Shree Vishnu Chalisa

Shri Vishnu Chalisa Lyrics (श्री विष्णु चालीसा) – Anuradha Paudwal Bhajan 2026 | Vishnu Chalisa Hindi PDF

236 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 श्री विष्णु चालीसा – नमो विष्णु भगवान खरारी

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Shri Vishnu Chalisa Lyrics In Hindi) – Anuradha Paudwal Bhajan 2026 | Vishnu Chalisa

गायिका: अनुराधा पौडवाल || एल्बम: श्री विष्णु स्तुति || म्यूजिक लेबल: टी-सीरीज़

विवरण एवं मुख्य बिंदु

🎤 गायिका:अनुराधा पौडवाल
✍️ रचना:पारंपरिक
🎵 एल्बम:श्री विष्णु स्तुति
🏢 म्यूजिक लेबल:टी-सीरीज़ (T-Series)
📖 संरचना:दोहे + चौपाइयाँ

📜 विष्णु चालीसा लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ दोहा ॥

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥

॥ चौपाई ॥

नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥1॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥2॥

शंख चक्र कर गदा बिराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥3॥

सन्त भक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥4॥

पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥5॥

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥6॥

आप वाराह रूप बनाया, हरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥7॥

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥8॥

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥9॥

वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥10॥

असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लडाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥11॥

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥12॥

देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥13॥

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥14॥

हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥15॥

चहत आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥16॥

शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥17॥

करहुं प्रणाम कौन विधि सुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥18॥

दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥19॥

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥20॥

🎤 गायिका :- अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal)

✍️ रचना :- पारंपरिक (Traditional)

🎵 एल्बम :- श्री विष्णु स्तुति (Shree Vishnu Stuti)

🏢 म्यूजिक लेबल :- टी-सीरीज़ (T-Series)

🙏 विष्णु चालीसा का महत्व और लाभ

भगवान विष्णु हिंदू धर्म के त्रिदेवों में से एक हैं, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं। वे शांति, स्थिरता और धर्म के प्रतीक हैं। विष्णु चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है तथा सभी कष्ट दूर होते हैं।

प्रमुख लाभ:

  • कष्ट नाश: "नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी" – भगवान विष्णु के इस रूप का स्मरण करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
  • पाप मुक्ति: "पाप काट भव सिन्धु उतारण" – पापों का नाश होता है और जीवन रूपी सागर से पार उतरने में सहायता मिलती है।
  • भक्तों की रक्षा: "कष्ट नाशकर भक्त उबारण" – भगवान विष्णु अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति: नियमित पाठ से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: अंतिम समय में भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति होती है।

पाठ विधि: विष्णु चालीसा का पाठ प्रातःकाल स्नान करने के बाद करें। भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। धूप-दीप करके श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें। विशेष रूप से बुधवार और एकादशी के दिन इसका पाठ अधिक फलदायी माना जाता है।

🔍 भगवान विष्णु का विशेष परिचय

📖 दस अवतार (दशावतार)

इस चालीसा में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का वर्णन है:

  • मत्स्य अवतार: "धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया"
  • कूर्म अवतार: "कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया"
  • वाराह अवतार: "आप वाराह रूप बनाया, हरण्याक्ष को मार गिराया"
  • राम अवतार: "तब तुम रूप राम का धारा, भार उतार असुर दल मारा"
  • मोहनी अवतार: "रूप मोहनी आप दिखाया, देवन को अमृत पान कराया"
🎨 स्वरूप वर्णन
  • पीताम्बर (पीले वस्त्र) धारण किए हुए
  • बैजन्ती माला (वनमाला) पहने हुए
  • चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए हुए
  • सुन्दर, मनोहर और मोहक रूप
💫 प्रमुक्त भक्त
  • ध्रुव: "तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे" – भक्त ध्रुव को अटल स्थान दिया
  • प्रहलाद: हिरण्यकश्यप से रक्षा की
  • गणिका और अजामिल: पतितों को भी उद्धार किया
  • गजराज (हाथी): मगरमच्छ से मुक्त किया (गजेंद्र मोक्ष)
📅 विशेष दिन
  • एकादशी: प्रत्येक मास की एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित
  • बुधवार: भगवान विष्णु का दिन
  • वैकुंठ चतुर्दशी: कार्तिक मास की विशेष तिथि
  • शयन एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी

॥ नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ॥

💖 विष्णु चालीसा का संदेश

🎯 संदेश

विष्णु चालीसा हमें सिखाती है कि भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं और विभिन्न अवतारों द्वारा धर्म की स्थापना करते हैं। यह चालीसा हमें उनके दिव्य स्वरूप, उनके अवतारों और उनकी कृपा का स्मरण कराती है। नियमित पाठ से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनुष्य भवसागर से पार उतर जाता है।

✨ अनुराधा पौडवाल की आवाज़ में

श्री विष्णु चालीसा को भक्ति संगीत की प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल ने अपनी मधुर एवं सुमधुर आवाज़ में गाया है। टी-सीरीज़ के "श्री विष्णु स्तुति" एल्बम में सम्मिलित यह चालीसा भगवान विष्णु के भक्तों के लिए एक अमूल्य रत्न है। इसकी सरल धुन और पौडवाल जी के भावपूर्ण गायन से यह चालीसा सीधे हृदय में उतर जाती है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || विष्णु भगवान की जय 🙏

॥ अनुराधा पौडवाल कृत विष्णु चालीसा ॥
॥ पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥

गायिका: अनुराधा पौडवाल | एल्बम: श्री विष्णु स्तुति | म्यूजिक लेबल: टी-सीरीज़

॥ श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें, सुख-शांति को प्राप्त करें ॥

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "Shri Vishnu Chalisa Lyrics (श्री विष्णु चालीसा) – Anuradha Paudwal Bhajan 2026 | Vishnu Chalisa Hindi PDF" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!