Latest Bhakti Song

देवघर घुमा दs पिया | Devghar Ghuma Da Piya Ho Lyrics in Hindi | Mona Singh Bolbam Bhakti Song - BhaktiLok

187 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

देवघर घुमा दs पिया | Devghar Ghuma Da Piya Ho Lyrics in Hindi | Mona Singh Bolbam Bhakti Song

अपडेटेड: जुलाई 2022 श्रेणी: नवीनतम भक्ति गीत / बोलबम भजन संदर्भ एवं व्याख्या सहित सामग्री

सावन मास का पावन महीना आते ही संपूर्ण भारतवर्ष विशेषकर उत्तर भारत और झारखंड का क्षेत्र देवाधिदेव महादेव के जयकारों से गूंज उठता है। ऐसे ही पवित्र और ऊर्जावान माहौल में भोजपुरी संगीत जगत की लोकप्रिय गायिका मोना सिंह द्वारा गाया गया बोलबम गीत "देवघर घुमा दs पिया" (Devghar Ghuma Da Piya Ho) शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा है। यह गीत केवल एक साधारण लोकगीत नहीं है, बल्कि यह एक सुहागिन पत्नी के अपने पति के प्रति उस पवित्र अनुराग और शिव भक्ति का अद्भुत संगम है, जहाँ वह देवघर जाकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त करती है। बोलबम यात्रा या कांवड़ यात्रा सनातन संस्कृति की वह जीवंत परंपरा है जहाँ भक्त कठिन पैदल यात्रा करके भगवान शिव को अपनी निष्ठा अर्पित करते हैं। इस गीत में उसी यात्रा की सुरीली अनुगूंज सुनाई देती है जो श्रोताओं के मन में भोलेनाथ के प्रति अगाध प्रेम और भक्ति रस का संचार करती है। इस विस्तृत लेख में हम इस लोकप्रिय बोलबम गीत के संपूर्ण बोल, इसका सरल हिंदी अर्थ, सांस्कृतिक महत्व और शिव भक्ति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

स्थायी (Mukhda)

देवघर घुमा दs पिया हो, बोलबम बोलss...
सावन के महीना बा, चलीं बाबा के नगरिया,
देवघर घुमा दs पिया हो, दर्शन करा दs पिया...

प्रथम अंतरा (First Stara)

पहन के हरियरकी साड़िया, हाथ में ले लेहियों कांवरिया,
भोले के दरस बिन लागे ना मोरा जिया।
देवघर घुमा दs पिया हो, बोलबम बोलss...
सुनिहें भोले बतिया, पुरैहें सब कमनिया,
चल ना तू संगही में, धरे के बा धंसनिया।

द्वितीय अंतरा (Second Stanza)

डमरू वाला के महिमा अपार बा, दर्शन करे खातिर उमड़ल संसार बा,
मोना सिंह गावे भजनवा, झूमे सारा परिवार बा।
बम-बम बोल रहा है बाबा का धाम, हर हर महादेव जपिंयौ सुबहो-साम!
देवघर घुमा दs पिया हो, बोलबम बोलss...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

मोना सिंह द्वारा गाए गए इस बोलबम गीत के माध्यम से एक सामान्य गृहिणी या भक्त की भावना को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लोक संस्कृति में सावन का महीना शिव साधना का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। गीत के मुखड़े में पत्नी अपने पति से आग्रह कर रही है कि सावन का पवित्र महीना आ चुका है, इसलिए अब बिना देर किए देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम) चलना चाहिए और रास्ते में 'बोलबम' का जयकारा लगाना चाहिए।

पहले अंतरे में भक्त की आंतरिक तैयारी और वेशभूषा का वर्णन है। वह कहती है कि वह हरे रंग की साड़ी पहनकर और हाथों में पवित्र कांवर उठाकर भगवान शिव के दर्शन के लिए व्याकुल है। महादेव के दर्शन के बिना उसका मन कहीं नहीं लग रहा है। वह अपने पति को विश्वास दिलाती है कि यदि वे दोनों साथ चलेंगे, तो भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करेंगे और इस कठिन यात्रा का पुण्य उन्हें प्राप्त होगा।

अंतिम चरण में भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए बताया गया है कि देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दरबार में किस प्रकार संपूर्ण संसार से भक्त उमड़ते हैं। गायिका मोना सिंह इस भजन के माध्यम से सभी शिव भक्तों को झूमने और महादेव के नाम का स्मरण करने की प्रेरणा देती हैं। यह गीत पारिवारिक सौहार्द और धार्मिक आस्था का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

पारिवारिक एवं दांपत्य भक्ति

पति-पत्नी मिलकर जब धार्मिक यात्रा करते हैं, तो पारिवारिक जीवन में धार्मिक संस्कार और प्रेम दोनों प्रगाढ़ होते हैं। यह गीत इसी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत करता है।

