Hanuman Bhajan

आरती कीजै हनुमान लला की लिरिक्स (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki Lyrics in Hindi) - Anuradha Paudwal Hanuman Aarti - Bhaktilok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सनातन धर्म में श्री हनुमान जी की आराधना संकटों से मुक्ति, बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति का सबसे सुगम मार्ग मानी गई है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा की भांति ही, स्वामी रामानंद जी द्वारा रचित "आरती कीजै हनुमान लला की" (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki) प्रत्येक हिंदू गृह में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाई जाती है। यह आरती न केवल पवनपुत्र हनुमान जी के शौर्य, पराक्रम और स्वामी-भक्ति का गुणगान करती है, बल्कि साधक के भीतर साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) के मधुर और भक्तिमय स्वर में गाई गई यह आरती भक्तों के हृदय में सीधे उतर जाती है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन आरती के संपूर्ण लिरिक्स, उसका पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, शास्त्रीय महत्व और आरती करने की प्रामाणिक विधि पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Aarti Lyrics

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपै। रोग दोष जाके निकट न झांपै॥
अंजनी पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्रान उबारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावन की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुर दल मारे। दहिने भुजा संतजन तारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर सुहाई। आरती करत अंजना माई॥
आरती कीजै हनुमान लला की...॥

जो हनुमानजी की आरती गावै। बसि बैकुंठ परम पद पावै॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

स्वामी रामानंद जी द्वारा रचित इस आरती की प्रत्येक पंक्ति हनुमान जी के दिव्य चरित्र और उनकी असीमित शक्तियों को उजागर करती है। इसका विस्तृत भावार्थ इस प्रकार है:

1. आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

भावार्थ: हम सब मिलकर भगवान श्री रामचंद्र जी के अत्यंत प्रिय और उनके आंशिक अवतार (कला) स्वरूप, दुष्टों का संहार करने वाले बालक हनुमान जी की आरती करते हैं।

2. जाके बल से गिरिवर कांपै। रोग दोष जाके निकट न झांपै॥

भावार्थ: जिनके अपार बल और पराक्रम के सामने बड़े-बड़े पर्वत भी कांपने लगते हैं। ऐसे महाबली हनुमान जी का स्मरण करने मात्र से कोई भी रोग, शोक या दोष मनुष्य के समीप नहीं आ सकता।

3. अंजनी पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥

भावार्थ: माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी अत्यंत बलशाली हैं। वे सज्जनों, संतों और भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और उनके सभी कष्टों को दूर करते हैं।

4. दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥

भावार्थ: प्रभु श्री रामचंद्र जी ने जब हनुमान जी को अपना दूत बनाकर (बीड़ा देकर) भेजा, तब उन्होंने न केवल लंका को जलाकर भस्म कर दिया, बल्कि माता सीता की खोज करके उनकी कुशल-क्षेम की सूचना भी प्रभु तक पहुंचाई।

5. लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥

भावार्थ: लंका जैसा अभेद्य किला, जिसके चारों ओर विशाल समुद्र रूपी गहरी खाई थी, उसे पार करने में पवनपुत्र हनुमान जी को तनिक भी समय नहीं लगा। उन्होंने क्षण भर में उसे लांघ लिया।

6. लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥

भावार्थ: उन्होंने सोने की लंका को जलाकर राख कर दिया, दुष्ट राक्षसों का संहार किया और इस प्रकार प्रभु श्री सीताराम जी के सभी अटके हुए कार्यों को अत्यंत कुशलता से पूर्ण किया।

7. लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्रान उबारे॥

भावार्थ: जब युद्ध भूमि में मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर आए और लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा की।

8. पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावन की भुजा उखारे॥

भावार्थ: जब पाताल लोक का राजा अहिरावण श्री राम और लक्ष्मण का हरण कर ले गया, तब हनुमान जी ने पाताल लोक में प्रवेश किया, वहां के रक्षकों को परास्त किया और अहिरावण का वध कर उसकी भुजाएं उखाड़ फेंकीं।

9. बाएं भुजा असुर दल मारे। दहिने भुजा संतजन तारे॥

भावार्थ: हनुमान जी अपनी बाईं भुजा से दुष्ट राक्षसों के दलों का संहार करते हैं और अपनी दाईं भुजा से संतों और भक्तों को आशीर्वाद देकर उनका उद्धार करते हैं।

10. सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥

भावार्थ: देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी मिलकर हनुमान जी की आरती उतारते हैं और चारों दिशाओं में 'जय हनुमान' के जयकारे लगाते हैं।

11. कंचन थार कपूर सुहाई। आरती करत अंजना माई॥

भावार्थ: सोने की थाली में कपूर सजाकर स्वयं माता अंजनी अपने प्रिय पुत्र हनुमान जी की आरती उतार रही हैं, जो अत्यंत मनमोहक प्रतीत हो रही है।

