सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 52
श्लोक ५२ में बताया गया है कि मोह से पार होने पर व्यक्ति शास्त्रों के प्रति भी उदासीन हो जाता है।
संस्कृत श्लोक
यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति | तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ||५२||
yadā te moha-kalilaṃ buddhir vyatitariṣyati | tadā gantāsi nirvedaṃ śrotavyasya śrutasya ca ||52||
पदच्छेद / शब्दार्थ
यदा: जब; ते: तेरी; मोहकलिलम्: मोहरूपी कीचड़ को; बुद्धिः: बुद्धि; व्यतितरिष्यति: पार कर जाएगी; तदा: तब; गन्तासि: प्राप्त होगा; निर्वेदम्: वैराग्य; श्रोतव्यस्य: सुनने योग्य (भविष्य) का; श्रुतस्य: सुने हुए (भूत) का; च: और।
हिंदी अनुवाद
जब तेरी बुद्धि मोहरूपी कीचड़ को पार कर जाएगी, तब तू श्रोतव्य (सुनने योग्य) और श्रुत (सुने हुए) के प्रति वैराग्य को प्राप्त हो जाएगा।
English Translation
When your intellect crosses the turbid waters of delusion, you will attain to indifference to what has been heard and what is yet to be heard.
टीका / Commentary
ज्ञान प्राप्त होने पर व्यक्ति को न तो सुने हुए (वेदादि शास्त्रों) से मोह रहता है, न ही सुनने योग्य (भविष्य के उपदेशों) से। वह सबसे ऊपर उठ जाता है।