Parvati Stotram

साथी हमारा कौन बने (Sathi Hamara Kaun Banega) - Shree Krishan Bhajan Harjeet Singh - Bhaktilok

143 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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साथी हमारा कौन बने (Sathi Hamara Kaun Banega) - Shree Krishan Bhajan Harjeet Singh - Bhaktilok

सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में संकीर्तन, भजन और प्रभु नाम स्मरण को जीवात्मा के कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग माना गया है। भक्तलोक (Bhaktilok) के इस विशेष प्रस्तुतिकरण में हम प्रस्तुत कर रहे हैं अत्यंत भावपूर्ण एवं लोकप्रिय भजन "साथी हमारा कौन बने (Sathi Hamara Kaun Banega)", जिसे सुप्रसिद्ध गायक हरजीत सिंह (Harjeet Singh) ने अपनी मधुर और रसीली वाणी से सजाया है। कलयुग के इस भागदौड़ भरे संसार में जब मनुष्य अकेलापन, मानसिक अशांति और मोह-माया के चक्रव्यूह में स्वयं को घिरा पाता है, तब केवल श्री बांकेबिहारी, मुरली मनोहर श्री कृष्ण ही उसके सच्चे और शाश्वत साथी बनते हैं।

यह भजन केवल एक गीत नहीं, अपितु जीवात्मा की वह आर्त पुकार है जो अपने प्रियतम परमात्मा से मिलने के लिए व्याकुल रहती है। एल्बम 'कन्हैया का सहारा' (Kanhaiya Ka Sahara) से लिया गया यह भजन, जिसके संगीतकार सरस्वती ऑडियो स्टूडियो (Sarswati Audio Studio) हैं और गीतकार विपुल (Vipul) जी की कलम से रचित है, श्रोताओं के हृदय में प्रेम, विरह, शरणागति और अनन्य भक्ति के भाव जगा देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व कासांगोपांग अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भजन का शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करने के लिए सम्पूर्ण बोल नीचे दिए गए हैं:

मखड़ा (Refrain):

साथी हमारा कौन बनेगा, तुम न बनोगे तो कौन बनेगा?
हे मुरली वाले श्याम, मेरा सांवरा सलोना घनश्याम...
संसार की इस भीड़ में कोई अपना न नजर आता है,
हर कोई स्वार्थ की खातिर रिश्ता यहाँ निभाता है।

अंतरा 1:

मैया यशोदा के प्यारे, नन्दलाल हमारे हो,
गिरिधारी गोवर्धन वाले, संकट के मारे हो।
जब-जब भीड़ पड़ी भक्तों पर, दौड़े चले आए हो,
द्रौपदी की लाज बचाई, गजराज बचाए हो।
अबकी बार हमारी बारी, तुम न सुनोगे तो कौन सुनेगा?
साथी हमारा कौन बनेगा, तुम न बनोगे तो कौन बनेगा?

अंतरा 2:

दुनिया के नाते झूठे, झूठी ये माया सारी,
चरणों से लिपटा ले मुझको, हे बांके बिहारी।
नाव भंवर में अटकी मेरी, तू ही खिवैया बन जा,
इस जीवन की नैया का तू ही खेवनहार बन जा।
राह दिखा दे मुझको मोहन, तू न चलोगे तो कौन चलेगा?
साथी हमारा कौन बनेगा, तुम न बनोगे तो कौन बनेगा?

समापन / संकीर्तन:

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।
बोलो बांके बिहारी लाल की जय! जय श्री कृष्ण!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह पावन भजन जीवात्मा और परमात्मा के बीच के उस अटूट और शाश्वत संबंध को रेखांकित करता है जहाँ भौतिक संसार के सभी रिश्ते-नाते क्षणिक और स्वार्थी प्रतीत होते हैं। गीतकार विपुल जी ने बड़े ही सुंदर शब्दों में मनुष्य की उस लाचारी और संसार की नश्वरता को दर्शाया है जब वह चारों तरफ से निराशा महसूस करता है।

"साथी हमारा कौन बनेगा, तुम न बनोगे तो कौन बनेगा?" - इस पंक्ति में भक्त भगवान श्री कृष्ण के समक्ष पूर्ण आत्मसमर्पण (Complete Surrender) कर रहा है। वह कहता है कि हे प्रभु! इस विशाल और स्वार्थी संसार में मेरा अपना कहने वाला कोई नहीं है। यदि आप ही मेरे संकटों को दूर करने वाले साथी नहीं बनेंगे, तो फिर इस ब्रह्मांड में ऐसा कौन है जो मेरी पुकार सुनेगा?