12. जो हनुमानजी की आरती गावै। बसि बैकुंठ परम पद पावै॥

भावार्थ: जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक हनुमान जी की इस पावन आरती का गान करता है, वह अंततः भगवान विष्णु के परम धाम बैकुंठ को प्राप्त करता है और मोक्ष का भागी बनता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Words

कठिन शब्द सरल अर्थ आरती में संदर्भ
लला प्रिय बालक / पुत्र हनुमान जी के बाल और प्रिय स्वरूप के लिए।
दुष्ट दलन दुष्टों का नाश करने वाले राक्षसों और पापियों के संहारक के रूप में।
गिरिवर विशाल पर्वत हनुमान जी के बल से पर्वतों के कांपने के संदर्भ में।
झांपै स्पर्श करना / आना रोग और दोषों का निकट न आने के अर्थ में।
बीरा बीड़ा / संकल्प / कार्य का दायित्व श्री राम द्वारा लंका जाने का कार्य सौंपने के संदर्भ में।
कोट किला / दुर्ग लंका के अभेद्य किले के लिए।
सकारे सुबह-सुबह / शीघ्र लक्ष्मण जी के मूर्छित होने के समय के संदर्भ में।
पैठि प्रवेश करना पाताल लोक में प्रवेश करने के लिए।

आरती में वर्णित देवता की महिमा | Glory of the Deity

श्री हनुमान जी को कलयुग के जाग्रत देव माना गया है। वे अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता हैं। इस आरती में हनुमान जी की बहुआयामी महिमा का वर्णन है। वे एक ओर जहां 'दुष्ट दलन' हैं, वहीं दूसरी ओर 'संतन के प्रभु सदा सहाई' हैं। उनका चरित्र हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग सदैव धर्म की रक्षा और निर्बलों की सहायता के लिए होना चाहिए। हनुमान जी की भक्ति निष्काम है; उन्होंने कभी भी अपने लिए किसी वस्तु की कामना नहीं की। उनका संपूर्ण जीवन प्रभु श्री राम के चरणों में समर्पित रहा। यही कारण है कि उनकी आरती करने से साधक के भीतर भी निस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना जागृत होती है।

आरती का धार्मिक महत्व एवं फल | Religious Significance & Traditional Benefits

सनातन परंपरा में आरती को पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना गया है। मंत्रों या विधियों में रह गई त्रुटियों को आरती के माध्यम से पूर्ण किया जाता है। हनुमान जी की इस आरती के नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • भय और नकारात्मकता का नाश: हनुमान जी की आरती के प्रभाव से भूत-प्रेत, ऊपरी बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जाएं तुरंत दूर भागती हैं।
  • मानसिक शांति और आत्मविश्वास: जो व्यक्ति नियमित रूप से इस आरती का गान करता है, उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
  • संकटों से रक्षा: 'संकटमोचन' हनुमान जी अपने भक्तों के जीवन में आने वाले सभी विघ्न-बाधाओं को हर लेते हैं।
  • ग्रह दोषों से मुक्ति: विशेष रूप से शनि देव और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को शांत करने के लिए हनुमान जी की आरती अचूक मानी गई है।

आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation

आरती को पूर्ण श्रद्धा और सही विधि से करने पर ही उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। आरती की थाली सजाने और पूजा करने की प्रामाणिक विधि नीचे दी गई है:

थाली की सज्जा (Thali Decoration)

  • तांबे, पीतल या चांदी की एक स्वच्छ थाली लें।
  • थाली के केंद्र में रोली या कुमकुम से 'स्वास्तिक' का चिन्ह बनाएं।
  • थाली में अक्षत (साबुत चावल), फूल, और चंदन रखें।
  • आरती के लिए गाय के शुद्ध घी का दीया या फिर कपूर का उपयोग करें। हनुमान जी की पूजा में कपूर का विशेष महत्व है।

पूजन सामग्री

  • लाल फूल (विशेषकर गुड़हल या गुलाब)।
  • सिंदूर और चमेली का तेल (हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है)।
  • भोग के लिए बूंदी के लड्डू, रोट या गुड़-चना।

आरती करने का सही समय, दिशा एवं दीप घुमाने की विधि | Best Time & Movement

हनुमान जी की आरती करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत फलदायी होता है:

  • सही समय: हनुमान जी की आरती सुबह सूर्योदय के समय और शाम को सूर्यास्त के बाद (संध्याकाल) करना सबसे उत्तम माना जाता है। मंगलवार और शनिवार को विशेष आरती की जानी चाहिए।
  • सही दिशा: आरती करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • दीप घुमाने की विधि: आरती के दीपक को भगवान के विग्रह के समक्ष गोल घुमाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, सबसे पहले भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुखमंडल की एक बार और अंत में पूरे शरीर की सात बार आरती उतारनी चाहिए। इस प्रकार कुल चौदह बार आरती घुमाने का विधान है।

आरती के दौरान घंटी, शंख एवं दीप का महत्व | Bell, Conch & Lamp Symbolism

आरती के समय बजने वाली घंटी और शंख की ध्वनि केवल पारंपरिक नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है:

