आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 51

अध्याय 2 · श्लोक 51

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः | जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम् ||५१||

karma-jaṃ buddhi-yuktā hi phalaṃ tyaktvā manīṣiṇaḥ | janma-bandha-vinirmuktāḥ padaṃ gacchanty anāmayam ||51||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

कर्मजम्: कर्मों से उत्पन्न; बुद्धियुक्ताः: समबुद्धि से युक्त; हि: निश्चय ही; फलम्: फल को; त्यक्त्वा: त्यागकर; मनीषिणः: बुद्धिमान; जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः: जन्म-बन्धन से मुक्त; पदम्: पद (गति) को; गच्छन्ति: जाते हैं; अनामयम्: रोगरहित (निर्विकार)।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

समबुद्धि से युक्त बुद्धिमान पुरुष कर्मजन्य फल को त्यागकर जन्म-बन्धन से मुक्त होकर उस रोगरहित (निर्विकार) पद को प्राप्त होते हैं।

English Translation

The wise, endowed with equanimity, renounce the fruits of their actions and, freed from the bondage of birth, attain the state which is beyond all evil.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

निष्काम कर्म करने वाले जन्म-मृत्यु के बन्धन से मुक्त होकर परमपद (मोक्ष) को प्राप्त होते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।