🙏 होरी खेले राधा संग ये नटखट नंद किशोर – होली भजन

(Hori Khele Radha Sang Natkhat Nand Kishor) – Krishna Holi Bhajan

बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: होली भजन, कृष्ण भजन
📍 स्थान: ब्रज, गोकुल

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर,
होरी खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

॥ अंतरा १ ॥

ओढ़ के आई कान्हा, नयी रे चुनरिया,
भर पिचकारी मेरे, मारो ना सांवरिया,
भर पिचकारी मारी, और कर दीनी सराबोर,
होली खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

॥ अंतरा २ ॥

उड़त गुलाल श्याम, लाल भए बदरा,
राधा की आंखन को, बिगड़ो है कजरा,
ननंद दे तानो, घर सास करे सोर,
होली खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

॥ अंतरा ३ ॥

गैल हमारी, रोके ना मुरारी,
भर पिचकारी मेरी, चुनरी पे मारी,
दधि बेचन को आई, मोए घेर लई है भोर,
होली खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

॥ अंतरा ४ ॥

ग्वाल बाल सब कोई, खेलत होरी,
सखियों के मुख पर, मल दई रोरी,
देख के ब्रज की होली, घन सो मन उठी हिलोर,
होली खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर,
होरी खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

🎵 ब्रज की होली भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन एक गोपी की शिकायत के रूप में गाया गया है, जो माँ यशोदा से कहती है कि उनका नंद किशोर (कृष्ण) बहुत नटखट है। "बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर, होरी खेले राधा संग" – वह राधा के साथ होली खेल रहा है और बड़ी शरारतें कर रहा है।

"ओढ़ के आई कान्हा, नयी रे चुनरिया" – गोपी कहती है कि मैंने नई चुनरी ओढ़कर आई थी, लेकिन कान्हा ने भरकर पिचकारी मारी और मुझे सराबोर कर दिया। वह मारो ना सांवरिया कहकर मना भी कर रही है।

"उड़त गुलाल श्याम, लाल भए बदरा" – गुलाल उड़ रहा है, श्याम (कृष्ण) लाल हो गए हैं, बादल भी लाल हो गए हैं। राधा की आँखों का काजल बिगड़ गया है। ननद (ननद) ताना दे रही है, सास घर में शोर मचा रही है।

"गैल हमारी, रोके ना मुरारी" – मुरारी (कृष्ण) ने मेरी गली रोक ली है, मेरी चुनरी पर पिचकारी मार दी है। मैं तो दही बेचने आई थी, लेकिन सुबह से ही इन्होंने मुझे घेर लिया है।

"ग्वाल बाल सब कोई, खेलत होरी" – सब ग्वाल-बाल होली खेल रहे हैं। सखियों के मुख पर रोरी (अबीर-गुलाल) मल दी है। ब्रज की होली देखकर मन में हिलोर उठी है।

यह भजन ब्रज की होली के उत्सव, कृष्ण की शरारतों, गोपियों की शिकायतों, और पूरे वातावरण में छाए रंग और उल्लास का अद्भुत चित्रण है। गोपी माँ यशोदा से शिकायत तो कर रही है, लेकिन साथ ही उसकी आँखों में कृष्ण के प्रति प्रेम और अपनापन भी झलक रहा है।

💕 होली की शिकायतें – ब्रज की परंपरा

ब्रज की होली में गोपियों द्वारा कृष्ण की शिकायतें माँ यशोदा से करना एक पारंपरिक शैली है। ये शिकायतें असल में प्रेम और चुहलबाजी का रूप हैं। गोपियाँ कहती हैं कि उनके बेटे ने उनके कपड़े रंग दिए, उनका काजल बिगाड़ दिया, उन्हें सराबोर कर दिया – लेकिन इन शिकायतों में कृष्ण के प्रति अगाध प्रेम छिपा होता है।

इस भजन में वर्णित "ननंद दे तानो, घर सास करे सोर" यह दर्शाता है कि होली के रंगों में सराबोर होकर घर लौटने पर सास-ननद की भी प्रतिक्रिया होती है – कभी ताना, कभी शोर, लेकिन यह सब होली के उत्सव का हिस्सा है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎭 नटखट नंद किशोर

यह भजन कृष्ण के नटखट स्वरूप को उजागर करता है। वे राधा के साथ होली खेलते हैं, गोपियों को सराबोर करते हैं, उनके काजल बिगाड़ते हैं – सब प्रेम और चुहल के बीच।

🏡 गोपी का अपनापन

गोपी माँ यशोदा से शिकायत कर रही है – यह अपनापन और आत्मीयता दर्शाता है। कृष्ण केवल भगवान नहीं, बल्कि अपने गाँव के वो नटखट बालक हैं जिनकी शरारतों से सब परेशान भी हैं और प्रेम भी करते हैं।

🎯 संदेश : नटखट नंद किशोर की होली में राधा संग रंग उड़ता है, गुलाल उड़ता है, और सब सराबोर हो जाते हैं। भले ही गोपियाँ शिकायत करें, लेकिन उनके मन में भी हिलोर उठती है। यह भजन हमें सिखाता है कि कृष्ण की लीलाओं में शिकायतें भी प्रेम का ही एक रूप हैं।

॥ बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर ॥
॥ होरी खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर ॥