🙏 श्री कुबेर चालीसा – धन माया के अधिकारी
(Shri Kuber Chalisa Lyrics In Hindi) – Satyendra Pathak Bhajan 2026 | Kuber Chalisa
📝 कुबेर चालीसा विवरण
📜 कुबेर चालीसा लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ दोहा ॥
जैसे अटल हिमालय और जैसे अडिग सुमेर ।
ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर ॥
विघ्न हरण मंगल करण, सुनो शरणागत की टेर ।
भक्त हेतु वितरण करो, धन माया के ढ़ेर ॥
॥ चौपाई ॥
जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी ।
धन माया के तुम अधिकारी ॥
तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।
पवन वेग सम सम तनु बलधारी ॥1॥
स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।
सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी ॥
यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।
सेनापति बने युद्ध में धनुधारी ॥2॥
महा योद्धा बन शस्त्र धारैं ।
युद्ध करैं शत्रु को मारैं ॥
सदा विजयी कभी ना हारैं ।
भगत जनों के संकट टारैं ॥3॥
प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।
पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता ॥
विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।
विभीषण भगत आपके भ्राता ॥4॥
शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।
घोर तपस्या करी तन को सुखाया ॥
शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।
अमृत पान करी अमर हुई काया ॥5॥
धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।
देवी देवता सब फिरैं साथ में ॥
पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ।
बल शक्ति पूरी यक्ष जात में ॥6॥
स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।
त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ॥
शंख मृदंग नगारे बाजैं ।
गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ॥7॥
चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।
ऋद्धि सिद्धि नित भोग लगावैं ॥
दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।
यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढुलावैं ॥8॥
ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।
देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ॥
पुरुषोंमें जैसे भीम बली हैं ।
यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ॥9॥
भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।
पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं ॥
नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।
वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ॥10॥
कांधे धनुष हाथ में भाला ।
गले फूलों की पहनी माला ॥
स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला ।
दूर दूर तक होए उजाला ॥11॥
कुबेर देव को जो मन में धारे ।
सदा विजय हो कभी न हारे ।
बिगड़े काम बन जाएं सारे ।
अन्न धन के रहें भरे भण्डारे ॥12॥
कुबेर गरीब को आप उभारैं ।
कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ॥
कुबेर भगत के संकट टारैं ।
कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ॥13॥
शीघ्र धनी जो होना चाहे ।
क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं ॥
यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।
दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं ॥14॥
भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।
अड़े काम को कुबेर बनावैं ॥
रोग शोक को कुबेर नशावैं ।
कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं ॥15॥
कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।
कुबेर गिरे को पुन: उठा दे ॥
कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।
कुबेर भूले को राह बता दे ॥16॥
प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।
भूखे की भूख कुबेर मिटा दे ॥
रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।
दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे ॥17॥
बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।
कारोबार को कुबेर बढ़ा दे ॥
कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।
चोर ठगों से कुबेर बचा दे ॥18॥
कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।
जो कुबेर को मन में ध्यावै ॥
चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।
मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ॥19॥
पाठ करे जो नित मन लाई ।
उसकी कला हो सदा सवाई ॥
जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।
उसका जीवन चले सुखदाई ॥20॥
जो कुबेर का पाठ करावै ।
उसका बेड़ा पार लगावै ॥
उजड़े घर को पुन: बसावै ।
शत्रु को भी मित्र बनावै ॥21॥
सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई ।
सब सुख भोग पदार्थ पाई ॥
प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।
मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ॥22॥
॥ दोहा ॥
शिव भक्तों में अग्रणी, श्री यक्षराज कुबेर ।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर, कर दो दूर अंधेर ॥
कर दो दूर अंधेर अब, जरा करो ना देर ।
शरण पड़ा हूं आपकी, दया की दृष्टि फेर ॥
🎤 गायक :- सत्येंद्र पाठक (Satyendra Pathak)
✍️ रचना :- पारंपरिक (Traditional)
🎵 संगीत :- कैलाश श्रीवास्तव (Kailash Shrivashtav)
🙏 कुबेर चालीसा का महत्व और लाभ
भगवान कुबेर को धन के देवता और देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में पूजा जाता है। वे यक्षों के राजा हैं और उत्तर दिशा के संरक्षक (दिक्पाल) हैं। भगवान शिव के परम भक्त कुबेर जी की कृपा से भक्तों पर धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की वर्षा होती है।
प्रमुख लाभ:
- धन प्राप्ति: "कुबेर गरीब को आप उभारैं" – कुबेर चालीसा के नियमित पाठ से आर्थिक तंगी दूर होती है और धन की प्राप्ति होती है।
- व्यापार में वृद्धि: "दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं" – व्यापारियों के लिए यह चालीसा विशेष लाभदायक है।
- ऋण मुक्ति: "कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं" – कर्ज से मुक्ति दिलाने में सहायक।
- बिगड़े काम बनें: "बिगड़े काम बन जाएं सारे" – सभी रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं।
- रोग निवारण: "रोग शोक को कुबेर नशावैं" – रोगों से मुक्ति मिलती है।
- संतान सुख: "बांझ की गोद कुबेर भरा दे" – संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- कोर्ट केस में विजय: "कोर्ट केस में कुबेर जितावै" – कानूनी मामलों में सफलता मिलती है।
पाठ विधि: कुबेर चालीसा का पाठ प्रातःकाल स्नान करने के बाद करें। भगवान कुबेर की तस्वीर या प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। धूप-दीप करके श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें। विशेष रूप से गुरुवार और पूर्णिमा के दिन इसका पाठ अधिक फलदायी माना जाता है।
🔍 भगवान कुबेर का विशेष परिचय
📖 पौराणिक महत्व
भगवान कुबेर ब्रह्मा जी के प्रपितामह और ऋषि पुलस्त्य के वंश में जन्मे थे। इनके पिता विश्रवा और माता इडविडा थे। लंकापति रावण और भगवान राम के परम भक्त विभीषण इनके सौतेले भाई थे।
🔱 शिव भक्ति
कुबेर जी भगवान शिव के परम भक्त हैं। उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया था। चालीसा के अनुसार "शिव चरणों में जब ध्यान लगाया, घोर तपस्या करी तन को सुखाया" – यह उनकी शिव भक्ति का प्रमाण है।
🎨 स्वरूप वर्णन
- स्वर्ण मुकुट और विशाल देह
- कंधे पर धनुष, हाथ में भाला
- गले में फूलों की माला
- पीताम्बर वस्त्र
- स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान
💫 चमत्कारी प्रभाव
- धन वृद्धि: कुबेर जी की कृपा से धन के भंडार भर जाते हैं।
- व्यापार उन्नति: कारोबार में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
- भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति: "भूत प्रेत को कुबेर भगावैं" – नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- उजड़े घर बसते हैं: "उजड़े घर को पुन: बसावै" – टूटे हुए परिवारों में सुख-शांति आती है।
- शत्रु नाश: "शत्रु को भी मित्र बनावै" – शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।
📅 पाठ का विशेष दिन
- गुरुवार: कुबेर जी का दिन
- पूर्णिमा: पूर्णिमा के दिन विशेष पाठ
- धनतेरस: दिवाली के अवसर पर विशेष पूजन
॥ जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी, धन माया के तुम अधिकारी ॥
💖 कुबेर चालीसा का संदेश
🎯 संदेश
कुबेर चालीसा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और समर्पण से धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। यह चालीसा केवल धन प्राप्ति का साधन ही नहीं, बल्कि जीवन के सभी कष्टों को दूर करने वाली और हर क्षेत्र में सफलता दिलाने वाली अद्भुत स्तुति है। यह विश्वास दिलाती है कि कुबेर जी की कृपा से कोई भी कार्य असंभव नहीं है।
✨ सत्येंद्र पाठक की आवाज़ में
श्री कुबेर चालीसा को सत्येंद्र पाठक जी ने अपनी सुमधुर आवाज़ दी है। कैलाश श्रीवास्तव के संगीत ने इस पारंपरिक चालीसा को भव्यता प्रदान की है। यह चालीसा उन सभी भक्तों के लिए अमूल्य है जो जीवन में धन, समृद्धि और सफलता की कामना रखते हैं।
🙏 ॐ श्री कुबेराय नमः || यक्षराज कुबेर की जय 🙏
गायक: सत्येंद्र पाठक | संगीत: कैलाश श्रीवास्तव
॥ श्री कुबेर चालीसा का पाठ करें, धन-धान्य से भरें भण्डारे ॥
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