भोले बाबा पे जलवा ढार लिजिये | Bhole baba pe jalava chadhayid Lyrics in Hindi - Kiran Singh Bolbam Song
अपडेटेड: सावन विशेष | गायिका: किरण सिंह | श्रेणी: बोलबम गीत
सनातन धर्म और लोक संस्कृति में देवाधिदेव महादेव भगवान शिव की आराधना का अत्यंत विशिष्ट और पावन स्थान है। विशेषकर पवित्र सावन मास (सावन मास) और बोलबम यात्रा (Bolbam Yatra) के दौरान शिव भक्तों में जो अभूतपूर्व उत्साह, ऊर्जा और भक्ति का ज्वार देखने को मिलता है, वह सनातन आस्था का सबसे जीवंत रूप है। शिव भक्ति के इस पावन और ऊर्जावान प्रवाह को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय बोलबम भजन "भोले बाबा पे जलवा ढार लिजिये" (Bhole baba pe jalava chadhayid) प्रसिद्ध लोक गायिका किरण सिंह (Kiran Singh) की सुमधुर और मनमोहक वाणी में गाया गया एक ऐसा गीत है, जो हर कांवरिया के कदम थिरकाने और अंतस में भक्ति जगाने के लिए पर्याप्त है। यह भजन देवघर के बाबा बैद्यनाथ (बाबा बैद्यनाथ मंदिर देवघर), बासुकीनाथ या देश के अन्य प्रमुख शिवालयों की ओर कांवर लेकर नंगे पांव यात्रा करने वाले शिव भक्तों के हृदय में अदम्य साहस का संचार करता है। बोलबम के गीतों में जहां एक ओर अलौकिक उत्साह और जोश होता है, वहीं दूसरी ओर आशुतोष भोलेनाथ के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का भाव झलकता है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
स्थाई (Mukhda):
भोले बाबा पे जलवा ढार लिजिये,
मन के मुराद सब पूरा कर लिजिये...
बोल बम बोल बम बोल बम कहिए,
भोले बाबा के चरनिया में ध्यान धर लिजिये।
अंतरा 1 (Stanza 1):
Sawan के महीना आ गेल कांवरिया,
सज गेल देवघर के पावन नगरिया।
सुल्तागंज से जल उठा के चल तू कांवरिया,
बाबा बैद्यनाथ पे चढ़ा के पा ले नजरिया।
बम-बम बोल के आगे बढ़त चलिए,
भोले बाबा पे जलवा ढार लिजिये...
अंतरा 2 (Stanza 2):
डम-डम डमरू बजावे भोले डमरूवाला,
गले में मुंडमाला साजे भोला भोला असुराला।
भांग धतूरा बेलपत्र तू चढ़ाव रे भक्ता,
सारे संकट को हर लेंगे कृपा के विधाता।
भोला के महिमा तू मन में धर लिजिये,
भोले बाबा पे जलवा ढार लिजिये...
समापन (Refrain/Outro):
किरण सिंह गावे भजनवा बड़ा मन से,
शिव भक्ति पावे जो आराधन से।
हर हर महादेव का नारा गूंजे गगनवा,
तृप्त हो जाए सब भक्तन के मनवा।
चरण कमल में अब सीस धर लिजिये,
भोले बाबा पे जलवा ढार लिजिये...
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
किरण सिंह द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय बोलबम गीत के माध्यम से कांवरियों को यह प्रेरणा दी जाती है कि वे पवित्र सावन मास में पूरी निष्ठा और उत्साह के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करें। गीत की पंक्तियों का विस्तृत भावार्थ निम्नलिखित है:
"भोले बाबा पे जलवा ढार लिजिये, मन के मुराद सब पूरा कर लिजिये..."
इस आरंभिक पंक्ति में गायिका भक्तों से आह्वान करती है कि वे देवाधिदेव महादेव के शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक जल (जलवा ढारना) अर्पित करें। आशुतोष भोलेनाथ ऐसे दयालु देवता हैं जो केवल एक लोटा जल और बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं (मन के मुराद) को पूर्ण करते हैं।
"Sawan के महीना आ गेल कांवरिया, सज गेल देवघर के पावन नगरिया..."
