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होरी खेले राधा संग ये नटखट नंद किशोर – होली भजन | Hori Khele Radha Sang Natkhat Nand Kishor

188 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 होरी खेले राधा संग ये नटखट नंद किशोर – होली भजन

(Hori Khele Radha Sang Natkhat Nand Kishor) – Krishna Holi Bhajan

बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: होली भजन, कृष्ण भजन
📍 स्थान: ब्रज, गोकुल

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर,
होरी खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

॥ अंतरा १ ॥

ओढ़ के आई कान्हा, नयी रे चुनरिया,
भर पिचकारी मेरे, मारो ना सांवरिया,
भर पिचकारी मारी, और कर दीनी सराबोर,
होली खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

॥ अंतरा २ ॥

उड़त गुलाल श्याम, लाल भए बदरा,
राधा की आंखन को, बिगड़ो है कजरा,
ननंद दे तानो, घर सास करे सोर,
होली खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

॥ अंतरा ३ ॥

गैल हमारी, रोके ना मुरारी,
भर पिचकारी मेरी, चुनरी पे मारी,
दधि बेचन को आई, मोए घेर लई है भोर,
होली खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

॥ अंतरा ४ ॥

ग्वाल बाल सब कोई, खेलत होरी,
सखियों के मुख पर, मल दई रोरी,
देख के ब्रज की होली, घन सो मन उठी हिलोर,
होली खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर,
होरी खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर।

🎵 ब्रज की होली भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन एक गोपी की शिकायत के रूप में गाया गया है, जो माँ यशोदा से कहती है कि उनका नंद किशोर (कृष्ण) बहुत नटखट है। "बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर, होरी खेले राधा संग" – वह राधा के साथ होली खेल रहा है और बड़ी शरारतें कर रहा है।

"ओढ़ के आई कान्हा, नयी रे चुनरिया" – गोपी कहती है कि मैंने नई चुनरी ओढ़कर आई थी, लेकिन कान्हा ने भरकर पिचकारी मारी और मुझे सराबोर कर दिया। वह मारो ना सांवरिया कहकर मना भी कर रही है।

"उड़त गुलाल श्याम, लाल भए बदरा" – गुलाल उड़ रहा है, श्याम (कृष्ण) लाल हो गए हैं, बादल भी लाल हो गए हैं। राधा की आँखों का काजल बिगड़ गया है। ननद (ननद) ताना दे रही है, सास घर में शोर मचा रही है।

"गैल हमारी, रोके ना मुरारी" – मुरारी (कृष्ण) ने मेरी गली रोक ली है, मेरी चुनरी पर पिचकारी मार दी है। मैं तो दही बेचने आई थी, लेकिन सुबह से ही इन्होंने मुझे घेर लिया है।

"ग्वाल बाल सब कोई, खेलत होरी" – सब ग्वाल-बाल होली खेल रहे हैं। सखियों के मुख पर रोरी (अबीर-गुलाल) मल दी है। ब्रज की होली देखकर मन में हिलोर उठी है।

यह भजन ब्रज की होली के उत्सव, कृष्ण की शरारतों, गोपियों की शिकायतों, और पूरे वातावरण में छाए रंग और उल्लास का अद्भुत चित्रण है। गोपी माँ यशोदा से शिकायत तो कर रही है, लेकिन साथ ही उसकी आँखों में कृष्ण के प्रति प्रेम और अपनापन भी झलक रहा है।

💕 होली की शिकायतें – ब्रज की परंपरा

ब्रज की होली में गोपियों द्वारा कृष्ण की शिकायतें माँ यशोदा से करना एक पारंपरिक शैली है। ये शिकायतें असल में प्रेम और चुहलबाजी का रूप हैं। गोपियाँ कहती हैं कि उनके बेटे ने उनके कपड़े रंग दिए, उनका काजल बिगाड़ दिया, उन्हें सराबोर कर दिया – लेकिन इन शिकायतों में कृष्ण के प्रति अगाध प्रेम छिपा होता है।

इस भजन में वर्णित "ननंद दे तानो, घर सास करे सोर" यह दर्शाता है कि होली के रंगों में सराबोर होकर घर लौटने पर सास-ननद की भी प्रतिक्रिया होती है – कभी ताना, कभी शोर, लेकिन यह सब होली के उत्सव का हिस्सा है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎭 नटखट नंद किशोर

यह भजन कृष्ण के नटखट स्वरूप को उजागर करता है। वे राधा के साथ होली खेलते हैं, गोपियों को सराबोर करते हैं, उनके काजल बिगाड़ते हैं – सब प्रेम और चुहल के बीच।

🏡 गोपी का अपनापन

गोपी माँ यशोदा से शिकायत कर रही है – यह अपनापन और आत्मीयता दर्शाता है। कृष्ण केवल भगवान नहीं, बल्कि अपने गाँव के वो नटखट बालक हैं जिनकी शरारतों से सब परेशान भी हैं और प्रेम भी करते हैं।

🎯 संदेश : नटखट नंद किशोर की होली में राधा संग रंग उड़ता है, गुलाल उड़ता है, और सब सराबोर हो जाते हैं। भले ही गोपियाँ शिकायत करें, लेकिन उनके मन में भी हिलोर उठती है। यह भजन हमें सिखाता है कि कृष्ण की लीलाओं में शिकायतें भी प्रेम का ही एक रूप हैं।

॥ बड़ा नटखट है, माँ तेरा नंद किशोर ॥
॥ होरी खेले राधा संग, ये नटखट नंद किशोर ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "होरी खेले राधा संग ये नटखट नंद किशोर – होली भजन | Hori Khele Radha Sang Natkhat Nand Kishor" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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