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Holi Bhajan

सावन का महीना फूलो की होली – खाटू श्याम भजन (Sawan Ka Mahina Phoolon Ki Holi) | Khatu Shyam Bhajan

247 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 सावन का महीना फूलो की होली – खाटू श्याम भजन

(Sawan Ka Mahina Phoolon Ki Holi) – Khatu Shyam Bhajan 2026

आई है देखो भक्तो की टोली ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन
📍 स्थान: खाटू श्याम जी

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

सावन का महीना फूलो की होली
आई है देखो भक्तो की टोली

सावन का महीना फूलो की होली
आई है देखो भक्तो की टोली

होली है होली देखो आई है भक्तो की टोली
होली है होली देखो आई है भक्तो की टोली

॥ अंतरा १ ॥

आज होली खेलेंगे बाबा के संग में
बाबा को रंग देंगे फूलो के रंग में
आओ रे आओ ज़रा बाबा को निकट लगाओ

सावन का महीना फूलो की होली
आई है देखो भक्तो की टोली

होली है होली देखो आई है भक्तो की टोली
होली है होली देखो आई है भक्तो की टोली

॥ अंतरा २ ॥

जूही बेला चंपा और मोगरा
लाल गुलाब का भरा है टोकरा
आओ रे आओ ज़रा बाबा को फूल उड़ाव
आओ रे आओ ज़रा बाबा को फूल उड़ाव

सावन का महीना फूलो की होली
आई है देखो भक्तो की टोली

आओ रे आओ ज़रा बाबा को फूल उड़ाव
आओ रे आओ ज़रा बाबा को फूल उड़ाव

॥ अंतरा ३ ॥

आज मेरे बाबा का प्यार बरसेगा
बाँवरी सारे भक्तो मिलेगा

आओ रे आओ ज़रा बाबा को फूल उड़ाव
आओ रे आओ ज़रा बाबा को फूल उड़ाव

🎵 खाटू श्याम जी का फूलों की होली भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन सावन मास में खाटू श्याम जी की फूलों की होली का वर्णन करता है। "सावन का महीना फूलो की होली, आई है देखो भक्तो की टोली" – सावन का महीना आया है और फूलों की होली खेली जा रही है। भक्तों की टोली आ गई है।

"आज होली खेलेंगे बाबा के संग में, बाबा को रंग देंगे फूलो के रंग में" – आज हम बाबा (श्याम जी) के संग होली खेलेंगे, उन्हें फूलों के रंग में रंग देंगे। आओ, बाबा को निकट लगाओ।

"जूही बेला चंपा और मोगरा, लाल गुलाब का भरा है टोकरा" – जूही, बेला, चंपा, मोगरा और लाल गुलाब के फूलों से टोकरा भरा है। आओ, बाबा पर फूल उड़ाओ।

"आज मेरे बाबा का प्यार बरसेगा, बाँवरी सारे भक्तो मिलेगा" – आज मेरे बाबा का प्यार बरसेगा और सभी भक्तों को दीवानगी मिलेगी।

यह भजन खाटू श्याम जी की फूलों की होली के उत्सव को दर्शाता है, जो सावन मास में विशेष रूप से मनाया जाता है।

📍 खाटू श्याम जी की फूलों की होली

खाटू श्याम जी के मंदिर में सावन मास में विशेष फूलों की होली का आयोजन होता है। भक्तगण विभिन्न प्रकार के फूल – गुलाब, मोगरा, चंपा, जूही, बेला आदि लेकर आते हैं और श्याम बाबा पर फूल बरसाते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है।

यह परंपरा भक्तों और श्याम बाबा के बीच प्रेम और आत्मीयता का प्रतीक है। भक्त बाबा को फूलों की होली खिलाकर अपने प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🌸 फूलों की होली

फूलों की होली रंगों की होली से भिन्न है। इसमें अबीर-गुलाल की जगह सुगंधित फूलों का प्रयोग होता है। यह और भी सौम्य और भक्तिमय वातावरण बनाता है।

🙇 भक्तों की टोली

भजन में बार-बार "भक्तो की टोली" का उल्लेख है। यह सामूहिक भक्ति और उत्सव के भाव को दर्शाता है।

🎯 संदेश : सावन के महीने में श्याम बाबा की फूलों की होली में शामिल होना हर भक्त का सौभाग्य है। जूही-बेला-चंपा-मोगरा और लाल गुलाब के फूलों से बाबा को रंग दो, उनका प्यार बरसेगा और सभी भक्तों को दीवानगी मिलेगी।

॥ सावन का महीना फूलो की होली ॥
॥ आई है देखो भक्तो की टोली ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "सावन का महीना फूलो की होली – खाटू श्याम भजन (Sawan Ka Mahina Phoolon Ki Holi) | Khatu Shyam Bhajan" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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