Hanuman Bhajan

हनुमान अमृतवाणी आरती (Hanuman Amritwani Aarti) - Hanuman Bhajan - Bhaktilok

55 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

हनुमान जी की अमृतवाणी आरती: शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम

हनुमान अमृतवाणी आरती से भक्ति में वृद्धि और संकटों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए हर भक्त को प्रेरित करें।

हनुमान अमृतवाणी आरती आसा करें जो सुन बेवाहजी बिन स्व्रपज जीवते है जीतो हाई शरण गते मेरी जिन कौं विधि वादा तो राम व्याकुल बाइन ज हनुमान गागींक्स पिया नो देई न रचिदा बात दर महादेव तयो परे ह॥ दयो तव भिती तिनरे श्री हनुमान दुष्ट जनख के मै विज्ञान निकास सुर्धनान नपि चह नफी देव महादेव की अनुभव छुपा हनुमान जयित हम संदिजों जीते॥ जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महावीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी कंचन बरन बिराज सुबेसा कानन कुण्डल कुंचित केसा॥ हाथ वज्र , और ध्वजा बिराजें काँधे मूँज जनेऊ साजें संकर सुवन केशरी नंदन तेज प्रताप महा जग वंदन॥ राम के संग तुम चलन जीते रघुकुल आप सब संजीवनी देते तेरे दर पर सब संकट मिटें हनुमान जी हम सब को भेंटें॥ जो सियमीत हमारा संकटनाशक उक्ति भये सिया राम ते सच्चा है सड़क हरे हरे राघव गोपाल पवनसुत है हनुमान जी क्या कहन गुपाल एवे तो प्यारे हम से जाचें जीव जंतुः सब केसरी ता नाचें॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

हनुमान अमृतवाणी आरती एक गहन भक्ति गीत है जिसका केंद्रीय विषय हनुमान जी की महिमा और अनंत शक्तियों का गुणगान करना है। इस आरती में हनुमान जी को राम का दूत और संकटमोचक के रूप में स्थापित किया गया है। भक्त उनके माध्यम से अपनी सभी चिंता और दुख को दूर करने की कामना करते हैं। आरती में विशेष रूप से कहा गया है कि हनुमान जी सभी भक्तों के दुख-दर्द को सुनते हैं और उनकी सहायता करते हैं, जैसे 'जो सुन बेवाहजी बिन स्व्रपज'। यह पंक्ति उनकी अनुकंपा और परोपकारिता का संकेत देती है। भक्त हनुमान जी का स्मरण करते हुए अपने जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं।

इस भक्ति गीत के भावार्थ में भक्त की श्रद्धा और प्रेम का गहरा समावेश है। हनुमान जी की उपस्थिति से भक्तों को एक आश्रय मिलता है, जहां वे अपने मन की बात कर सकते हैं। हनुमान जी का नाम लेने से उन्हें ऊर्जा और साहस मिलता है। आरती में यह भी कहा गया है कि 'राम के संग तुम चलन जीते', जो यह दर्शाता है कि हनुमान जी का नाम लेने से भक्त राज्य और सुख की प्राप्ति कर सकते हैं। यह भाव आस्था और विश्वास को बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भक्तों को उनकी शक्ति की याद दिलाता है।

इस आरती के मुख्य धार्मिक तत्वों में भक्ति मार्ग का पालन किया गया है, जिसमें भक्त हनुमान जी की शक्तियों का गुणगान करते हुए उनसे अपने जीवन के संकटों का निवारण करने की प्रार्थना करते हैं। हनुमान जी, जिन्हें 'रामदूत' कहा गया है, भक्तों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इस आरती की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह हनुमान जी को न केवल एक देवता के रूप में बल्कि एक मित्र और संरक्षक के रूप में प्रस्तुत करती है, जो भक्तों के सुख-दुख में सदा साथ रहते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान अमृतवाणी आरती का संबंध विभिन्न हिन्दू ग्रंथों, विशेषकर रामायण से है, जिसमें हनुमान जी को भगवान श्रीराम का भक्‍त, दूत और संकटमोचक बताया गया है। हनुमान जी के अनेक उपासक हैं जो उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और बल प्रदान करने वाला मानते हैं। रामायण में हनुमान जी का महत्त्वपूर्ण योगदान है, जहां उन्होंने सीता माता की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए उनकी आरती का पाठ संकटों को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष रूप से किया जाता है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान अमृतवाणी आरती का जाप करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है। यह आरती नकारात्मकता को दूर करके सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कई भक्तों का मानना है कि इस आरती के पाठ से भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक दृढ़ता, और आत्म-सम्मान।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान अमृतवाणी आरती का पाठ प्रातः काल या संध्या समय किया जाना चाहिए। भक्त को इस समय शांत वातावरण में बैठकर ध्यान लगाना चाहिए। दीप जलाकर और पुष्प अर्पित करके आरती का पाठ करना चाहिए। ध्यान रहे कि हनुमान जी की छवि या प्रतिमा के सामने इस आरती का पाठ किया जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान अमृतवाणी आरती के पाठ का ideal समय क्या है?

इस आरती का पाठ प्रातः और संध्या समय करना अधिक फलदायक माना जाता है, जब मन शांत और ध्यान केंद्रित हो।

हनुमान जी की आरती का क्या महत्व है?

हनुमान जी की आरती का महत्व संकटमोचन और सुरक्षार्थ की कृपा प्राप्त करने में है, जो भक्तों के दुखों का निवारण करती है।

इस आरती का पाठ किस प्रकार से करने चाहिए?

आरती का पाठ दीप जलाकर, पुष्प अर्पित करते हुए और श्रद्धा भाव से करना चाहिए, ताकि भक्तिपूर्ण माहौल बन सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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