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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 · श्लोक 8

अध्याय 3 · श्लोक 8

कर्म योग (Karma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः | शरीरयात्रापि च ते न प्रसिध्येदकर्मणः ||८||

niyataṃ kuru karma tvaṃ karma jyāyo hy akarmaṇaḥ | śarīrayātrāpi ca te na prasidhyed akarmaṇaḥ ||8||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

नियतम्: नियत (शास्त्र-विहित); कुरु: कर; कर्म: कर्म; त्वम्: तू; कर्म: कर्म; ज्याय: श्रेष्ठ है; हि: निश्चय ही; अकर्मण: अकर्म से; शरीरयात्रा: शरीर-निर्वाह; अपि: भी; च: और; ते: तेरा; न: नहीं; प्रसिध्येत्: सिद्ध होगा; अकर्मण: कर्म न करने से।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तू नियत (शास्त्र-विहित) कर्म कर, क्योंकि कर्म, अकर्म से श्रेष्ठ है और अकर्म (बिना कर्म किए) तो तेरे शरीर का निर्वाह भी नहीं हो सकता।

English Translation

Perform your prescribed duty, for action is superior to inaction. Even the maintenance of your body would not be possible without action.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान अब सीधा आदेश देते हैं – अपना नियत कर्म करो, क्योंकि कर्म न करना (अकर्म) न केवल अश्रेष्ठ है, बल्कि व्यावहारिक रूप से असम्भव भी है। The Lord now gives a direct command: perform your prescribed duty, because inaction is not only inferior but also practically impossible – even bodily maintenance requires action.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।