🎵 तुझे शंकर कहूँ या शंभु या कहूँ मैं डमरू वाला
(Tujhe Shankar Kahun Ya Shambhu Ya Kahun Main Damru Wala) – Shiv Bhajan 2026
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
तुझे शंकर कहूँ या शंभु या कहूँ मैं डमरू वाला..
तेरे रमी विभूति तन पे, काँधे पे विशधर काला...
॥ अंतरा १ ॥
गंगाधर नाम तुम्हारा, केशों से गंगा बहती,
यो तरण तारिणी गंगे, सारे जग के दुखडे धोती
खुशियों से दामन भरती, जीवन में करे उजाला,
तेरे रमी विभूति तन पे...
॥ अंतरा २ ॥
तूने मंथन किया समंदर, फिर हुई थी खींचा तानी,
ना देखा सुना ना जग में, तुझसा कोई ओघड़ दानी
तूने सबको अमृत बाँटा, खुद काल घूँट पी डाला
तेरे रमी विभूति तन पे...
॥ अंतरा ३ ॥
दी गंगा भगीरथ को, कटे सगर राज के जाले
लंका दे दी रावण को, हे भांग धतूरे वाले
तेरे देख ढंग निराले, तेरे देखे खेल निराले
तेरे रमी विभूति तन पे...
॥ अंतरा ४ ॥
तेरे सीश साज रहे चंदा, संग गौरा जैसी नारी,
तू रहता मस्त भाँग में, करे नंदी की सवारी,
देवों में सबसे पहले पूजता, तेरा गणपति लाला,
तेरे रमी विभूति तन पे...
॥ हर हर महादेव ॥ शिव शंभो ॥
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन भगवान शिव के विभिन्न नामों, स्वरूपों और उनकी दिव्य लीलाओं का सुंदर वर्णन करता है। "तुझे शंकर कहूँ या शंभु या कहूँ मैं डमरू वाला" – भक्त भोले शंकर को किस नाम से पुकारे? शंकर, शंभु, या डमरू वाला? उनके तन पर विभूति (भस्म) रमी है और कंधे पर काला सर्प विराजमान है।
शिव को गंगाधर कहा जाता है क्योंकि उनकी जटाओं से गंगा बहती है। यह गंगा सारे जग के दुखड़े धोती है, खुशियों से दामन भरती है और जीवन में उजाला करती है।
समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला, तो शिव ने वह विष अपने कंठ में धारण कर लिया। उन्होंने सबको अमृत बाँटा और खुद काल कूट (विष) पी लिया। इससे बड़ा दानी और कौन हो सकता है? उन्हें "ओघड़ दानी" कहा गया है – अर्थात अद्भुत दानी।
शिव ने गंगा को भगीरथ को दिया, सगर राज के अभिशाप से मुक्ति दिलाई, और रावण को लंका का राज्य दिया। उनके ढंग और खेल निराले हैं। वे भांग-धतूरे वाले हैं, मस्त रहने वाले हैं।
शिव के सिर पर चंद्रमा सुशोभित है, उनके संग गौरा (पार्वती) हैं। वे नंदी की सवारी करते हैं और उनके लाल गणपति (गणेश) हैं, जिनकी पूजा देवों में सबसे पहले होती है।
यह भजन हमें सिखाता है कि शिव अद्भुत दानी हैं, उनकी महिमा अपार है। वे भक्तों के सारे दुख दूर करते हैं और जीवन में उजाला भर देते हैं। हर हर महादेव!
🕉️ शिव के विभिन्न स्वरूप और नाम
शंकर, शंभु, डमरू वाला: शिव के ये सभी नाम उनके विभिन्न स्वरूपों को दर्शाते हैं। शंकर कल्याण करने वाले, शंभु आनंद स्वरूप, और डमरू वाला उनके हाथ में डमरू धारण करने वाले रूप को दर्शाता है।
गंगाधर: शिव की जटाओं में गंगा का निवास। यह इस बात का प्रतीक है कि शिव सभी पापों का नाश करने वाली गंगा को धारण करते हैं।
विशधर (विषधर): कंठ में विष धारण करने वाले। समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को उन्होंने अपने कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की।
ओघड़ दानी: अद्भुत दानी। उन्होंने सबको अमृत बाँटा और स्वयं विष पी लिया – यह उनकी दानशीलता का सर्वोच्च उदाहरण है।
भांग धतूरे वाले: शिव को भांग और धतूरा प्रिय है। यह उनके सरल और मस्तमौला स्वभाव को दर्शाता है।
गौरा संग, नंदी सवारी, गणपति लाला: शिव के परिवार का वर्णन – पार्वती, नंदी और गणेश।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🙏 शिव के अनेक नाम
"तुझे शंकर कहूँ या शंभु या कहूँ मैं डमरू वाला" – भक्त की इस उलझन में शिव की महिमा का बखान है। उनके इतने नाम और रूप हैं कि किस नाम से पुकारें?
💧 गंगा का महत्व
गंगा शिव की जटाओं से बहती है और सारे जग के दुखड़े धोती है। यह शिव की कृपा और गंगा की पावनता का संबंध दर्शाता है।
🧪 समुद्र मंथन की लीला
शिव का विष पीना उनकी सृष्टि रक्षा की भावना को दर्शाता है। उन्होंने सबको अमृत बाँटा और स्वयं कष्ट सहा – यह त्याग की पराकाष्ठा है।
👪 शिव का परिवार
गौरा, गणपति, नंदी – शिव का परिवार आदर्श परिवार का प्रतीक है। सभी की अपनी-अपनी महिमा है।
🎯 संदेश : शिव अद्भुत दानी, त्यागी और कृपालु हैं। वे भक्तों के सारे दुख दूर करते हैं। उनके नाम अनेक हैं, रूप अनेक हैं, लेकिन उनकी कृपा एक सी है – निरंतर और असीम। हर हर महादेव!