सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 39

श्लोक ३९ में कृष्ण कहते हैं कि सांख्ययोग (ज्ञान) तो बता दिया, अब कर्मयोग सुनो जिससे कर्मबन्धन मुक्त हो जाओगे।

संस्कृत श्लोक

एषा तेऽभिहिता सांख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु | बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि ||३९||

eṣā te 'bhihitā sāṅkhye buddhir yoge tv imāṃ śṛṇu | buddhyā yukto yayā pārtha karma-bandhaṃ prahāsyasi ||39||

पदच्छेद / शब्दार्थ

एषा: यह; ते: तुझसे; अभिहिता: कही गई; सांख्ये: सांख्ययोग में; बुद्धिः: बुद्धि; योगे: कर्मयोग में; तु: परन्तु; इमाम्: इस; शृणु: सुन; बुद्ध्या: बुद्धि से; युक्तः: युक्त; यया: जिससे; पार्थ: हे पार्थ; कर्मबन्धम्: कर्मों के बन्धन को; प्रहास्यसि: त्याग दोगे।

हिंदी अनुवाद

तेरे लिए यह सांख्ययोग की बुद्धि कही गई। अब कर्मयोग की बुद्धि सुन, जिससे युक्त होकर तू कर्मों के बन्धन को त्याग देगा।

English Translation

This wisdom (of Sankhya) has been imparted to you. Now listen to the wisdom of Yoga, endowed with which you will cast off the bondage of action, O Partha.

टीका / Commentary

कृष्ण अब दूसरा मार्ग – कर्मयोग – बताने जा रहे हैं। सांख्ययोग (ज्ञानयोग) से आत्मा का ज्ञान हुआ; अब कर्मयोग से बन्धन मुक्ति का उपाय बताते हैं।