प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
प्रस्तावना एवं परिचय
कितना प्यारा है श्रृंगार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
ओ हो, कितना प्यारा है श्रृंगार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
लेउ नज़र उतार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
सांवरिया तुमको किसने सजाया है
सांवरिया तुमको किसने सजाया है
तुझे सुन्दर से सुन्दर गजरा पहनाया है
तुझे सुन्दर से सुन्दर गजरा पहनाया है
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हो कितना प्यारा है श्रृंगार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
केशर चन्दन तिलक लगाकर
सज धज कर के बैठ्यो है
केशर चन्दन तिलक लगाकर
सज धज कर के बैठ्यो है
लग गए तेरे चार चाँद जो
लग गए तेरे चार चाँद जो
पहले तो निहार
कितना प्यारा है
ओ हो, कितना प्यारा है श्रृंगार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
लेउ नज़र उतार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
सांवरिया तेरा चेहरा चमकता है
सांवरिया तेरा चेहरा चमकता है
तेरा कीर्तन बहुत बड़ा
दरबार महकता है
तेरा कीर्तन बहुत बड़ा
दरबार महकता है
ओ हो, कितना प्यारा है श्रृंगार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
किसी भगत से कह कर कान्हा
काली टिकी लगवाले
किसी भगत से कह कर कान्हा
काली टिकी लगवाले
या फिर तू बोले तो लेउ
या फिर तू बोले तो लेउ
नूनराइ वार, कितना प्यारा है
ओ हो, कितना प्यारा हैं श्रृंगार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा हैं
लेउ नज़र उतार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
सांवरिया तेरे भगतो को तेरी फ़िक्र
सांवरिया तेरे भगतो को तेरी फ़िक्र
कही लग ना जाये तुझे
दुनिया की बुरी नज़र
कही लग ना जाये तुझे
दुनिया की बुरी नज़र
ओ हो, कितना प्यारा हैं श्रृंगार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
पता नहीं तू किस रंग का है
आज तलक ना जान सकी
पता नहीं तू किस रंग का है
आज तलक ना जान सकी
बनवारी हमने देखे हैं
बनवारी हमने देखे हैं तेरे रंग हजार
कितना प्यारा हैं
ओ हो, कितना प्यारा है श्रृंगार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
लेउ नज़र उतार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
सांवरिया थोड़ा बच बच के रहना जी
सांवरिया थोड़ा बच बच के रहना जी
कभी मान भी लो कान्हा
भक्तों का कहना जी
कभी मान भी लो कान्हा
भक्तों का कहना जी
कितना प्यारा है
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
लेउ नज़र उतार
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
सांवरिया तेरा रोज करूँ श्रृंगार
सांवरिया तेरा रोज करूँ श्रृंगार
कभी कुटिया में मेरे
आजाओ एक बार,
कभी कुटिया में मेरे
आजाओ एक बार
कितना प्यारा है
की तेरी लेउ नज़र उतार
कितना प्यारा है
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "कितना प्यारा है श्रृंगार भजन ( Kitna Pyara Hai Shringaar Lyrics in Hindi ) - Krishna Bhajan New Shyam Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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