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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 1

अध्याय 8 · श्लोक 1

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ १॥

kiṃ tad brahma kim adhyātmaṃ kiṃ karma puruṣottama | adhibhūtaṃ ca kiṃ proktam adhidaivaṃ kim ucyate ||1||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

किम्: what; तत्: that; ब्रह्म: Brahman; किम्: what; अध्यात्मम्: Adhyatma; किम्: what; कर्म: action; पुरुषोत्तम: O best of men; अधिभूतम्: Adhibhuta; च: and; किम्: what; प्रोक्तम्: is said; अधिदैवम्: Adhidaiva; किम्: what; उच्यते: is called.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्जुन बोले: हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसे कहते हैं? और अधिदैव किसे कहते हैं?

English Translation

Arjuna asks: What is that Brahman? What is Adhyatma? What is action, O best of men? What is declared to be Adhibhuta? And what is called Adhidaiva?

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन के ये प्रश्न आध्यात्मिक जिज्ञासा के मूल हैं। कृष्ण इनका उत्तर देकर ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म आदि की व्याख्या करेंगे। Arjuna's questions are fundamental to spiritual inquiry. Krishna will answer them, explaining Brahman, Adhyatma, Karma, etc.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।