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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16 · श्लोक 13

अध्याय 16 · श्लोक 13

दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् | इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् || १३||

idam adya mayā labdham imaṃ prāpsye manoratham | idam astīdam api me bhaviṣyati punar dhanam ||13||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

इदम्: यह; अद्य: आज; मया: मेरे द्वारा; लब्धम्: प्राप्त किया; इमम्: यह; प्राप्स्ये: प्राप्त करूँगा; मनोरथम्: मनोरथ; इदम्: यह; अस्ति: है; इदम्: यह; अपि: भी; मे: मेरा; भविष्यति: होगा; पुन: फिर; धनम्: धन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मैंने आज यह प्राप्त कर लिया, अब उस मनोरथ को प्राप्त करूँगा। यह धन मेरे पास है, और यह भी मुझे भविष्य में मिलेगा।

English Translation

I have gained this today, and I shall obtain that desired object. I have this wealth, and that also will be mine in future.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक आसुरी व्यक्ति की सोच को दर्शाता है। वह सोचता है कि उसने आज यह पाया, कल वह पाएगा। वह अपने वर्तमान और भविष्य के धन पर अहंकार करता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।