आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 38

अध्याय 2 · श्लोक 38

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ | ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ||३८||

sukha-duḥkhe same kṛtvā lābhālābhau jayājayau | tato yuddhāya yujyasva naivaṃ pāpam avāpsyasi ||38||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सुखदुःखे: सुख और दुःख; समे: समान; कृत्वा: करके; लाभालाभौ: लाभ-हानि; जयाजयौ: जय-पराजय; ततः: तब; युद्धाय: युद्ध के लिए; युज्यस्व: तैयार हो; न: नहीं; एवम्: इस प्रकार; पापम्: पाप; अवाप्स्यसि: प्राप्त होगा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजय को समान समझकर तू युद्ध के लिए तैयार हो। इस प्रकार (युद्ध करने से) तू पाप को प्राप्त नहीं होगा।

English Translation

Treating pleasure and pain, gain and loss, victory and defeat alike, engage in battle for the sake of battle. Thus you will not incur sin.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक कर्मयोग का सार है – फल की चिन्ता न करके, समभाव से कर्तव्य करो। इससे पाप नहीं लगता।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।