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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 53

अध्याय 2 · श्लोक 53

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला | समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि ||५३||

śruti-vipratipannā te yadā sthāsyati niścalā | samādhāv acalā buddhis tadā yogam avāpsyasi ||53||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

श्रुतिविप्रतिपन्ना: श्रुति (वेद) के विभिन्न प्रवचनों से भ्रमित; ते: तेरी; यदा: जब; स्थास्यति: स्थित होगी; निश्चला: निश्चल; समाधौ: समाधि में; अचला: अचल; बुद्धिः: बुद्धि; तदा: तब; योगम्: योग (समाधि); अवाप्स्यसि: प्राप्त करेगा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जब वेदों के विभिन्न प्रवचनों से भ्रमित तेरी बुद्धि समाधि में अचल होकर स्थित हो जाएगी, तब तू योग को प्राप्त कर लेगा।

English Translation

When your mind, confused by hearing various scriptures, becomes steady and fixed in samadhi, then you will attain yoga.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

शास्त्रों के अनेक मतों से भ्रमित बुद्धि जब समाधि में स्थिर हो जाती है, तभी सच्चा योग (आत्मसाक्षात्कार) प्राप्त होता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।