🙏 रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार – कृष्ण भजन
(Rang Rangila Chhail Chabila Sawariya Sarkar) – Krishna Bhajan
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार,
विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार,
॥ अंतरा १ ॥
एक झलक दर्शन की देदो और न कुछ मैं चाहु,
उम्र बितादू इन चरणों में तेरा गन बस गाउ,
बांसुरियां की तान सुना दे मैं उस में खो जाऊ,
सोना चांदी धन दौलत की मुझको नहीं दरकार,
विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार,
॥ अंतरा २ ॥
जीवन देने वाले आज क्यू न प्रीत निभाए,
तुझको पाने भक्तो की याद कभी ना आये,
रह ना सकती तेरे बिना बा कैसे तुम्हे समजाए,
रंग सभी फीके है तुझ बिन फीके है ये मनोहर,
विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार,
॥ अंतरा ३ ॥
ऐसा लागे जन्म जनम का रिश्ता तेरा मेरा,
श्याम तुझपे ही ख़त्म करू और तुझपे ही हो सवेरा,
चार दिनों की ये ज़िंदगानी चार दिनों का बसेरा,
तू जो नहीं तो लेहरी अपना जीना है बेकार,
विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार,
🎵 श्याम भक्ति भजन | विनती भजन
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह मार्मिक विनती भजन भक्त द्वारा अपने आराध्य श्याम (कृष्ण) से बार-बार आने की प्रार्थना है। "रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार" – हे रंगों से सजे, सुन्दर, छैल-छबीले सवारियाँ सरकार (कृष्ण)! "विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार" – मैं बार-बार विनती करता हूँ, आप एक बार आ जाइए।
"एक झलक दर्शन की देदो और न कुछ मैं चाहु" – बस एक झलक दर्शन की दे दो, और कुछ नहीं चाहिए। मैं सारी उम्र आपके चरणों में बिता दूँगा, बस आपके गुण गाता रहूँगा।
"बांसुरियां की तान सुना दे मैं उस में खो जाऊ" – अपनी बाँसुरी की तान सुना दो, मैं उसमें खो जाऊँ। सोना-चाँदी, धन-दौलत की मुझे कोई जरूरत नहीं।
"जीवन देने वाले आज क्यू न प्रीत निभाए" – हे जीवन देने वाले, आज प्रीत क्यों नहीं निभाते? तुझको पाने वाले भक्तों की याद कभी नहीं आती? तेरे बिना रहा नहीं जाता, यह कैसे समझाऊँ?
"रंग सभी फीके है तुझ बिन फीके है ये मनोहर" – तेरे बिना सारे रंग फीके हैं, यह मनोहर संसार भी फीका है।
"ऐसा लागे जन्म जनम का रिश्ता तेरा मेरा" – ऐसा लगता है जैसे जन्म-जन्म का रिश्ता है हमारा। श्याम, तुझी पर खत्म करूँ और तुझी पर सवेरा हो।
"चार दिनों की ये ज़िंदगानी चार दिनों का बसेरा, तू जो नहीं तो लेहरी अपना जीना है बेकार" – यह जिंदगी तो चार दिनों की है, चार दिनों का बसेरा। तू ही नहीं तो यह जीना बेकार है।
यह भजन भक्त के हृदय की गहरी पीड़ा, विरह और श्याम से मिलन की तीव्र लालसा को व्यक्त करता है। भक्त सांसारिक वस्तुओं को त्याग कर केवल एक झलक दर्शन की चाह रखता है।
💕 भक्त का विरह और समर्पण
इस भजन में भक्त ने अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण भाव दिखाया है। वह कहता है:
- ✔ दर्शन की एक झलक ही काफी है – और कुछ नहीं चाहिए
- ✔ सोना-चांदी, धन-दौलत की कोई आवश्यकता नहीं
- ✔ बाँसुरी की तान में खो जाना चाहता है
- ✔ तेरे बिना सब रंग फीके हैं
- ✔ जन्म-जन्म का रिश्ता लगता है
- ✔ तू नहीं तो जीना बेकार है
यह भजन मीरा, सूरदास और अन्य भक्त कवियों की विरह-भक्ति परंपरा से जुड़ा है, जहाँ भगवान से मिलन की तड़प ही भक्ति का सबसे ऊँचा स्वरूप मानी गई है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🎨 रंग रंगीला स्वरूप
भक्त ने कृष्ण को "रंग रंगीला, छैल छबीला" कहकर उनके सुन्दर और मनमोहक स्वरूप का स्मरण किया है। यह रूप भक्त के हृदय में बसा है।
🕊️ बारम्बार विनती
"बारम्बार विनती" का भाव दर्शाता है कि भक्त ने हार नहीं मानी है। वह बार-बार प्रार्थना करता है, बार-बार पुकारता है। यह दृढ़ विश्वास का प्रतीक है कि एक दिन अवश्य सुनाई देगा।
🎯 संदेश : यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में सांसारिक वस्तुओं की कोई कामना नहीं होती। भक्त तो बस एक झलक दर्शन का भूखा होता है। वह जन्म-जन्म का रिश्ता मानकर बार-बार पुकारता है – "आ जाओ एक बार"।