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Holi Bhajan

Rang Barse Brij Mein Gulal Barse Lyrics (Holi Bhajan) – रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे हो रंग बरसे

259 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🎨 रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे – होली विशेष भजन

(Rang Barse Brij Mein Gulal Barse) – Holi Bhajan 2026

गायक : देवाशीष जी & निकिता जी || रचनाकार : राधेय संकीर्तन

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: देवाशीष जी & निकिता जी
✍️ लेखक: राधेय संकीर्तन
🏷️ श्रेणी: होली भजन / ब्रज होली

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे हो रंग बरसे,
होरी आई होरी आई होरी आई,
होरी आई होरी आई होरी आई॥

॥ अंतरा १ ॥

धूम मचावे देखो आए बनवारी,
मस्ती चढ़ी है आज रंग की फुवारी,
गोपी ग्वाला संग पूरो ब्रज मटके,
हो रंग बरसे...

॥ अंतरा २ ॥

लठमार खेले होरी खेलें लडुओं से,
डूबे बनवारी आज पूरे फूलन से,
शोर मचे हो हो होरी, हो रंग बरसे...

॥ अंतरा ३ ॥

कान्हा आए लेके टोली, मचो शोर है होरी होरी,
बिगरो मेरो श्याम सलोनो, बिगरी है ब्रजभानु किशोरी,
बरसाने में वृंदावन में होरी होरी होरी,
खेले नंद के लाला होरी, खेले होरी राधा गोरी॥

॥ अंतरा ४ ॥

नीले पीले लाल गुलाल मारे रसिया,
ऐसों डारे रंग के छूटे नाही रसिया,
मारी पिचकारी टेढ़ो करके, हो रंग बरसे...

॥ अंतरा ५ ॥

अबीर उड़ाके नाचे बनवारी,
झूमे गोपी ग्वाला सारे, झूमे गिरधारी,
आज गिरधारी ने अति ही कर डारी,
ऐसी खेली होरी मोहे रंग दई सारी॥

॥ अंतरा ६ ॥

ऐसे डूबे कान्हा संग सारे होरी में,
भूले कान्हा संग सब हारे होरी में,
बिछे रंग उड़े रंग, रंग चहुँ ओरी,
आज ब्रज मची है भारी होरी॥

॥ अंतरा ७ ॥

ब्रज की है होरी, ब्रजवासी पूरे होरी हो,
रंगे हैं रंगीले पूरे नाचे नर नारी हो,
नाचे है अबीर उड़ाके गिरधारी हो,
आज ब्रज में हो हो हो होरी हो॥

होरी है होरी है ब्रज पूरो गाए,
राधे-राधे नाम की रटना लगाएँ,
होरी में मगन होके नाचे सबरे हो रंग बरसे...
रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे हो रंग बरसे॥

🎤 गायक :- देवाशीष जी & निकिता जी

✍️ लेखक :- राधेय संकीर्तन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन ब्रज की होली के उल्लास, रंग-गुलाल, और राधा-कृष्ण के प्रेममय खेल का सजीव चित्रण करता है। “रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे” – अर्थात आज ब्रजधाम में चारों ओर रंग और गुलाल की बरसात हो रही है। होली आ गई है, और इस उमंग में गोपी-ग्वाले, कान्हा-बनवारी सभी डूबे हुए हैं।

“लठमार खेले होरी” से बरसाने की प्रसिद्ध लठमार होली की ओर संकेत है, जहाँ गोपियाँ कान्हा को लाठियों से मारती हैं और वे ढाल बचाकर रंग डालते हैं। “बरसाने में वृंदावन में होरी होरी” पंक्ति में दोनों धामों की होली के मिलन को दर्शाया गया है।

भजन में रंगों के माध्यम से भक्ति का अनूठा रस व्यक्त हुआ है – जैसे अबीर-गुलाल उड़े, वैसे ही भक्त के हृदय में प्रेम का रंग घोल दिया गया है। कान्हा की पिचकारी और टेढ़ी-बाँकी छवि ने सबको रंग दिया है। अंत में कहा गया है कि सारा ब्रज “राधे-राधे” के नाम में मगन होकर झूम रहा है।

🎉 ब्रज की होली – एक अलौकिक उत्सव

ब्रज की होली का अपना ही अलौकिक महत्व है। यह माना जाता है कि यहाँ होली का आरंभ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। होली के अवसर पर वृंदावन, मथुरा, बरसाना, नंदगाँव में अलग-अलग प्रकार की होली खेली जाती है – फूलों की होली, लड्डुओं की होली, अबीर-गुलाल की होली और प्रसिद्ध लठमार होली।

बरसाने की लठमार होली विश्वविख्यात है, जहाँ गोपियाँ लाठियों से कृष्ण और उनके सखाओं को मारती हैं और वे ढाल बचाकर रंग डालते हैं। वृंदावन की होली में बैंकों बिहारी मंदिर में फूलों की होली होती है, जहाँ भक्त झूम उठते हैं।

यह भजन उसी दिव्य होली के रस में सराबोर कर देता है। “रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे” की धुन आज हर भक्त के मुँह पर गूँजती है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

💖 प्रेम और उल्लास का संगम

यह भजन केवल रंगों का गान नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रेम और ब्रजवासियों की अनन्य भक्ति की अभिव्यक्ति है। होली के रंगों में सब एक समान हो जाते हैं – चाहे गोपी हो या ग्वाला, नर हो या नारी।

✨ धार्मिक आस्था और संस्कृति

ब्रज की होली श्रद्धा और संस्कृति का अनूठा संगम है। लाखों भक्त होली पर ब्रज यात्रा करते हैं और इस भजन के माध्यम से उसी आनंद की अनुभूति घर बैठे होती है।

🎯 संदेश : जैसे ब्रज में रंग और गुलाल बरसता है, वैसे ही हमारे जीवन में भी प्रभु के प्रेम का रंग बरसे। सच्चे भाव से जो भी होली में रंगा, वह कान्हा का हो गया।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इति ब्रजहोलीभजनम् ॥
॥ राधे राधे बरसो रंग, बरसो गुलाल ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Rang Barse Brij Mein Gulal Barse Lyrics (Holi Bhajan) – रंग बरसे ब्रज में गुलाल बरसे हो रंग बरसे" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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