भजन के अंतरा में ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों जैसे द्रौपदी की लाज बचाने और गजराज को ग्राह से मुक्त कराने का स्मरण कराया गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि श्री कृष्ण शरणागतवत्सल हैं। वे अपने भक्तों की पुकार सुनने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। जब भक्त कहता है कि "नाव भंवर में अटकी मेरी, तू ही खिवैया बन जा", तो उसका तात्पर्य यह है कि भवसागर रूपी इस संसार में मनुष्य का जीवन एक नाव के समान है, जो मोह, माया और कर्मों के भंवर में फंसी हुई है। केवल भगवान रूपी खिवैया ही इसे पार लगा सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • अनन्य भक्ति और शरणागति: यह भजन साधक के मन में भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास जगाता है।
  • कलयुग में नामस्मरण की महिमा: कलयुग में भगवान का कीर्तन और भजन ही भवसागर पार करने का एकमात्र सुलभ साधन है।
  • भावनात्मक जुड़ाव: हरजीत सिंह की मर्मस्पर्शी गायकी और सरस्वती ऑडियो स्टूडियो का शांत संगीत श्रोताओं को ध्यान और भजन की गहराई में ले जाता है।
  • दैनिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: सुबह-शाम की पूजा, एकादशी जागरण, और श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसरों पर श्रवण करने के लिए यह एक आदर्श भजन है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए उचित विधि और समय का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • उपयुक्त समय: ब्रह्म बेला (प्रातः काल 4 से 6 बजे) या संध्या वंदन के समय (संध्याकाल 6 से 8 बजे) इस भजन का श्रवण या गायन अत्यधिक फलदायी होता है।
  • स्थान: घर के पूजा स्थल, मंदिर, या किसी शांत एकांत स्थान पर बैठकर ध्यान मुद्रा में इसे सुनें।
  • मानस की स्थिति: भजन गाते या सुनते समय मन में किसी भी प्रकार का द्वेष या चिंता न रखकर पूर्ण रूप से श्री कृष्ण के श्रीचरणों में ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य श्री कृष्ण (Shree Krishna) हैं, जिन्हें सनातन धर्म में पूर्णावतार, जगतगुरु और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। ब्रज के राजा श्री कृष्ण, जो भक्तों के दुःख दूर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, इस भजन के केंद्र बिंदु हैं। संत परंपरा में सूरदास, मीराबाई और चैतन्य महाप्रभु जैसे संतों ने भी इसी प्रकार की विरह और मिलन की भक्ति को अपने पदों के माध्यम से प्रसारित किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"साथी हमारा कौन बनेगा" भजन को BBM Series के अंतर्गत Shubham Audio Video लेबल द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इसके गीतकार विपुल (Vipul) जी हैं, जिन्होंने बड़े सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में भक्त की पुकार को पिरोया है। गायक हरजीत सिंह (Harjeet Singh) की सुरमयी आवाज ने इस रचना में प्राण फूंक दिए हैं, जिससे यह भजन भक्तलोक के पाठकों और श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और ब्रजभाषा मिश्रित बोलचाल की भाषा में रचित है, जिसे सामान्य जनमानस आसानी से समझ सकता है। इसमें रूपक अलंकार और करुण रस की प्रधानता है। "नाव भंवर में अटकी मेरी" और "स्वार्थ की खातिर रिश्ता यहाँ निभाता है" जैसी पंक्तियाँ मानव जीवन के यथार्थ और आध्यात्मिक दर्शन को बहुत ही सहजता से प्रस्तुत करती हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • ईश्वर पर अटूट विश्वास: भौतिक संसार के रिश्ते स्वार्थी हो सकते हैं, परंतु परमात्मा का प्रेम निस्वार्थ और शाश्वत होता है।
  • अहंकार का त्याग: संकट के समय मनुष्य को अपना अहंकार छोड़कर ईश्वर के चरणों में शरण लेनी चाहिए।
  • धैर्य और सहनशीलता: जीवन की कठिनाइयां अस्थायी हैं, यदि भगवान पर भरोसा है तो हर भंवर से पार पाया जा सकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
साथी मित्र, मार्गदर्शक, हमसफर जीवन के हर मोड़ पर साथ निभाने वाला परमात्मा
खिवैया नाव चलाने वाला, मल्लाह संसार रूपी सागर से पार लगाने वाले श्री कृष्ण
भंवर पानी का चक्कर, संकट जीवन के कठिन संघर्ष और मोह-माया का जाल
बांके बिहारी टेढ़े होकर खड़े होने वाले सुंदर श्री कृष्ण श्री वृंदावन धाम के आराध्य देव