सावन के पवित्र महीने का आगमन होते ही संपूर्ण कांवरिया समाज और देवघर नगरी शिवमय हो जाती है। सुल्तागंज से उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर कांवर में सजाकर नंगे पांव बोलबम का जयकारा लगाते हुए चलना ही इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता है।
"डम-डम डमरू बजावे भोले डमरूवाला..."
भगवान शिव के स्वरूप का वर्णन करते हुए गीत में उनके डमरू, गले में सर्प और मुंडमाला तथा प्रिय भोग भांग-धतूरा और बेलपत्र का स्मरण किया गया है। यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि शिव जी सरल स्वभाव वाले और भक्तों के संकटों को पलभर में हरने वाले कृपालु परमपिता हैं।
गीत की मुख्य भावना, संदेश एवं सांस्कृतिक महत्व | Theme, Emotion & Message
यह बोलबम गीत केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह सनातन लोक संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है जहां भक्त अपनी व्यक्तिगत कठिनाइयों और थकावट को भुलाकर केवल शिवमय हो जाते हैं। सावन मास में इस प्रकार के भजनों के श्रवण से श्रोता के मन में सकारात्मक ऊर्जा, संयम और अनुशासन का संचार होता है।
लोक गायिका किरण सिंह की आवाज में गाए गए इन गीतों का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के शिव भक्तों को एकजुट करना और बोलबम यात्रा के दौरान आपसी सहयोग व भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना है। जब कांवरिया समूह में चलते हुए ऐसे भजन गाते हैं, तो उनकी थकान मीलों की दूरी तय करने के बावजूद छूमंतर हो जाती है।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम (Song Name) | भोले बाबा पे जलवा ढार लिजिये (Bhole Baba Pe Jalwa Dhari Liye) |
|---|---|
| गायिका (Singer) | किरण सिंह (Kiran Singh) |
| श्रेणी / विधा (Category) | बोलबम गीत / सावन स्पेशल भजन (Bolbam Song) |
| भाषा (Language) | हिंदी / भोजपुरी लोक भाषा |
| प्रमुख देवता (Deity) | भगवान शिव / आशुतोष भोलेनाथ |
| अवसर (Occasion) | सावन मास, कांवर यात्रा, शिवरात्रि |
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / प्रयोग |
|---|---|---|
| जलवा ढार | जल अर्पित करना / जलाभिषेक | शिवलिंग पर जल चढ़ाना |
| मुराद | मनोकामना / इच्छा | भक्त की आंतरिक प्रार्थना |
| कांवरिया | कांवर लेकर यात्रा करने वाला शिव भक्त | बोलबम यात्री |
| सुल्तागंज | उत्तरवाहिनी गंगा तट | जहां से कांवरिए जल भरते हैं |
| देवघर | बाबा बैद्यनाथ धाम | प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थल |
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- कठिनाइयों में दृढ़ता: जिस प्रकार कांवरिए मीलों की कठिन यात्रा पैदल तय करते हैं, उसी प्रकार जीवन के पथ पर आने वाली बाधाओं से घबराए बिना आगे बढ़ते रहना चाहिए।
- शरणागति का भाव: भगवान शिव के चरणों में खुद को समर्पित कर देने से मानसिक शांति और संतोष की प्राप्ति होती है।
- सामूहिकता और भाईचारा: बोलबम यात्रा और ऐसे भजन समाज में आपसी भेदभाव मिटाकर एकता का संदेश देते हैं।
- नियमित साधना: सावन जैसे पवित्र महीनों में अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख सावन मास और बोलबम संस्कृति के पारंपरिक लोकगीतों के संरक्षण एवं प्रसार के उद्देश्य से तैयार किया गया है। गीत के बोल और उसके भावार्थ को प्रामाणिक सांस्कृतिक संदर्भों के आधार पर सजाया गया है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री | BhaktiLok Editorial Team
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन लोक गीत परंपरा एवं सावन कांवरिया संस्कृति।
- भोजपुरी एवं हिंदी बोलबम संगीत संग्रह, किरण सिंह लोकगीत एलबम।
- शिव महापुराण एवं पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान ग्रंथ।
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