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Sunta Hai Tu Sada Haro Ki Sanware Lyrics (Khatu Shyam Bhajan) – सुनता है तू सदा, हारो की सांवरे

243 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🎵 सुनता है तू सदा, हारो की सांवरे

(Sunta Hai Tu Sada, Haro Ki Sanware) – Khatu Shyam Bhajan 2026

ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥ जय श्री श्याम ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: सन्नी श्याम दीवाना (Sunny Shyam Deewana)
✍️ लेखक: कमल जी (Kamal Ji)
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

दर पे आया हूं मैं.. हो
दर पे आया हूं मैं,
दुनिया से हार के,
सुनता है, तू सदा,
हारों की सांवरे

॥ अंतरा १ ॥

खाटू की, अदालत में,
बैठा है मेरा सांवरिया,
उसके हाथों, छोड़ दिया,
जीवन का हर फैसला,
श्याम धनी के होते कोई ग़म,
मुझको तो नहीं,
पूरा विश्वास है... हो ओ ओ
पूरा विश्वास है, मुझको तो श्याम पे,
सुनता है, तू सदा, हारों की सांवरे

॥ अंतरा २ ॥

चाहे मुझको, गले लगा ले,
चाहे ठोकर मार दे,
खाली न, लौटूंगा, बाबा मैं तेरे द्वार से,
इसके द्वार से खाली कोई भगत,
लौटा ही नहीं,
मिलते है, सारे सुख हो .. हो ओ ओ
मिलती है, सारे सुख, श्याम दातार से
सुनता है, तू सदा, हारों की सांवरे

॥ अंतरा ३ ॥

तेरे इश्क में, सांवरे,
सब कुछ लुटाके बैठा हूं
आके इक बार, अपना कह दे,
आखिर तेरा बेटा हूं,
जैसे सन्नी की, हर बात बनाई,
मेरे श्याम धनी
कमल की, नाव भी, ..हो ओ ओ
कमल की, नाव भी, हो पार मझधार से
सुनता है, तू सदा, हारों की सांवरे

॥ गायक : सन्नी श्याम दीवाना ॥ लेखक : कमल जी ॥ जय श्री श्याम ॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन खाटू श्याम बाबा के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण को दर्शाता है। "सुनता है तू सदा, हारो की सांवरे" – भक्त कहता है कि श्याम बाबा हमेशा हारे हुए लोगों की सुनते हैं। वे उनके सहारा हैं जो दुनिया से हारकर उनके दरबार में आते हैं।

भक्त ने दुनिया से हारकर श्याम बाबा के दरबार में आने का भाव व्यक्त किया है। वह कहता है कि खाटू की अदालत में मेरा सांवरिया बैठा है और उसने जीवन का हर फैसला उनके हाथों छोड़ दिया है। श्याम धनी के होते उसे कोई गम नहीं। उसे श्याम पर पूरा विश्वास है।

भक्त की गहरी आस्था है – चाहे बाबा उसे गले लगाएं या ठोकर मारें, वह खाली नहीं लौटेगा। क्योंकि खाटू श्याम के द्वार से कोई भक्त कभी खाली नहीं लौटा। श्याम दातार से सारे सुख मिलते हैं।

भक्त ने श्याम के इश्क में सब कुछ लुटा दिया है। वह प्रार्थना करता है कि बाबा एक बार आकर उसे "अपना" कह दें, क्योंकि वह उनका बेटा है। गायक सन्नी श्याम दीवाना की हर बात श्याम धनी ने बनाई है। लेखक कमल जी की नाव (जीवन रूपी) को भी श्याम ने मझधार से पार कर दिया है।

यह भजन हमें सिखाता है कि श्याम बाबा हारे का सहारा हैं। उनके दरबार में आने वाला कभी खाली नहीं जाता। उनपर पूरा विश्वास रखो, वे सब सुख देंगे और जीवन की हर मझधार से पार लगाएंगे।

📍 खाटू श्याम बाबा – हारे का सहारा

खाटू श्याम जी: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी का मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। यहाँ बाबा श्याम (बर्बरीक) विराजमान हैं, जिन्हें "हारे का सहारा" कहा जाता है।

अदालत का प्रतीक: भजन में "खाटू की अदालत" कहकर इस बात को दर्शाया गया है कि बाबा का दरबार एक न्यायालय की तरह है, जहाँ हर भक्त की सुनवाई होती है और उसे न्याय मिलता है।

कमल की नाव का प्रतीक: "कमल की नाव भी हो पार मझधार से" – कमल के पत्ते पर नाव की कल्पना असंभव सी लगती है, लेकिन श्याम बाबा असंभव को भी संभव कर देते हैं। वे अपने भक्तों की नाव को सबसे कठिन परिस्थितियों से भी पार लगा देते हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🙏 हारों के सहारे

"सुनता है तू सदा हारों की सांवरे" – यह पंक्ति खाटू श्याम बाबा की सबसे बड़ी विशेषता को दर्शाती है। वे उनकी सुनते हैं जो दुनिया से हार चुके हैं, जिनके पास कोई नहीं बचा।

⚖️ खाटू की अदालत

खाटू श्याम के दरबार को "अदालत" कहना यह दर्शाता है कि यहाँ न्याय होता है। भक्तों की हर फरियाद सुनी जाती है और उचित फैसला सुनाया जाता है।

🚣 कमल की नाव

यह अद्भुत प्रतीक है। कमल का पत्ता नाजुक होता है, उस पर नाव की कल्पना असंभव है। लेकिन श्याम बाबा अपने भक्तों के लिए असंभव को भी संभव कर देते हैं।

👪 पिता-पुत्र का रिश्ता

"आखिर तेरा बेटा हूं" – भक्त श्याम बाबा से पिता-पुत्र का रिश्ता स्थापित करता है। यह गहरे आत्मीय संबंध और अधिकार को दर्शाता है जो भक्त को अपने ईष्ट से होता है।

🎯 संदेश : श्याम बाबा हारे का सहारा हैं। दुनिया से हारकर भी यदि कोई सच्चे मन से उनके दरबार में आता है, तो वह कभी खाली नहीं जाता। वे जीवन का हर फैसला अपने हाथों ले लेते हैं और अपने भक्त की नाव को हर मझधार से पार लगा देते हैं। उनपर पूरा विश्वास रखो, वे सब सुख देंगे। जय श्री श्याम!

ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥ इति खाटूश्यामभजनम् ॥
॥ जय श्री श्याम जय श्री श्याम जय जय श्री श्याम ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Sunta Hai Tu Sada Haro Ki Sanware Lyrics (Khatu Shyam Bhajan) – सुनता है तू सदा, हारो की सांवरे" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 04 Sep 2026

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