Parvati Stotram

भजन - हे माँ मुझको ऐसा घर दे लिरिक्स इन हिंदी - भक्ति लोक

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भजन - हे माँ मुझको ऐसा घर दे लिरिक्स इन हिंदी - भक्ति लोक

सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में आदिशक्ति जगदंबा माँ दुर्गा, माता पार्वती और संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी का स्मरण मनुष्य के अंतःकरण को पावन और ऊर्जावान बना देता है। प्रस्तुत भजन "हे माँ मुझको ऐसा घर दे" देवी अम्बे के चरणों में एक निश्छल भक्त की अनन्य पुकार है, जहाँ भौतिक संसार की सुख-सुविधाओं की अपेक्षा आध्यात्मिक शांति, भगवद्भक्ति और सात्विक संस्कारों से परिपूर्ण जीवन की कामना की गई है। इस भजन का भाव और संगीत साधक को सांसारिक मोह-माया और चिंताओं से मुक्त कर माता के चरणों में पूर्ण शरणागति का अनुभव कराता है। भक्ति लोक के इस विस्तृत आलेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और जीवन पर इसके सकारात्मक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। माता रानी के दरबार में जब भक्त करबद्ध होकर ऐसे भावपूर्ण भजन गाता है, तो देवी की असीम कृपा स्वतः ही बरसने लगती है और साधक का गृहस्थ जीवन भी एक पावन मंदिर के समान पवित्र हो जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जहाँ तेरा सिमरन हो,
तेरे चरणों में मेरा जीवन, हर पल अर्पण हो।

सुख आए या दुःख आए, मन डगमगाए ना,
तेरी भक्ति का दीपक, कभी बुझ पाए ना।
दीवारों पर तेरी मूरत, आँगन में तुलसी हो,
हर श्वास में माता तेरा, पावन स्मरण हो।
हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जहाँ तेरा सिमरन हो...

दुनिया के मेले में, मैं खो न जाऊँ कहीं,
तेरे बिना मैया, मेरा अपना कोई नहीं।
हाथ पकड़कर मेरा, मुझको सँभाले रखना,
पाप और बुराइयों से, सदा बचाए रखना।
बच्चों के मुख पर तेरी, मीठी सी किलकारी हो,
घर के हर कोने में, तेरी महिमा न्यारी हो।
हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जहाँ तेरा सिमरन हो...

सुबह-शाम तेरे दर पर, घंटी और शंख बजे,
तेरी ज्योति के प्रकाश से, अन्धियारा सब भागे।
जो भी आए इस द्वारे, भूखा न कोई जाए,
सबको माँ ममता का, आशीर्वाद मिल जाए।
मेरी यही विनती है, स्वीकार इसे करना,
भवसागर से मैया, मेरा पार उतार करना।
हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जहाँ तेरा सिमरन हो,
तेरे चरणों में मेरा जीवन, हर पल अर्पण हो।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि एक गृहस्थ साधक की गहरी आर्त पुकार है जो भौतिक संसार में रहते हुए भी अपने घर को एक आध्यात्मिक आश्रम या मंदिर बनाना चाहता है। भजन की प्रथम पंक्ति में भक्त माता से एक ऐसा घर मांगता है जहाँ २४ घंटे भगवान और माँ का सिमरन (स्मरण) होता रहे। सनातन धर्म में घर को चार दीवारों का ढांचा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के संस्कारों का केंद्र माना गया है।

भक्त आगे कहता है कि जीवन में चाहे सुख आए या दुःख की कोई भी विकट परिस्थिति आए, उसका मन कभी भी अपने मार्ग से विचलित न हो और माता की भक्ति का अक्षय दीपक उसके हृदय में हमेशा प्रज्वलित रहे। आँगन में तुलसी का पौधा और दीवारों पर माता की मूरत का होना भारतीय संस्कृति के उस सनातन स्वरूप को दर्शाता है जहाँ प्रकृति और परमात्मा का अटूट संबंध है। सांसारिक प्रलोभनों और मोह-माया के बीच भटकने से बचने के लिए भक्त माता से प्रार्थना करता है कि वह उसका हाथ थामकर रखें और उसे हर प्रकार के अवगुणों और पापों से बचाकर रखें। अंत में, घर में आने वाले हर अतिथि को भोजन और सम्मान मिले, यह कामना करके साधक ने वसुधैव कुटुंबकम की भारतीय भावना को चरितार्थ किया है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और मार्मिकता है। इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग आसानी से गा सकते हैं। माता रानी के विभिन्न रूपों जैसे दुर्गा, महागौरी, और जगत जननी के प्रति प्रेम और समर्पण को यह भजन बहुत ही सुंदर तरीके से व्यक्त करता है। गृहस्थ जीवन में भजन-कीर्तन का क्या महत्व है, यह इस रचना से स्पष्ट होता है। जब घर का वातावरण सात्विक और भक्तिमय होता है, तो वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश स्वतः ही बंद हो जाता है और सकारात्मकता, शांति तथा परस्पर प्रेम का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों और समय पर गाना या सुनना अत्यंत फलदायी माना गया है:

