दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) – श्लोक 12
श्लोक १२ में वर्णन: आशाओं के बन्धन में बंधे, काम-क्रोध में लीन, वे अन्याय से धन संचय करते हैं।
संस्कृत श्लोक
आशापाशशतैर्बद्धा: कामक्रोधपरायणा: | ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान् || १२||
āśā-pāśa-śatair baddhāḥ kāma-krodha-parāyaṇāḥ | īhante kāma-bhogārtham anyāyenārtha-sañcayān ||12||
पदच्छेद / शब्दार्थ
आशापाशशतै: आशा रूपी सैंकड़ों फन्दों से; बद्धा: बंधे हुए; कामक्रोधपरायणा: काम और क्रोध में तत्पर; ईहन्ते: इच्छा करते हैं; कामभोगार्थम्: भोगों के लिए; अन्यायेन: अन्यायपूर्वक; अर्थसञ्चयान्: धन के संचय की।
हिंदी अनुवाद
आशा रूपी सैंकड़ों फन्दों से बंधे हुए, काम-क्रोध में लगे हुए, वे भोगों के लिए अन्यायपूर्वक धन का संचय करना चाहते हैं।
English Translation
Bound by hundreds of fetters of hope, devoted to lust and anger, they strive to amass wealth by unjust means for the satisfaction of their senses.
टीका / Commentary
आसुरी लोग आशाओं के जाल में फँसे रहते हैं। काम और क्रोध उन्हें प्रेरित करते हैं। वे अन्यायपूर्वक धन इकट्ठा करने में लगे रहते हैं।