Amalaki Ekadashi

अमलकी एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण का समय (Amalaki Ekadashi 2026: Date, Muhurat & Parana Time)

182 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🌿 अमलकी एकादशी 2026

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

तिथि, मुहूर्त और पारण का समय (Spiritual Significance)

फाल्गुन शुक्ल एकादशी – आंवले के वृक्ष की पूजा

🌟 क्या है अमलकी एकादशी? (Introduction)

अमलकी एकादशी (या आंवला एकादशी) हिन्दू कैलेंडर के फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और आंवले के वृक्ष (आंवला) की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र एकादशी 2 मार्च 2026, सोमवार को पड़ रही है। इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से सभी पाप नष्ट होते हैं एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।

अमलकी एकादशी का विशेष महत्व आंवले के वृक्ष से जुड़ा है। आंवला स्वास्थ्य के लिए अमृत समान है और आध्यात्मिक दृष्टि से यह वृक्ष पृथ्वी पर विष्णु का स्वरूप माना जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने और उसके नीचे बैठकर ध्यान करने का विधान है।

📅 अमलकी एकादशी 2026 – तिथि एवं मुहूर्त

यहाँ दिल्ली (भारत) के अनुसार मुख्य समय दिए जा रहे हैं। अन्य शहरों के लिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

घटना तिथि एवं समय
एकादशी तिथि प्रारम्भ 2 मार्च 2026, सोमवार, प्रातः 06:42 बजे
एकादशी तिथि समाप्त 3 मार्च 2026, मंगलवार, प्रातः 08:24 बजे
वैष्णव एकादशी (पारण दिन) 3 मार्च 2026, मंगलवार
पारण (व्रत तोड़ने) का समय 3 मार्च 2026, प्रातः 06:48 – 08:30 बजे के बीच
⚠️ नोट: पारण के समय द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले व्रत खोलना आवश्यक है। सुनिश्चित करें कि पारण हरि वासर (द्वादशी के चार घंटे) में किया जाए।

🍽️ पारण का समय एवं विधि (Parana Vidhi)

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि के भीतर किया जाता है। 3 मार्च 2026 को सूर्योदय लगभग 06:48 बजे (दिल्ली) है, और द्वादशी तिथि सुबह 08:30 तक है। अतः पारण का उत्तम समय सुबह 06:48 से 08:30 के मध्य है।

पारण की विधि:

  • प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करें और उन्हें भोग लगाएं (फल, मिष्ठान्न)।
  • पहले आंवले का सेवन करें – यह अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • तत्पश्चात सात्विक भोजन ग्रहण करें (अन्न, दाल, सब्जी आदि)।
  • दान-पुण्य करना भी इस दिन विशेष फलदायी होता है।

✨ अमलकी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

पद्म पुराण के अनुसार, अमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। इस दिन आंवले के वृक्ष का पूजन विशेष रूप से किया जाता है क्योंकि यह वृक्ष भगवान विष्णु का प्रतीक है। कहा जाता है कि आंवले में सभी तीर्थों का वास होता है।

आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर जो व्यक्ति ध्यान करता है, उसके सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे लंबी आयु तथा उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत मनुष्य को पुनर्जन्म के बंधनों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाता है।

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आंवले का वृक्ष
विष्णु स्वरूप

📜 अमलकी एकादशी की पौराणिक कथा

प्राचीन काल में चित्रसेन नामक एक धर्मात्मा राजा थे। वे प्रतिदिन एकादशी का व्रत रखते थे। एक बार अमलकी एकादशी के दिन वे आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की आराधना कर रहे थे। उनके साथ उनकी प्रजा के लोग भी व्रत में शामिल हुए। उस दिन एक शिकारी ने भी वृक्ष के नीचे विश्राम किया और अनजाने में उसने देखा कि राजा और प्रजा कैसे पूजा कर रहे हैं। शिकारी ने भी मन ही मन भगवान का स्मरण किया और वृक्ष को जल चढ़ाया। मृत्यु के बाद उस शिकारी को विष्णु लोक की प्राप्ति हुई। यह कथा बताती है कि अमलकी एकादशी का व्रत और आंवले के वृक्ष की पूजा कितनी महान है।

