🙏 मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली – होली भजन

(Main Vrindavan Ko Jaaun Mere Shyam Khel Rahe Holi) – Vrindavan Ki Holi

अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: होली भजन, कृष्ण भजन
📍 स्थान: वृन्दावन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली,
मेरे श्याम खेल रहे होली, घनश्याम खेल रहे होली,
अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली॥

॥ अंतरा १ ॥

मैं जमुना तट पर जाऊं लहरों के दर्शन पाऊं,
अरे मैं खूब करूं स्नान मेरे श्याम खेल रहे होली,
अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली॥

॥ अंतरा २ ॥

मैं बंसीवट पर जाऊं मुरली की तान सुन आऊं,
अरे मैं छम छम नाच दिखाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली,
अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली॥

॥ अंतरा ३ ॥

मैं कुंज गलिन में जाऊं झोली में रंग ले जाऊं,
अरे मैं खूब उड़ाऊ गुलाल मेरे श्याम खेल रहे होली,
अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली॥

॥ अंतरा ४ ॥

मैं भर पिचकारी मारूं वाके मुकुट की आव बिगारू,
अरे मैं अब ना लगाऊं देर मेरे श्याम खेल रहे होली,
अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली॥

॥ अंतरा ५ ॥

मैं भर पिचकारी मारूं माला की आव बिगारू,
अरे वाके मुख में मलू गुलाल मेरे साथ खेल रहे होली,
अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली॥

॥ अंतरा ६ ॥

मैं मंदिर मंदिर जाऊं कान्हा के दर्शन पाऊं,
अरे मैं खूब करूं मनुहार मेरे श्याम खेल रहे होली,
अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली॥

🎵 वृन्दावन की होली भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन एक भक्त की वृन्दावन जाने और वहाँ श्याम (कृष्ण) के साथ होली खेलने की उत्कट अभिलाषा को व्यक्त करता है। "अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली" – मैं वृन्दावन जाऊँ, जहाँ मेरे श्याम होली खेल रहे हैं।

"मैं जमुना तट पर जाऊं लहरों के दर्शन पाऊं, अरे मैं खूब करूं स्नान" – मैं यमुना के तट पर जाऊँ, लहरों के दर्शन करूँ और खूब स्नान करूँ।

"मैं बंसीवट पर जाऊं मुरली की तान सुन आऊं, अरे मैं छम छम नाच दिखाऊं" – मैं बंसीवट (वह स्थान जहाँ कृष्ण बांसुरी बजाते थे) जाऊँ, मुरली की तान सुनूँ और छम-छम नाच दिखाऊँ।

"मैं कुंज गलिन में जाऊं झोली में रंग ले जाऊं, अरे मैं खूब उड़ाऊ गुलाल" – मैं कुंज गलियों में जाऊँ, झोली में रंग ले जाऊँ और खूब गुलाल उड़ाऊँ।

"मैं भर पिचकारी मारूं वाके मुकुट की आव बिगारू" – मैं भरकर पिचकारी मारूँ और उनके मुकुट की आभा बिगाड़ दूँ। अब देर न लगाऊँ।

"मैं भर पिचकारी मारूं माला की आव बिगारू, अरे वाके मुख में मलू गुलाल" – मैं पिचकारी मारकर उनकी माला की आभा बिगाड़ दूँ और उनके मुख में गुलाल मलूँ।

"मैं मंदिर मंदिर जाऊं कान्हा के दर्शन पाऊं, अरे मैं खूब करूं मनुहार" – मैं हर मंदिर में जाऊँ, कान्हा के दर्शन करूँ और खूब मनुहार (विनय/प्रार्थना) करूँ।

यह भजन वृन्दावन के पवित्र स्थानों – यमुना तट, बंसीवट, कुंज गलियों, मंदिरों – का वर्णन करते हुए भक्त की वहाँ जाने और श्याम के साथ होली खेलने की तीव्र लालसा को दर्शाता है।

📍 वृन्दावन के पवित्र स्थान

  • यमुना तट: वृन्दावन में यमुना नदी का तट, जहाँ स्नान और पूजा का विशेष महत्व है। कृष्ण की अनेक लीलाएँ यहाँ हुईं।
  • बंसीवट: वह स्थान जहाँ कृष्ण बांसुरी बजाते थे। ऐसा माना जाता है कि यहाँ की मुरली की तान सुनकर गोपियाँ मोहित हो जाती थीं।
  • कुंज गलियाँ: वृन्दावन की वे संकरी गलियाँ जो बेलों से घिरी हैं। यहाँ राधा-कृष्ण की रासलीला हुई थी।
  • मंदिर: वृन्दावन में अनेक मंदिर हैं – बांके बिहारी मंदिर, राधा-वल्लभ मंदिर, इस्कॉन मंदिर आदि।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🏞️ वृन्दावन की पवित्रता

यह भजन वृन्दावन के पवित्र स्थलों को याद करता है। भक्त केवल होली खेलने ही नहीं, बल्कि यमुना स्नान, बंसीवट की मुरली सुनने, और मंदिरों के दर्शन के लिए भी वृन्दावन जाना चाहता है।

💞 श्याम के साथ होली

भक्त की सबसे बड़ी इच्छा है श्याम के साथ होली खेलना। वह उनके मुकुट की आभा बिगाड़ना चाहता है, उनके मुख में गुलाल मलना चाहता है – यह उस अंतरंग प्रेम को दर्शाता है जो भक्त को कृष्ण से है।

🎯 संदेश : वृन्दावन वह पवित्र स्थान है जहाँ श्याम होली खेल रहे हैं। भक्त की यही अभिलाषा है कि वह वहाँ जाए, यमुना में स्नान करे, बंसीवट पर मुरली सुने, कुंज गलियों में गुलाल उड़ाए, और श्याम के साथ होली खेले। यह भजन हमें उस दिव्य वृन्दावन और वहाँ की होली का साक्षात्कार कराता है।

॥ अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली ॥
॥ मेरे श्याम खेल रहे होली, घनश्याम खेल रहे होली ॥