🙏 होली खेल रहे बांके बिहारी – होली भजन
(Holi Khel Rahe Banke Bihari) – Vrindavan Ki Holi
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
होली खेल रहे बांके बिहारी,
आज रंग बरस रहा।
और झूम रही दुनिया सारी,
आज रंग बरस रहा॥
होली खेल रहे बांके बिहारी,
आज रंग बरस रहा॥
॥ अंतरा १ ॥
अबीर गुलाल के बादल छा रहे।
होली है, होली है, शोर मचा रहे।
झोली भर के गुलाल की मारी,
आज रंग बरस रहा॥
और झूम रही दुनिया सारी,
आज रंग बरस रहा।
होली खेल रहे बांकेबिहारी,
आज रंग बरस रहा॥
॥ अंतरा २ ॥
देख देख सखियन के मन हर्षा रहे।
मेरे बांके बिहारी,
आज प्रेम बरसा रहे।
उनके संग में हैं राधा प्यारी,
आज रंग बरस रहा॥
और झूम रही दुनिया सारी,
आज रंग बरस रहा।
होली खेल रहे बांकेबिहारी,
आज रंग बरस रहा॥
॥ अंतरा ३ ॥
आज नंदलाला ने धूम मचाई है।
प्रेम भरी होली की,
झलक दिखाई है।
(और) रंग भर भर के मारी पिचकारी,
आज रंग बरस रहा॥
और झूम रही दुनिया सारी,
आज रंग बरस रहा।
होली खेल रहे बांकेबिहारी,
आज रंग बरस रहा॥
॥ अंतरा ४ ॥
अबीर गुलाल और टेसो का रंग है।
वृंदावन बरसानो झूम रह्यो संग है।
मैं बार बार जाऊं बलिहारी॥
ओ रंग बांको सांवरिया डार गयो री
ओ डार गयो री, ओ डार गयो री
ओ रंग बांको सांवरिया डार गयो री
और झूम रही दुनिया सारी,
आज रंग बरस रहा।
होली खेल रहे बांकेबिहारी,
आज रंग बरस रहा॥
🎵 बांके बिहारी मंदिर वृन्दावन की होली
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन वृन्दावन के बांके बिहारी मंदिर की प्रसिद्ध होली पर आधारित है। "होली खेल रहे बांके बिहारी, आज रंग बरस रहा" – बांके बिहारी (कृष्ण) होली खेल रहे हैं और आज रंग बरस रहा है। पूरी दुनिया झूम रही है।
"अबीर गुलाल के बादल छा रहे, होली है होली है शोर मचा रहे" – अबीर और गुलाल के बादल छा गए हैं। सब "होली है-होली है" का शोर मचा रहे हैं। गोपियाँ झोली भरकर गुलाल मार रही हैं।
"देख देख सखियन के मन हर्षा रहे, मेरे बांके बिहारी आज प्रेम बरसा रहे" – सखियाँ देख-देखकर हर्षित हो रही हैं। बांके बिहारी आज प्रेम बरसा रहे हैं। उनके संग में राधा प्यारी हैं।
"आज नंदलाला ने धूम मचाई है, प्रेम भरी होली की झलक दिखाई है" – नंदलाला (कृष्ण) ने आज धूम मचा दी है। उन्होंने प्रेम भरी होली की झलक दिखाई है। रंग भर-भरकर पिचकारी मारी है।
"अबीर गुलाल और टेसो का रंग है, वृंदावन बरसानो झूम रह्यो संग है" – अबीर, गुलाल और टेसू का रंग है। वृन्दावन और बरसाना दोनों साथ झूम रहे हैं। भक्त बार-बार बलिहारी जा रहा है।
"ओ रंग बांको सांवरिया डार गयो री" – इस पंक्ति में गोपी कहती है कि उस साँवरे (कृष्ण) ने रंग डाल दिया है। यह राजस्थानी/ब्रज भाषा का प्रभाव है।
यह भजन वृन्दावन की होली के उत्सव, राधा-कृष्ण के प्रेम, और पूरे ब्रजमंडल के उल्लास का अद्भुत चित्रण है।
📍 बांके बिहारी मंदिर वृन्दावन की होली
बांके बिहारी मंदिर वृन्दावन का प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ की होली विश्वविख्यात है। फाल्गुन मास में यहाँ विशेष होली का आयोजन होता है।
"टेसो का रंग" – टेसू के फूलों से बना प्राकृतिक रंग, जो होली में प्रयोग किया जाता है।
"वृंदावन बरसानो" – वृन्दावन और बरसाना, ये दोनों स्थान राधा-कृष्ण की लीलाओं के केंद्र हैं। होली के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।
"बलिहारी जाना" – बलिहारी का अर्थ है न्योछावर होना। भक्त कहता है कि मैं इस दृश्य पर बार-बार न्योछावर जाता हूँ।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🎭 बांके बिहारी का स्वरूप
"बांके बिहारी" – बांके का अर्थ है टेढ़ा (त्रिभंगी मुद्रा वाला) और बिहारी का अर्थ है विहार करने वाला। यह कृष्ण के वृन्दावन के उस स्वरूप को दर्शाता है जो तिरछे भाव से खड़े होकर बाँसुरी बजाते हैं।
🌍 विश्वव्यापी उल्लास
"और झूम रही दुनिया सारी" – यह पंक्ति दर्शाती है कि बांके बिहारी की होली में केवल ब्रज ही नहीं, बल्कि सारा संसार झूम उठता है। यह उस दिव्य आनंद का प्रतीक है जो भक्ति में सबको एक सूत्र में बाँध देता है।
🎯 संदेश : जब बांके बिहारी होली खेलते हैं, तो रंग ही नहीं, प्रेम भी बरसता है। अबीर-गुलाल के बादल छा जाते हैं और सारी दुनिया झूम उठती है। राधा के संग में यह होली और भी प्यारी हो जाती है। यह भजन हमें उस दिव्य प्रेमोत्सव में शामिल होने का आह्वान करता है।