दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) – श्लोक 13
श्लोक १३ में आसुरी व्यक्ति की सोच: आज यह मिला, कल वह मिलेगा, यह धन है और वह भी मेरा होगा।
संस्कृत श्लोक
इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् | इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् || १३||
idam adya mayā labdham imaṃ prāpsye manoratham | idam astīdam api me bhaviṣyati punar dhanam ||13||
पदच्छेद / शब्दार्थ
इदम्: यह; अद्य: आज; मया: मेरे द्वारा; लब्धम्: प्राप्त किया; इमम्: यह; प्राप्स्ये: प्राप्त करूँगा; मनोरथम्: मनोरथ; इदम्: यह; अस्ति: है; इदम्: यह; अपि: भी; मे: मेरा; भविष्यति: होगा; पुन: फिर; धनम्: धन।
हिंदी अनुवाद
मैंने आज यह प्राप्त कर लिया, अब उस मनोरथ को प्राप्त करूँगा। यह धन मेरे पास है, और यह भी मुझे भविष्य में मिलेगा।
English Translation
I have gained this today, and I shall obtain that desired object. I have this wealth, and that also will be mine in future.
टीका / Commentary
यह श्लोक आसुरी व्यक्ति की सोच को दर्शाता है। वह सोचता है कि उसने आज यह पाया, कल वह पाएगा। वह अपने वर्तमान और भविष्य के धन पर अहंकार करता है।