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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 39

अध्याय 2 · श्लोक 39

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

एषा तेऽभिहिता सांख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु | बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि ||३९||

eṣā te 'bhihitā sāṅkhye buddhir yoge tv imāṃ śṛṇu | buddhyā yukto yayā pārtha karma-bandhaṃ prahāsyasi ||39||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

एषा: यह; ते: तुझसे; अभिहिता: कही गई; सांख्ये: सांख्ययोग में; बुद्धिः: बुद्धि; योगे: कर्मयोग में; तु: परन्तु; इमाम्: इस; शृणु: सुन; बुद्ध्या: बुद्धि से; युक्तः: युक्त; यया: जिससे; पार्थ: हे पार्थ; कर्मबन्धम्: कर्मों के बन्धन को; प्रहास्यसि: त्याग दोगे।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तेरे लिए यह सांख्ययोग की बुद्धि कही गई। अब कर्मयोग की बुद्धि सुन, जिससे युक्त होकर तू कर्मों के बन्धन को त्याग देगा।

English Translation

This wisdom (of Sankhya) has been imparted to you. Now listen to the wisdom of Yoga, endowed with which you will cast off the bondage of action, O Partha.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

कृष्ण अब दूसरा मार्ग – कर्मयोग – बताने जा रहे हैं। सांख्ययोग (ज्ञानयोग) से आत्मा का ज्ञान हुआ; अब कर्मयोग से बन्धन मुक्ति का उपाय बताते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।