  • घंटी (Bell): घंटी की ध्वनि से निकलने वाली तरंगें वातावरण में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करती हैं और मन को एकाग्र करने में मदद करती हैं।
  • शंख (Conch): शंख की ध्वनि को विजय और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
  • दीप (Lamp): दीपक की लौ अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान के प्रकाश का प्रसार करती है।

घर में आरती कैसे करें एवं सावधानियां | Home Aarti & Rules

घर में हनुमान जी की आरती करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • आरती करने से पूर्व शरीर और मन की शुद्धि अनिवार्य है। स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • आरती के दौरान अग्निकांड से बचने के लिए दीपक और कपूर को सुरक्षित स्थान पर रखें।
  • हनुमान जी की पूजा में ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
  • आरती के समय मन में किसी के प्रति द्वेष या क्रोध की भावना न लाएं।

आरती का आध्यात्मिक संदेश एवं दैनिक जीवन सीख | Spiritual Message & Daily Life

"आरती कीजै हनुमान लला की" केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि कैसे असीमित शक्तियों के होने के बावजूद विनम्र बने रहना चाहिए। वे 'महाबलदाई' हैं, फिर भी वे स्वयं को केवल 'रामदूत' ही कहते हैं। आज के आधुनिक युग में, यह आरती हमें सिखाती है कि हम अपनी शक्तियों और ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करें, न कि अपने अहंकार की तुष्टि के लिए।

एक नजर में आरती की जानकारी | Quick Information Table

विवरण महत्वपूर्ण जानकारी
आरती का नाम आरती कीजै हनुमान लला की (Aarti Keejei Hanuman Lala Ki)
आराध्य देव श्री हनुमान जी (पवनपुत्र)
रचयिता / कवि स्वामी रामानंद जी (Swami Ramanand)
प्रसिद्ध स्वर अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal)
मुख्य भाषा अवधी / ब्रजभाषा मिश्रित हिंदी
सर्वोत्तम दिन मंगलवार और शनिवार (Tuesday & Saturday)
मुख्य त्योहार हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Jayanti)

मुख्य आध्यात्मिक सीख | Key Takeaways

  • समर्पण ही शक्ति है: हनुमान जी की शक्ति का स्रोत उनका प्रभु श्री राम के प्रति पूर्ण समर्पण है।
  • संकटों से न डरें: जैसे हनुमान जी ने लंका की खाई और समुद्र को पार किया, वैसे ही दृढ़ संकल्प से हम भी जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकते हैं।
  • सेवा भाव: निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही सच्ची पूजा है।
  • सकारात्मकता का संचार: हनुमान जी का नाम ही सभी प्रकार के मानसिक और शारीरिक विकारों को दूर करने वाला है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध आरती के रचयिता महान वैष्णव संत स्वामी रामानंद जी हैं। उन्होंने ही इस पावन आरती की रचना की थी।

वैसे तो हनुमान जी की आरती प्रतिदिन सुबह और शाम को करनी चाहिए, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन इस आरती को करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

हनुमान जी की पूजा और दीपक जलाने के लिए चमेली के तेल या शुद्ध गाय के घी का उपयोग करना सबसे उत्तम माना जाता है।

इसका अर्थ है कि हनुमान जी दुष्टों का नाश करने वाले हैं और वे भगवान श्री राम (रघुनाथ) के ही अंश या उनकी कला के रूप में प्रकट हुए हैं।

हाँ, महिलाएं हनुमान जी की आरती और पूजा कर सकती हैं। वे हनुमान जी को अपने पुत्र या भाई के रूप में पूज सकती हैं, परंतु उन्हें हनुमान जी के विग्रह को स्पर्श करने से बचना चाहिए।

हनुमान जी की आरती करने से भय, रोग, शोक, और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। इससे साधक को मानसिक शांति, साहस और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

अनुराधा पौडवाल जी की आवाज में गाई गई आरती अत्यंत सुरीली, शांत और ध्यान केंद्रित करने वाली है। इसे सुनने मात्र से मन को असीम शांति का अनुभव होता है।

आरती के समापन के बाद "कर्पूरगौरं करुणावतारं..." मंत्र या हनुमान जी का ध्यान मंत्र "मनोजवं मारुततुल्यवेगम..." बोलना अत्यंत शुभ माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "आरती कीजै हनुमान लला की" के आध्यात्मिक, साहित्यिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस सामग्री को तैयार करने में सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों, स्वामी रामानंद जी की परंपरा और सुप्रसिद्ध भजनों के संदर्भों का उपयोग किया गया है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पाठकों को हनुमान जी की भक्ति के प्रति प्रेरित करने और उन्हें सही पूजा विधि से अवगत कराने के उद्देश्य से लिखी गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीरामचरितमानस: गोस्वामी तुलसीदास कृत (सुंदरकांड एवं लंकाकांड)।
  • हनुमान चालीसा एवं संकटमोचन हनुमानाष्टक: पारंपरिक पाठ।
  • स्वामी रामानंद ग्रंथावली: आरती के मूल पाठ का संदर्भ।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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