आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 52

अध्याय 2 · श्लोक 52

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति | तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ||५२||

yadā te moha-kalilaṃ buddhir vyatitariṣyati | tadā gantāsi nirvedaṃ śrotavyasya śrutasya ca ||52||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यदा: जब; ते: तेरी; मोहकलिलम्: मोहरूपी कीचड़ को; बुद्धिः: बुद्धि; व्यतितरिष्यति: पार कर जाएगी; तदा: तब; गन्तासि: प्राप्त होगा; निर्वेदम्: वैराग्य; श्रोतव्यस्य: सुनने योग्य (भविष्य) का; श्रुतस्य: सुने हुए (भूत) का; च: और।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जब तेरी बुद्धि मोहरूपी कीचड़ को पार कर जाएगी, तब तू श्रोतव्य (सुनने योग्य) और श्रुत (सुने हुए) के प्रति वैराग्य को प्राप्त हो जाएगा।

English Translation

When your intellect crosses the turbid waters of delusion, you will attain to indifference to what has been heard and what is yet to be heard.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

ज्ञान प्राप्त होने पर व्यक्ति को न तो सुने हुए (वेदादि शास्त्रों) से मोह रहता है, न ही सुनने योग्य (भविष्य के उपदेशों) से। वह सबसे ऊपर उठ जाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।