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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 54

अध्याय 2 · श्लोक 54

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अर्जुन उवाच | स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव | स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम् ||५४||

arjuna uvāca | sthita-prajñasya kā bhāṣā samādhi-sthasya keśava | sthita-dhīḥ kiṃ prabhāṣeta kim āsīta vrajeta kim ||54||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अर्जुन: अर्जुन; उवाच: बोले; स्थितप्रज्ञस्य: स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धि) की; का: क्या; भाषा: भाषा (परिभाषा); समाधिस्थस्य: समाधि में स्थित की; केशव: हे केशव; स्थितधीः: स्थिर बुद्धि वाला; किम्: क्या; प्रभाषेत: बोलता है; किम्: कैसे; आसीत: बैठता है; व्रजेत: चलता है; किम्: कैसे।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्जुन बोले: हे केशव! समाधि में स्थित स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धि) पुरुष की क्या पहचान है? वह स्थिरबुद्धि कैसे बोलता है, कैसे बैठता है, कैसे चलता है?

English Translation

Arjuna said: O Keshava, what is the description of one who has steady wisdom and is established in samadhi? How does one of steady mind speak, how does he sit, how does he walk?

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अब स्थितप्रज्ञ के लक्षण जानना चाहते हैं – ऐसा व्यक्ति कैसा व्यवहार करता है? यह प्रश्न गीता के प्रसिद्ध वर्णन का आधार बनता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।