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"संसार की इस भीड़ में कोई अपना न नजर आता है, हर कोई स्वार्थ की खातिर रिश्ता यहाँ निभाता है।"
इस पंक्ति का गहरा दार्शनिक अर्थ यह है कि भौतिक जगत में जितने भी संबंध हम देखते हैं, वे किसी न किसी स्वार्थ या अपेक्षा से जुड़े होते हैं। केवल भगवान ही एकमात्र ऐसे हैं जो बिना किसी शर्त के जीव से प्रेम करते हैं।

"जब-जब भीड़ पड़ी भक्तों पर, दौड़े चले आए हो..."
यह पंक्ति इतिहास के उन पावन प्रसंगों की याद दिलाती है जब भक्त संकट में थे और भगवान ने अपनी योगमाया से उनकी रक्षा की। यह भक्त के मन में यह विश्वास जगाती है कि आज भी भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए उतने ही तत्पर हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक का स्मरण किया जा सकता है:

"अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥"

(अर्थात: जो लोग अनन्य भाव से मेरा चिंतन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, उनके योग-क्षेम का भार मैं स्वयं वहन करता हूँ।)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम साथी हमारा कौन बने (Sathi Hamara Kaun Banega)
आराध्य देव श्री कृष्ण / बांके बिहारी
गायक हरजीत सिंह (Harjeet Singh)
गीतकार विपुल (Vipul)
संगीतकार सरस्वती ऑडियो स्टूडियो (Sarswati Audio Studio)
एल्बम / सीरीज कन्हैया का Sahara / BBM Series
भाषा हिंदी / ब्रजभाषा
मुख्य भाव भक्ति, शरणागति और विरह

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्म 1: "साथी हमारा कौन बने" भजन के गायक कौन हैं?

उत्तर: इस भजन के लोकप्रिय गायक हरजीत सिंह (Harjeet Singh) हैं।

प्रश्न 2: यह भजन किस एल्बम से लिया गया है?

उत्तर: यह भजन 'कन्हैया का सहारा' एल्बम का हिस्सा है, जिसे BBM Series द्वारा रिलीज़ किया गया है।

प्रश्न 3: इस भजन के गीतकार कौन हैं?

उत्तर: इस सुंदर भजन के बोल विपुल (Vipul) जी द्वारा लिखे गए हैं।

प्रश्न 4: भजन का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: भजन का मुख्य संदेश यह है कि संसार के सभी संबंध स्वार्थी हैं, और केवल श्री कृष्ण ही हमारे सच्चे और शाश्वत साथी हैं।

प्रश्न 5: इस भजन को कब सुनना चाहिए?

उत्तर: इसे प्रातः काल पूजा के समय, एकादशी व्रत या किसी भी धार्मिक सत्संग के दौरान सुना जा सकता है।

प्रश्न 6: क्या इस भजन के बोल हिंदी में उपलब्ध हैं?

उत्तर: हाँ, भक्तलोक पर इसके सम्पूर्ण बोल देवनागरी लिपि में अर्थ सहित उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: श्री कृष्ण को जीवन का साथी बनाने का क्या तात्पर्य है?

उत्तर: इसका तात्पर्य अपने जीवन की हर परिस्थिति में भगवान पर पूर्ण विश्वास रखना और उनकी शरण में रहना है।

प्रश्न 8: इस भजन को सुनकर मन को शांति कैसे मिलती है?

उत्तर: इसके मार्मिक बोल और शांत संगीत मन की चिंताओं को दूर कर ईश्वर के प्रति ध्यान केंद्रित करते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म की भक्ति परंपरा, संत साहित्य और उपलब्ध ऑडियो-विजुअल स्रोतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को उच्च कोटि की भक्ति सामग्री प्रदान करना है ताकि वे अपने इष्टदेव का स्मरण कर आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं गीता प्रेस गोरखपुर प्रकाशन
  • पारंपरिक संकीर्तन एवं भजन संग्रह
  • BBM Series व Shubham Audio Video आधिकारिक संगीत अभिलेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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