आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16 · श्लोक 12

अध्याय 16 · श्लोक 12

दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

आशापाशशतैर्बद्धा: कामक्रोधपरायणा: | ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान् || १२||

āśā-pāśa-śatair baddhāḥ kāma-krodha-parāyaṇāḥ | īhante kāma-bhogārtham anyāyenārtha-sañcayān ||12||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

आशापाशशतै: आशा रूपी सैंकड़ों फन्दों से; बद्धा: बंधे हुए; कामक्रोधपरायणा: काम और क्रोध में तत्पर; ईहन्ते: इच्छा करते हैं; कामभोगार्थम्: भोगों के लिए; अन्यायेन: अन्यायपूर्वक; अर्थसञ्चयान्: धन के संचय की।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

आशा रूपी सैंकड़ों फन्दों से बंधे हुए, काम-क्रोध में लगे हुए, वे भोगों के लिए अन्यायपूर्वक धन का संचय करना चाहते हैं।

English Translation

Bound by hundreds of fetters of hope, devoted to lust and anger, they strive to amass wealth by unjust means for the satisfaction of their senses.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

आसुरी लोग आशाओं के जाल में फँसे रहते हैं। काम और क्रोध उन्हें प्रेरित करते हैं। वे अन्यायपूर्वक धन इकट्ठा करने में लगे रहते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।