🧘 अमलकी एकादशी व्रत विधि (Step-by-Step)

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प्रातः स्नान एवं संकल्प

एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें – "मैं आज अमलकी एकादशी का व्रत करूंगा, निर्जल या फलाहारी।"

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आंवले के वृक्ष की पूजा

यदि संभव हो तो आंवले के वृक्ष के पास जाएं। वृक्ष की जड़ में जल, रोली, चावल, पुष्प अर्पित करें। वृक्ष को लाल वस्त्र पहनाएं और कच्चा सूत लपेटें। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें – "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" ।

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व्रत एवं जागरण

दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखें। रात्रि में भजन-कीर्तन करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जो लोग पूरी रात जागरण करते हैं, उन्हें अक्षय पुण्य मिलता है।

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द्वादशी को पारण

अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद पारण करें। पहले आंवला खाएं, फिर भोजन ग्रहण करें। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना अत्यंत शुभ है।

✅ अमलकी एकादशी व्रत के लाभ

  • आध्यात्मिक लाभ: भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • स्वास्थ्य लाभ: आंवले के सेवन से शरीर निरोग रहता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • पाप नाश: इस व्रत से सभी प्रकार के पाप (जाने-अनजाने) नष्ट होते हैं।
  • पितृ तर्पण: पितरों को संतोष मिलता है और उन्हें सद्गति प्राप्त होती है।
  • मनोकामना सिद्धि: सच्चे मन से किए गए व्रत से मनोवांछित फल मिलता है।

⚠️ एकादशी व्रत में क्या करें और क्या न करें

✅ करें (Do's)
  • सात्विक भोजन (फल, दूध, मेवे) ग्रहण करें।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करें।
  • दान-दक्षिणा दें।
❌ न करें (Don'ts)
  • चावल, गेहूं, अन्न ग्रहण न करें।
  • तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) वर्जित है।
  • बाल कटवाना, नाखून काटना आदि न करें।
  • झूठ बोलना, क्रोध करना, चुगली करना वर्जित है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या अमलकी एकादशी पर निर्जल व्रत रखना चाहिए?
उत्तर: वैसे तो एकादशी पर निर्जल व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे तो फलाहार या जल-फल ले सकते हैं।

प्रश्न 2: क्या इस दिन आंवला खाना जरूरी है?
उत्तर: आंवला खाना अत्यंत शुभ है, लेकिन यदि संभव न हो तो वृक्ष की पूजा मात्र से भी व्रत पूर्ण होता है।

प्रश्न 3: क्या स्त्रियां अमलकी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
उत्तर: हां, कोई भी स्त्री या पुरुष इस व्रत को कर सकते हैं। विशेष रूप से महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत करती हैं।

प्रश्न 4: पारण के समय क्या खाना चाहिए?
उत्तर: सबसे पहले आंवला या आंवले से बना पदार्थ खाएं। फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

प्रश्न 5: क्या बच्चे भी यह व्रत रख सकते हैं?
उत्तर: बच्चों के लिए अन्न न खाने का नियम नहीं है, वे फलाहार कर सकते हैं या मानसिक व्रत रख सकते हैं।

📝 निष्कर्ष

अमलकी एकादशी 2026 का व्रत आध्यात्मिक उत्थान, स्वास्थ्य लाभ और मोक्ष की प्राप्ति का द्वार है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा और भगवान विष्णु की आराधना से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं। तिथि और पारण के समय का ध्यान रखकर किया गया व्रत सफल होता है।

अतः सभी भक्तों से अनुरोध है कि 2 मार्च 2026 को अमलकी एकादशी का पवित्र व्रत अवश्य करें और भगवान विष्णु की कृपा के भागी बनें।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। सर्वे भवन्तु सुखिनः ।।

🌿 अमलकी एकादशी 2026 – तिथि, मुहूर्त, पारण का समय
आंवले की पूजा, विष्णु की कृपा
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "अमलकी एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण का समय (Amalaki Ekadashi 2026: Date, Muhurat & Parana Time)" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

श्रेणियां: Amalaki Ekadashi Latest Bhakti Song

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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