Parvati Stotram शनिवार विशेष (भगवान शनिदेव व श्री महाकाल)

राधे बोलो तो सही – Radhe Bolo to Sahi Lyrics (Nirgun Bhajan)

राधे बोलो तो सही – Radhe Bolo to Sahi Nirgun Bhajan lyrics in Hindi. पढ़ें इस सुंदर भजन के बोल, अर्थ और भावार्थ संदर्भ सहित केवल Bhaktilok पर।

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

(Radhe Bolo to Sahi) – Nirgun Bhajan 2025
🎤 गायक: Unknown ✍️ गीत: Traditional
राधे बोलो तो सही
राधे बोलो तो सही
श्याम बोलो तो सही
बोलो फागुन में होली खेलोगे नहीं
होली नहीं खेलोगे तो बिंदिया बन जाऊँगा
बिंदिया बन जाऊँगा माथे पर लग जाऊँगा
बोलो तो सही राधे बोलो तो सही
बोलो फागुन में होली खेलोगे नहीं
होली नहीं खेलोगे तो गुलाल बन जाऊँगा
गुलाल बन जाऊँगा गालों में लग जाऊँगा
बोलो और फागुन में होली खेलोगे नहीं
होली नहीं खेलेगी तो चुनरी बन जाऊँगा
चुनरी बन जाऊँगा अंगों से लिपट जाऊँगा
बोलो तो सही राधे बोलो तो सही
बोलो और फागुन में होली खेलोगे नहीं
होली नहीं खेलोगे तो पायल बन जाऊँगा
पायल बन जाऊँगा पैरों में लग जाऊँगा

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह निर्गुण भजन राधा और श्याम (कृष्ण) के प्रेम और होली के पावन पर्व की खुशियों को व्यक्त करता है। भजन में होली के रंगों और उल्लास का वर्णन है और राधा और कृष्ण के प्रेम की गहराई को दर्शाया गया है।

भजन में होली के पर्व की धूमधाम और उमंग का वर्णन है और राधा और कृष्ण के प्रेम की अभिव्यक्ति है। भजन में होली के पर्व की खुशियाँ और उमंग का वर्णन है और राधा और कृष्ण के प्रेम की अभिव्यक्ति है।

🎵 गायक: Unknown

यह भजन परंपरा से चला आ रहा है और इसका गायक अज्ञात है। इस भजन को भजंगंगा द्वारा प्रकाशित किया गया है।

🚩 निर्गुण भजन • होली भजन 📅 प्रकाशित: अक्टूबर 2025
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "राधे बोलो तो सही – Radhe Bolo to Sahi Lyrics (Nirgun Bhajan)" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 23 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!