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Holi Bhajan

होली खेल रहे नंदलाल मथुरा की कुंज गलीन में – होली भजन | Holi Khel Rahe Nandlal Mathura Ki Kunj Galiyon Mein

155 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 होली खेल रहे नंदलाल मथुरा की कुंज गलीन में – होली भजन

(Holi Khel Rahe Nandlal Mathura Ki Kunj Galiyon Mein) – Krishna Holi Bhajan

मथुरा की कुंज गलिन में, गोकुल की कुंज गलीन में ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: होली भजन, कृष्ण भजन
📍 स्थान: मथुरा, गोकुल, ब्रज

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

होली खेल रहे नंदलाल मथुरा की कुंज गलीन में,
मथुरा की कुंज गलिन में गोकुल की कुंज गलीन में,
होली खेल रहे नंदलाल....

॥ अंतरा १ ॥

वो ग्वाल बाल संग आते गलियों में धूम मचाते,
ऐसे नटखट दीनदयाल मथुरा की कुंज गलीन में,
होली खेल रहे नंदलाल....

॥ अंतरा २ ॥

हम संग सखियों के जावे मार्ग में ठाड़े पांवे,
हमें रहता यही मलाल मथुरा की कुंज गलीन में,
होली खेल रहे नंदलाल....

॥ अंतरा ३ ॥

कभी बंसी मधुर बजावे कभी भारी रंग बरसावे,
कभी देवे उड़ाए गुलाल मथुरा की कुंज गलीन में,
होली खेल रहे नंदलाल....

॥ अंतरा ४ ॥

वो तो नए कलश मंगवाए और उन में जल भरवाए,
अरी रंग घोल रहे नंदलाल मथुरा की कुंज गलीन में,
होली खेल रहे नंदलाल....

॥ अंतरा ५ ॥

मेरे भर पिचकारी मारी चुंदर कि आव बिगाड़ी,
अरी मेरे माथे मलो गुलाल मथुरा की कुंज गलीन में,
होली खेल रहे नंदलाल....

॥ अंतरा ६ ॥

कोई ढोल सितार बजावे कोई हर्ष हर्ष होरी गावे,
अरे कोई नाचे दे दे ताल मथुरा की कुंज गलीन में,
होली खेल रहे नंदलाल....

🎵 मथुरा-गोकुल की होली भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन मथुरा और गोकुल की कुंज गलियों में नंदलाल (कृष्ण) द्वारा खेली जा रही होली का वर्णन करता है। "होली खेल रहे नंदलाल मथुरा की कुंज गलीन में" – नंदलाल मथुरा की कुंज गलियों में होली खेल रहे हैं।

"वो ग्वाल बाल संग आते गलियों में धूम मचाते" – वे ग्वाल-बालों के संग आते हैं और गलियों में धूम मचाते हैं। वे नटखट हैं और दीनदयाल (दीनों पर दया करने वाले) हैं।

"हम संग सखियों के जावे मार्ग में ठाड़े पांवे" – गोपी कहती है कि हम सखियों के संग जाते हैं तो रास्ते में खड़े पाते हैं। हमें यही मलाल (अफ़सोस) रहता है।

"कभी बंसी मधुर बजावे कभी भारी रंग बरसावे, कभी देवे उड़ाए गुलाल" – कभी वे मधुर बांसुरी बजाते हैं, कभी भारी रंग बरसाते हैं, कभी गुलाल उड़ाते हैं।

"वो तो नए कलश मंगवाए और उन में जल भरवाए, अरी रंग घोल रहे नंदलाल" – उन्होंने नए कलश मंगवाए और उनमें जल भरवाया, और अब रंग घोल रहे हैं।

"मेरे भर पिचकारी मारी चुंदर कि आव बिगाड़ी, अरी मेरे माथे मलो गुलाल" – गोपी शिकायत करती है कि उसने भर-भरकर पिचकारी मारी और मेरी चुनरिया बिगाड़ दी। अब मेरे माथे पर गुलाल मलो।

"कोई ढोल सितार बजावे कोई हर्ष हर्ष होरी गावे, अरे कोई नाचे दे दे ताल" – कोई ढोल-सितार बजाता है, कोई हर्षित होकर होरी गाता है, और कोई ताल देकर नाचता है।

यह भजन मथुरा-गोकुल की गलियों में कृष्ण और ग्वाल-बालों के साथ खेली जाने वाली होली, गोपियों की शिकायतों, बांसुरी की धुन, रंग-गुलाल के उड़ान, और संगीत-नृत्य के उत्सव का अद्भुत चित्रण है।

📍 मथुरा-गोकुल की कुंज गलियाँ

मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है। गोकुल वह स्थान है जहाँ उन्होंने अपना बचपन बिताया। यहाँ की कुंज गलियाँ (बेलों से घिरी संकरी गलियाँ) राधा-कृष्ण की लीलाओं का केंद्र हैं।

इन्हीं गलियों में कृष्ण ग्वाल-बालों के संग होली खेलते थे, बांसुरी बजाते थे, और गोपियों के साथ रास रचाते थे। यह भजन उन्हीं लीलाओं को जीवंत करता है।

"दीनदयाल" – दीनों पर दया करने वाले, यह कृष्ण का एक विशेषण है। वे नटखट हैं, लेकिन साथ ही दयालु भी हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎶 संगीत और नृत्य

इस भजन में ढोल, सितार, ताल, होरी गाने और नाचने का वर्णन है। यह दर्शाता है कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि संगीत और नृत्य का भी त्यौहार है।

💕 गोपियों का मलाल

"हमें रहता यही मलाल" – गोपियों के मन में यह अफ़सोस है कि वे कृष्ण के साथ होली में शामिल होने से वंचित रह जाती हैं या उनकी चुनरिया बिगड़ जाती हैं। यह शिकायत और अफ़सोस भी प्रेम का ही रूप है।

🎯 संदेश : मथुरा-गोकुल की कुंज गलियों में नंदलाल की होली का दृश्य अद्भुत है। ग्वाल-बाल संग धूम, बांसुरी की धुन, रंग-गुलाल की बौछार, और संगीत-नृत्य का उत्सव – यह सब मिलकर उस दिव्य होली का निर्माण करते हैं जहाँ हर भक्त शामिल होना चाहता है।

॥ होली खेल रहे नंदलाल ॥
॥ मथुरा की कुंज गलीन में, गोकुल की कुंज गलीन में ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "होली खेल रहे नंदलाल मथुरा की कुंज गलीन में – होली भजन | Holi Khel Rahe Nandlal Mathura Ki Kunj Galiyon Mein" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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