के बाद दोनों हाथों से दीपक की ज्योति को माथे और नेत्रों से लगाएं।
आरती करने का सही समय, दिशा एवं दीप घुमाने की विधि | Best Time & Movement
हनुमान आरती के लिए ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) और गोधूलि बेला (संध्याकाल) का समय अत्यंत उत्तम माना गया है। आरती करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। दीप घुमाते समय भगवान के चरणों में चार बार, नाभि क्षेत्र में दो बार और मुख मंडल की ओर तीन बार—कुल मिलाकर प्रतीकात्मक रूप से संपूर्ण विग्रह के चारों ओर दीप घुमाना चाहिए, जिससे संपूर्ण शरीर और चेतना आरती की ऊर्जा से प्लावित हो जाए।
आरती के दौरान घंटी, शंख एवं दीप का महत्व | Bell, Conch & Lamp Symbolism
आरती के दौरान घंटी (घंटा) बजाने से उत्पन्न होने वाली ध्वनि आसपास की नकारात्मक ऊर्जा और सूक्ष्म अवरोधों को नष्ट करती है, साथ ही मन को एकाग्र करती है। शंखनाद से ब्रह्मांडीय स्पंदन उत्पन्न होता है जो पूजा स्थल को पवित्र बनाता है। शुद्ध घी या कपूर का दीप प्रज्वलित करना इस बात का प्रतीक है कि ज्ञान का प्रकाश हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को हमेशा के लिए समाप्त कर रहा है।
घर में आरती कैसे करें एवं सावधानियां | Home Aarti & Rules
घर में आरती करते समय पवित्रता और शुष्कता का विशेष ध्यान रखें। पूजा स्थल साफ-सुथरा हो। आरती गाते समय वाणी में प्रेम और भाव होना चाहिए, केवल यांत्रिक औपचारिकता नहीं। अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखते हुए जलती हुई थाली को सुरक्षित दूरी पर रखें। छोटे बच्चों को आरती की थाली से दूर रखें ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
आरती का आध्यात्मिक संदेश एवं दैनिक जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह आरती हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएं (लंका जैसी कठिनाइयां) क्यों न आएं, यदि प्रभु में अटूट विश्वास और कर्तव्यनिष्ठा हो, तो हर समस्या का समाधान संभव है। हनुमान जी का जीवन निष्काम सेवा, आज्ञाकारिता और अटूट निष्ठा का पाठ पढ़ाता है। साधक को अपने दैनिक जीवन में अहंकार का त्याग कर हनुमान जी की तरह सेवाभाव अपनाना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए श्री हनुमान चालीसा का नियमित पाठ भी अवश्य करें।
Quick Information Table
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| आरती का नाम | आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki) |
| आराध्य देवता | संकटमोचन श्री हनुमान जी |
| प्रसिद्ध गायक / संदर्भ | प्रेम प्रकाश दुबे एवं पारंपरिक भक्ति परंपरा |
| उपयुक्त अवसर | संध्या वंदन, मंगलवार, शनिवार, हनुमान जन्मोत्सव, सुंदरकांड उपरांत |
| नियत समय | प्रातःकाल एवं संध्याकाल |
| प्रमुख पर्व | हनुमान જયंती, दीपावली, रामनवमी |
मुख्य आध्यात्मिक सीख | Key Takeaways
- हनुमान जी की उपासना से साधक को निर्भयता और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
- नियमित आरती गान से घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति बनी रहती है।
- संकट के समय हनुमान स्मरण और आरती से मानसिक स्थिरता मिलती है।
- यह आरती रामभक्ति और सेवा के सर्वोच्च आदर्श को दर्शाती है।
- प्रेम प्रकाश दुबे जैसे कलाकारों के स्वर में यह भजन भक्ति रस को और गहरा करता है।
- निसंकोच भाव से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं होती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस मार्गदर्शिका को सनातन धर्म के पौराणिक ग्रंथों, वाल्मीकि रामायण के हनुमान प्रसंगों और पारंपरिक लोक-भक्ति परंपराओं के आधार पर प्रामाणिक रूप से संकलित किया गया है ताकि पाठकों को शुद्ध और संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- वाल्मीकि रामायण - किष्किंधा एवं सुंदरकांड प्रसंग
- पारंपरिक हनुमान भजन एवं आरती संग्रह
- श्री हनुमान मानस एवं सनातन व्रत कथा ग्रंथ
- भक्ति संगीत संग्रह - प्रेम प्रकाश दुबे संस्करण
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