Punjabi Devi Bhajan

जागी मईया भोर हो गईल | Jaagi Maiya Bhor Ho Gail Lyrics | Kiran Singh Bhojpuri Devigeet | Bhakti Song 2022 - BhaktiLok

62 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"जागी मईया भोर हो गईल" भोजपुरी देवी गीतों की उस समृद्ध परंपरा का हिस्सा है, जो भोर की पहली किरण के साथ ही माता के जागरण और उनकी स्तुति का आह्वान करती है। किरण सिंह द्वारा स्वरबद्ध यह भजन न केवल एक मधुर संगीत रचना है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक निमंत्रण भी है। सनातन धर्म में 'जागरण' का अर्थ केवल निद्रा का त्याग नहीं, बल्कि अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर प्रस्थान करना है। यह भजन भक्त के हृदय में माता के प्रति अटूट विश्वास, समर्पण और प्रेम के भाव को जागृत करता है। नवरात्रि के पावन पर्वों पर या नित्य प्रातः काल की पूजा में इस भजन का श्रवण साधक के मन में सात्विक ऊर्जा का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जागी मईया भोर हो गईल, भोर हो गईल,
सगरी नगरिया में शोर हो गईल, जागी मईया...

पवन बहे धीरे-धीरे, फूलवा महके बारी,
सगरी सखियन मिलके, तोहरे आरती उतारी,
भक्तन के मनवा में जोर हो गईल, जागी मईया...

सोने के कलश में गंगा जल ले आईल,
चरण पखारि के, हम त चरणन में आईल,
मईया तोहरे दरस के भोर हो गईल, जागी मईया...

किरण सिंह गावे तोहरे, महिमा अपार,
भक्तन के मईया, तू ही त आधार,
मईया तोहरे नाम के शोर हो गईल, जागी मईया...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त माता से प्रार्थना कर रहा है कि हे माता! अब भोर (सुबह) हो गई है, आप जाग जाइए। भक्त कहता है कि पूरी नगरी में आपकी महिमा का शोर (जयघोष) हो रहा है। भजन का भाव यह है कि भक्त अपनी साधना के माध्यम से माता को अपने हृदय में जागृत करना चाहता है। 'पवन बहे धीरे-धीरे' वाली पंक्ति प्रकृति के उस शांत और पवित्र वातावरण का वर्णन करती है, जो देवी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त है। भक्त गंगा जल से माता के चरण पखारने की इच्छा व्यक्त करता है, जो शुद्धता और समर्पण का प्रतीक है। अंत में, गायिका किरण सिंह माता को भक्तों का एकमात्र आधार बताती हैं, जो यह दर्शाता है कि संसार में माता की भक्ति ही सत्य है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति भाव: यह भजन 'वात्सल्य' और 'विनय' के भाव से ओत-प्रोत है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: भोजपुरी लोक शैली में रचित यह गीत ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में अत्यंत लोकप्रिय है।
  • आध्यात्मिक जागरण: 'भोर हो गईल' का अर्थ केवल सूर्योदय नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा के प्रति जागृत होना है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त या प्रातः काल की पूजा के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे गाते समय मन में माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। यदि आप इसे नवरात्रि के दौरान गाते हैं, तो यह और भी अधिक फलदायी होता है। इसे गाते समय ताली बजाकर या ढोलक-मंजीरे के साथ लयबद्ध होकर गाना भक्ति के आनंद को दोगुना कर देता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी लोक भाषा में है। इसकी शैली अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जो इसे गेय (गाने योग्य) बनाता है। लोक गीतों की सरलता ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है, जो सीधे जनमानस के हृदय को छूती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में माता (शक्ति) का स्मरण ही सबसे बड़ा आधार है। जिस प्रकार भोर होते ही अंधकार मिट जाता है, उसी प्रकार माता की भक्ति से जीवन के सभी कष्ट और अज्ञानता दूर हो जाती है। यह हमें विनम्रता और सेवा भाव के साथ ईश्वर के चरणों में समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
भोर सुबह / प्रभात जागरण का समय
सगरी सारी / संपूर्ण पूरा संसार
चरण पखारि चरण धोना सेवा और भक्ति
आधार सहारा / मूल ईश्वर की शरण

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जागी मईया भोर हो गईल
गायिका किरण सिंह
भाषा भोजपुरी
विषय देवी जागरण / भक्ति
उपयुक्त अवसर प्रातः काल / नवरात्रि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

जागी मईया भोर हो गईल भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन मुख्य रूप से जगत जननी माँ दुर्गा को समर्पित है, जो शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं।

क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?

जी हाँ, इसे घर पर पूजा के दौरान, कीर्तन में या प्रातः काल के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्ति लोक के विद्वानों द्वारा विभिन्न लोक गीतों और देवी स्तुतियों के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य भक्तों को उनके प्रिय भजनों के अर्थ और महत्व से जोड़ना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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