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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 37

अध्याय 2 · श्लोक 37

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् | तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः ||३७||

hato vā prāpsyasi svargaṃ jitvā vā bhokṣyase mahīm | tasmād uttiṣṭha kaunteya yuddhāya kṛta-niścayaḥ ||37||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

हतः: मारा गया; वा: या; प्राप्स्यसि: प्राप्त करेगा; स्वर्गम्: स्वर्ग; जित्वा: जीतकर; वा: या; भोक्ष्यसे: भोगेगा; महीम्: पृथ्वी; तस्मात्: इसलिए; उत्तिष्ठ: खड़ा हो; कौन्तेय: हे कुन्तीपुत्र; युद्धाय: युद्ध के लिए; कृतनिश्चयः: निश्चय करके।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मारे जाने पर तू स्वर्ग को प्राप्त करेगा और जीतने पर पृथ्वी का राज्य भोगेगा। इसलिए हे कुन्तीपुत्र! निश्चय करके युद्ध के लिए खड़ा हो जा।

English Translation

If slain, you will attain heaven; if victorious, you will enjoy the earth. Therefore, arise, O son of Kunti, with determination for battle.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

परिणाम चाहे जो हो, अर्जुन के लिए लाभ ही लाभ है – युद्ध में मरने पर स्वर्ग, जीतने पर पृथ्वी। अतः निश्चय करके युद्ध करो।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।