Parvati Stotram

ओ पता नहीं उसे कौनसा खुमार चढ़ता है भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

67 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"ओ पता नहीं उसे कौनसा खुमार चढ़ता है" यह भजन भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण और उस दिव्य 'खुमार' (मस्ती) का वर्णन करता है जो एक भक्त को संसार से विरक्त कर सीधे प्रभु के चरणों में लीन कर देता है। यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो कृष्ण की लीलाओं और उनकी मधुर मुस्कान के दीवाने हैं। इस भजन में वर्णित 'खुमार' वास्तव में वह आध्यात्मिक अवस्था है जहाँ भक्त को अपने इष्ट के सिवाय कुछ भी दिखाई नहीं देता। यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि हृदय में भक्ति का संचार कर साधक को प्रेम-भक्ति की पराकाष्ठा तक ले जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

ओ पता नहीं उसे कौनसा खुमार चढ़ता है,
जब भी देखूँ उसे, वो और भी निखरता है।
ओ पता नहीं उसे कौनसा खुमार चढ़ता है...

मुरली की तान जब वो छेड़ता है कान्हा,
सारा जग सुध-बुध अपनी खो बैठता है।
ओ पता नहीं उसे कौनसा खुमार चढ़ता है...

नैनों के बाण जब वो चलाता है सांवरे,
भक्तों का मन वो पल में चुराता है।
ओ पता नहीं उसे कौनसा खुमार चढ़ता है...

प्रेम की डोर में सबको बांधता है वो,
भक्ति के रंग में सबको रंगता है वो।
ओ पता नहीं उसे कौनसा खुमार चढ़ता है...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। यहाँ 'खुमार' शब्द का अर्थ नशा नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रेम में डूबने की वह अवस्था है जिसे 'मस्त-मौला' भक्ति कहा जाता है। भक्त कहता है कि प्रभु श्री कृष्ण की छवि इतनी मोहक है कि उसे बार-बार देखने पर भी मन नहीं भरता। जैसे-जैसे भक्त उन्हें देखता है, उनकी सुंदरता और दिव्यता और अधिक निखरती जाती है। मुरली की तान का अर्थ है—परमात्मा का वह नाद जो ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त है। जब वह नाद सुनाई देता है, तो सांसारिक मोह-माया का बंधन स्वतः ही टूट जाता है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति कोई बोझ नहीं, बल्कि एक आनंदमयी अवस्था है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति रस: यह भजन माधुर्य भाव की भक्ति को समर्पित है।
  • मानसिक शांति: इसके श्रवण से मन की चंचलता समाप्त होती है।
  • कृष्ण प्रेम: यह भजन साधक को श्री कृष्ण की लीलाओं का स्मरण कराता है।
  • सरलता: इसकी भाषा अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी है, जो हर किसी को समझ आती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु एकांत में या संध्याकालीन आरती के समय इसका गायन विशेष फलदायी होता है। इसे गाते समय मन में श्री कृष्ण की छवि का ध्यान करना चाहिए। आप इसे मनमोहना भजन के साथ भी जोड़कर गा सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
खुमार मस्ती/नशा ईश्वरीय प्रेम की अवस्था
निखरना चमकना/सुंदर दिखना प्रभु की दिव्यता
सुध-बुध होश संसार का विस्मरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है।

हाँ, इसे घर पर पूजा या सत्संग के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तिलोक के विद्वानों द्वारा संकलित की गई है। भजन का भावार्थ आध्यात्मिक ग्रंथों और वैष्णव परंपराओं के आधार पर तैयार किया गया है। संकलित सामग्री का उद्देश्य पाठकों को भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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