🙏 जिनके सीने विराजे सीताराम जी, उनको कहते है वीर हनुमान जी

(Jinke Seene Viraje Sitaram Ji, Unko Kehte Hain Veer Hanuman Ji) – Hanuman Bhajan

गायक: पंडित सुधीर व्यास जी | रचना: मनोज कन्हे ‘शिवांश’

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: पंडित सुधीर व्यास जी
✍️ लेखक: मनोज कन्हे ‘शिवांश’
🏷️ श्रेणी: हनुमान भजन / राम भक्ति
🎵 तर्ज़: मनिहारी का भेष बनाया
📍 भाव: भक्ति, शक्ति, समर्पण

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

जिनके सीने विराजे सीताराम जी,
उनको कहते है वीर हनुमान जी।

सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम,
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम।

(तर्ज – मनिहारी का भेष बनाया)

॥ अंतरा १ ॥

राम सुमिरन करे राम चिंतन करे,
राम चरणों में ही नित्य वंदन करें,
राम चर्चा में जिनका है ध्यान जी,
उनको कहते है वीर हनुमान जी।

॥ अंतरा २ ॥

जिनकी महिमा बड़ी जिनकी भक्ति बड़ी,
जिनका बजता है डंका जिनकी शक्ति बड़ी,
जो जग में बड़े बलवान जी,
उनको कहते है वीर हनुमान जी।

॥ अंतरा ३ ॥

भूत आए नहीं बाधा आए नहीं,
जो है तेरी शरण कष्ट पाए नहीं,
जिनके सोटे से कांपे आसमान जी,
उनको कहते है वीर हनुमान जी।

॥ अंतरा ४ ॥

नाचे छमछम मगन लागी रघुवर लगन,
जिनका सिंदूरी चोला जिनका सिंदूरी तन,
जिनको रघुवर की है बड़ी आन जी,
उनको कहते है वीर हनुमान जी।

जिनके सीने विराजे सीताराम जी,
उनको कहते है वीर हनुमान जी।

सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम,
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम।

🎤 गायक :- पंडित सुधीर व्यास जी

✍️ रचनाकार :- मनोज कन्हे ‘शिवांश’

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन हनुमान जी की अद्वितीय भक्ति और शक्ति का गुणगान करता है। “जिनके सीने विराजे सीताराम जी” – अर्थात जिनके हृदय में सदा सीता-राम विराजमान रहते हैं, उन्हीं को वीर हनुमान कहा जाता है। यह पंक्ति हनुमान जी की रामभक्ति के सर्वोच्च स्वरूप को दर्शाती है।

भजन में हनुमान जी के गुणों का वर्णन है – वे सदा राम सुमिरन और राम चिंतन में लीन रहते हैं, उनकी महिमा और भक्ति अपरंपार है, उनका डंका (प्रभाव) चारों ओर बजता है। वे जगत में सबसे बलवान हैं, उनके सोटे (गदा) के आगे आसमान भी कांपता है।

भजन में यह भी कहा गया है कि जो हनुमान जी की शरण में आते हैं, उन्हें भूत-प्रेत, बाधा या कोई कष्ट नहीं सताता। हनुमान जी सिंदूरी चोला धारण करते हैं और रघुवर (राम) की लगन में नाचते हैं। यह भजन हनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा और उनके चरित्र की महिमा को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

तर्ज़ – “मनिहारी का भेष बनाया”: यह भजन प्रसिद्ध तर्ज़ पर गाया जाता है, जो इसे अधिक आकर्षक और भक्तिमय बनाता है। इसकी धुन श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देती है।

हनुमान जी की रामभक्ति का प्रतीक: “सीने में विराजे सीताराम” – यह पंक्ति बताती है कि हनुमान जी का हृदय राममय है। उनकी सारी शक्ति और साहस राम के प्रति समर्पण से उपजा है।

रक्षा और संकट निवारण: “भूत आए नहीं बाधा आए नहीं” – इस भजन के माध्यम से भक्त हनुमान जी से सुरक्षा और कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। यह भजन विशेषकर मंगलवार और शनिवार को गाने से लाभकारी माना जाता है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और समर्पण से असंभव भी संभव हो जाता है। जिनके हृदय में राम बसते हैं, वे स्वयं वीर बन जाते हैं।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हनुमान जी के उन स्वरूपों का गान है जो भक्तों के संकट हरते हैं, शक्ति प्रदान करते हैं और उन्हें राम-भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।

🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय श्री राम ।। जय बजरंग बली ।।

॥ इति श्री हनुमान भजनम् ॥
॥ राम सुमिरन करे राम चिंतन करे, राम चरणों में नित्य वंदन करें ॥