शिव के प्रति अनन्य समर्पण

कठिन कांवड़ यात्रा और बोलबम के जयकारों के बीच बाबा बैद्यनाथ के प्रति अटूट विश्वास ही इस गीत का केंद्रीय भाव है।

लोक संस्कृति का प्रसार

भोजपुरी लोक संगीत के माध्यम से सनातन धर्म की परंपराओं और सावन के उल्लास को जन-जन तक पहुँचाना इस रचना का मुख्य उद्देश्य है।

गीत की जानकारी | Song Information

विशेषता विवरण
गीत का नाम देवघर घुमा दs पिया (Devghar Ghuma Da Piya Ho)
गायिका मोना सिंह (Mona Singh)
संगीत शैली बोलबम भक्ति गीत / भोजपुरी लोक भजन
भाषा भोजपुरी / हिंदी
आरध्य देव भगवान भोलेनाथ (बाबा बैद्यनाथ)
मुख्य पर्व सावन मास एवं कांवड़ यात्रा

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
देवघर झारखंड स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बाबा बैद्यनाथ धाम शिव का पावन धाम
कांवरिया कांवड़ लेकर यात्रा करने वाला शिव भक्त सावन यात्रा
कमनिया मनोकामनाएं / इच्छाएं भगवान द्वारा वरदान देना
धंसनिया स्थान या विशिष्ट पड़ाव / बैठने का आसन यात्रा का मार्ग
हरियरकी हरे रंग की सावन मास का प्रतीक रंग

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन संस्कृति में सावन मास का महीना आत्म-शुद्धिकरण और भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोपरि माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करते हुए झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा केवल शारीरिक श्रम नहीं है, बल्कि यह अहंकार के त्याग और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

मोना सिंह का यह बोलबम गीत इसी सांस्कृतिक चेतना को स्वर देता है। जब एक गृहिणी अपने परिवार और विशेष रूप से अपने पति के साथ इस यात्रा की इच्छा व्यक्त करती है, तो इससे समाज में पारिवारिक एकता और धार्मिक सहभागिता का संदेश जाता है। यह गीत श्रोताओं के भीतर की सुप्त भक्ति को जाग्रत करता है और उन्हें सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर शिवमय बनने की प्रेरणा देता है। ऐसे पारंपरिक गीत हमारी लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आस्था को जीवित रखते हैं।

आप भगवान शिव की महिमा से जुड़े अन्य पावन स्तोत्रों और कथाओं के लिए शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र के पावन लेखों का भी अध्ययन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय बोलबम गीत को भोजपुरी संगीत जगत की प्रसिद्ध गायिका मोना सिंह ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

झारखंड स्थित देवघर में भगवान शिव का द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है, जहाँ सावन के महीने में देश-विदेश से कांवड़िए जल चढ़ाने आते हैं।

बोलबम गीत मुख्य रूप से सावन मास और कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्तों द्वारा भगवान भोलेनाथ की स्तुति और यात्रा के उत्साह को बढ़ाने के लिए गाए जाते हैं।

इस गीत का मुख्य संदेश पति-पत्नी के पारिवारिक प्रेम के साथ-साथ भगवान शिव के प्रति अटूट निष्ठा, कांवड़ यात्रा की महिमा और देवघर जाकर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की लालसा को व्यक्त करना है।

हरा रंग प्रकृति, हरियाली, उर्वरता और सकारात्मकता का प्रतीक है। सावन मास में प्रकृति हरी-भरी हो जाती है, इसलिए इस माह में हरे रंग के वस्त्र पहनने और श्रृंगार करने की विशेष परंपरा है।

हाँ, बोलबम और शिव भजन कांवरियों की लंबी और कठिन पैदल यात्रा के दौरान उनकी थकान को दूर करते हैं और उनके मन में उत्साह एवं भक्ति भाव बनाए रखते हैं।

भक्तिलोक पर आपको विभिन्न देवी-देवताओं के पारंपरिक भजन, बोलबम गीत, चालीसा, आरती, और व्रत कथाओं के विस्तृत और प्रामाणिक बोल हिंदी में मिलते हैं।

इस गीत को विशेष रूप से सावन मास में, सुबह की पूजा के समय या कांवड़ यात्रा के दौरान यात्रा करते समय सुनना अत्यंत आनंददायक और ऊर्जावान होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के संपादकीय दल द्वारा सनातन संस्कृति, लोक संगीत परंपराओं और शिव भक्ति के संदर्भ में पूरी श्रद्धा और प्रामाणिकता के साथ तैयार किया गया है। सभी बोल और अर्थ पाठकों की सुविधा के लिए सहज हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री • स्रोत: पारंपरिक लोक संगीत एवं शिव भक्ति साहित्य

श्रेणियां: Latest Bhakti Song

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!