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रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार (Rang Rangila Chhail Chabila Sawariya Sarkar)

रंग रंगीला छैल छबीला सांवरिया सरकार कृष्ण भजन के बोल, अर्थ और भावपूर्ण संकीर्तन पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।
🙏 रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार – कृष्ण भजन

(Rang Rangila Chhail Chabila Sawariya Sarkar) – Krishna Bhajan

विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: आधुनिक भजन
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन, विनती भजन
🎯 भाव: श्याम से मिलन की प्रार्थना

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार,
विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार,

॥ अंतरा १ ॥

एक झलक दर्शन की देदो और न कुछ मैं चाहु,
उम्र बितादू इन चरणों में तेरा गन बस गाउ,
बांसुरियां की तान सुना दे मैं उस में खो जाऊ,
सोना चांदी धन दौलत की मुझको नहीं दरकार,
विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार,

॥ अंतरा २ ॥

जीवन देने वाले आज क्यू न प्रीत निभाए,
तुझको पाने भक्तो की याद कभी ना आये,
रह ना सकती तेरे बिना बा कैसे तुम्हे समजाए,
रंग सभी फीके है तुझ बिन फीके है ये मनोहर,
विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार,

॥ अंतरा ३ ॥

ऐसा लागे जन्म जनम का रिश्ता तेरा मेरा,
श्याम तुझपे ही ख़त्म करू और तुझपे ही हो सवेरा,
चार दिनों की ये ज़िंदगानी चार दिनों का बसेरा,
तू जो नहीं तो लेहरी अपना जीना है बेकार,
विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार,

🎵 श्याम भक्ति भजन | विनती भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह मार्मिक विनती भजन भक्त द्वारा अपने आराध्य श्याम (कृष्ण) से बार-बार आने की प्रार्थना है। "रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार" – हे रंगों से सजे, सुन्दर, छैल-छबीले सवारियाँ सरकार (कृष्ण)! "विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार" – मैं बार-बार विनती करता हूँ, आप एक बार आ जाइए।

"एक झलक दर्शन की देदो और न कुछ मैं चाहु" – बस एक झलक दर्शन की दे दो, और कुछ नहीं चाहिए। मैं सारी उम्र आपके चरणों में बिता दूँगा, बस आपके गुण गाता रहूँगा।

"बांसुरियां की तान सुना दे मैं उस में खो जाऊ" – अपनी बाँसुरी की तान सुना दो, मैं उसमें खो जाऊँ। सोना-चाँदी, धन-दौलत की मुझे कोई जरूरत नहीं।

"जीवन देने वाले आज क्यू न प्रीत निभाए" – हे जीवन देने वाले, आज प्रीत क्यों नहीं निभाते? तुझको पाने वाले भक्तों की याद कभी नहीं आती? तेरे बिना रहा नहीं जाता, यह कैसे समझाऊँ?

"रंग सभी फीके है तुझ बिन फीके है ये मनोहर" – तेरे बिना सारे रंग फीके हैं, यह मनोहर संसार भी फीका है।

"ऐसा लागे जन्म जनम का रिश्ता तेरा मेरा" – ऐसा लगता है जैसे जन्म-जन्म का रिश्ता है हमारा। श्याम, तुझी पर खत्म करूँ और तुझी पर सवेरा हो।

"चार दिनों की ये ज़िंदगानी चार दिनों का बसेरा, तू जो नहीं तो लेहरी अपना जीना है बेकार" – यह जिंदगी तो चार दिनों की है, चार दिनों का बसेरा। तू ही नहीं तो यह जीना बेकार है।

यह भजन भक्त के हृदय की गहरी पीड़ा, विरह और श्याम से मिलन की तीव्र लालसा को व्यक्त करता है। भक्त सांसारिक वस्तुओं को त्याग कर केवल एक झलक दर्शन की चाह रखता है।

💕 भक्त का विरह और समर्पण

इस भजन में भक्त ने अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण भाव दिखाया है। वह कहता है:

  • ✔ दर्शन की एक झलक ही काफी है – और कुछ नहीं चाहिए
  • ✔ सोना-चांदी, धन-दौलत की कोई आवश्यकता नहीं
  • ✔ बाँसुरी की तान में खो जाना चाहता है
  • ✔ तेरे बिना सब रंग फीके हैं
  • ✔ जन्म-जन्म का रिश्ता लगता है
  • ✔ तू नहीं तो जीना बेकार है

यह भजन मीरा, सूरदास और अन्य भक्त कवियों की विरह-भक्ति परंपरा से जुड़ा है, जहाँ भगवान से मिलन की तड़प ही भक्ति का सबसे ऊँचा स्वरूप मानी गई है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎨 रंग रंगीला स्वरूप

भक्त ने कृष्ण को "रंग रंगीला, छैल छबीला" कहकर उनके सुन्दर और मनमोहक स्वरूप का स्मरण किया है। यह रूप भक्त के हृदय में बसा है।

🕊️ बारम्बार विनती

"बारम्बार विनती" का भाव दर्शाता है कि भक्त ने हार नहीं मानी है। वह बार-बार प्रार्थना करता है, बार-बार पुकारता है। यह दृढ़ विश्वास का प्रतीक है कि एक दिन अवश्य सुनाई देगा।

🎯 संदेश : यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में सांसारिक वस्तुओं की कोई कामना नहीं होती। भक्त तो बस एक झलक दर्शन का भूखा होता है। वह जन्म-जन्म का रिश्ता मानकर बार-बार पुकारता है – "आ जाओ एक बार"।

॥ रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार ॥
॥ विनती बारम्बार करू मैं आ जाओ एक बार ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "रंग रंगीला छैल छबीला सवारियां सरकार – कृष्ण भजन | Rang Rangila Chhail Chabila Sawariya Sarkar" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

श्रेणियां: Holi Geet

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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