  • प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात पूजा के समय जब घर में दीप प्रज्वलित किया जाता है।
  • संध्या बेला में (प्रदोष काल) जब घर के सभी सदस्य एकसाथ एकत्रित होते हैं।
  • नवरात्रि के पावन दिनों में अष्टमी या नवमी के अनुष्ठान के दौरान।
  • घर में किसी नए मकान या गृह प्रवेश के मंगल अवसर पर।
  • पारिवारिक सत्संग, माता की चौकी या जागरण के पावन आयोजन में।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मूल रूप से आदिशक्ति माँ दुर्गा, माता पार्वती और संपूर्ण जगत को पालने वाली अम्बे भवानी को समर्पित है। सनातन धर्म में माता को 'माता सर्वभूतेषु' के रूप में देखा जाता है जो अपने बच्चों की हर पुकार सुनती हैं। संत परंपरा में भी गृहस्थ जीवन में रहते हुए ईश्वर की आराधना करने को श्रेष्ठ माना गया है, और यह भजन उसी गृहस्थ योग की सुंदर अभिव्यक्ति है। आप ओम जय जगदीश हरे आरती के साथ भी इस भजन को अपनी दैनिक प्रार्थना में शामिल कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

समकालीन भक्ति संगीत की परंपरा में ऐसे भजनों का विशेष स्थान है जो सीधे जनमानस के हृदय को स्पर्श करते हैं। इस भजन के रचयिता ने बहुत ही सहज और बोलचाल की हिंदी भाषा का प्रयोग किया है ताकि हर भक्त माता के साथ अपने आत्मीय संबंध को महसूस कर सके। पारंपरिक लोक धुनों पर आधारित यह भजन सुनने वाले को मंत्रमुग्ध कर देता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, मधुर और प्रवाहमयी खड़ी हिंदी / लोक भाषा है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है। 'दीवारों पर तेरी मूरत, आँगन में तुलसी हो' जैसी पंक्तियाँ भारतीय संस्कृति के बिम्बों को बहुत ही सजीव रूप से प्रस्तुत करती हैं। सरल शब्दावली होने के कारण इसे याद रखना और गाना बहुत आसान है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें यह गहरी जीवन सीख मिलती है कि भौतिक उन्नति के साथ-साथ आंतरिक और आध्यात्मिक उन्नति भी उतनी ही आवश्यक है। घर वह नहीं जहाँ केवल ईंट-पत्थर लगे हों, बल्कि घर वह है जहाँ भगवान का वास हो, बड़ों का सम्मान हो, बच्चों की किलकारी हो और अतिथियों का सत्कार हो। संतोष, धैर्य, और भगवद्भक्ति ही जीवन के असली आभूषण हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
सिमरन स्मरण, जप या ध्यान निरंतर ईश्वर का स्मरण रखना
अर्पण समर्पण करना अपना संपूर्ण जीवन भगवान को सौंपना
भवसागर संसार रूपी सागर जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति
महिमा यश, महानता या प्रभाव माता की असीम कृपा और शक्ति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जहाँ तेरा सिमरन हो..." - इस प्रारंभिक पंक्ति में भक्त की एकमात्र इच्छा प्रकट होती है कि उसे धन-वैभव से अधिक भगवान के नाम का स्मरण करने वाला घर चाहिए।
"सुख आए या दुःख आए, मन डगमगाए ना..." - जीवन के उतार-चढ़ाव में मानसिक संतुलन बनाए रखने की शक्ति माँ से मांगी जा रही है।
"दुनिया के मेले में, मैं खो न जाऊँ कहीं..." - सांसारिक मोह-माया के प्रलोभनों से अपनी रक्षा करने की प्रार्थना इस पंक्ति में निहित है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता के सिमरन और शुद्धि के लिए निम्नलिखित पावन श्लोक का स्मरण करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम हे माँ मुझको ऐसा घर दे लिरिक्स
समर्पित देवता माँ दुर्गा / आदिशक्ति
भाषा सरल हिंदी
मुख्य थीम भक्ति, पारिवारिक शांति और शरणागति
मुख्य भाव विनय और प्रेम
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, नवरात्रि, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन भजन आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा और माता पार्वती को समर्पित है।

इस भजन को प्रातःकालीन पूजा, संध्या आरती, नवरात्रि या किसी भी पारिवारिक अनुष्ठान के दौरान गाया जा सकता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि घर में भौतिक सुखों से अधिक भगवद्भक्ति, शांति, संस्कार और परस्पर प्रेम का होना आवश्यक है।

हाँ, इसे प्रतिदिन अपने दैनिक कार्यों के दौरान या संध्या के समय आसानी से गुनगुनाया जा सकता है।

इसके नियमित गायन या श्रवण से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पारिवारिक सौहार्द तथा मानसिक शांति में वृद्धि होती है।

अवश्य! बच्चों को ऐसे पावन भजन सिखाने से उनमें बचपन से ही अच्छे संस्कार और धार्मिक भावना विकसित होती है।

भजन के मुखड़े और अंतरा को लिखकर या पढ़कर प्रतिदिन दो-तीन बार दोहराने से यह बहुत जल्दी याद हो जाता है।

हाँ, ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम या करताल के साथ इस भजन को गाने से इसका आनंद और भक्ति भाव कई गुना बढ़ जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म की लोक-भक्ति परंपरा, माता रानी की आराधना और गृहस्थ जीवन के आध्यात्मिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, प्रामाणिक और प्रेरणादायक devotional content प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक सनातन भजन परंपरा और लोकगीत संग्रह।
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती के उपदेश।
  • भक्ति लोक के संकलन और संपादकीय दिशानिर्देश।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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