🙏 मंगल भवन अमंगल हारी – राम सियाराम

(Mangal Bhavan Amangal Haari – Ram Siya Ram Chaupai) – श्री राम भजन

🎤 गायक: लखबीर सिंह लक्खा जी | रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाइयाँ

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: लखबीर सिंह लक्खा जी
🏷️ श्रेणी: राम भजन / चौपाई / रामचरितमानस
🎶 भाव: श्रद्धा, भक्ति, आशीर्वाद
📀 विशेषता: तुलसीदास रचित रामचरितमानस की सुप्रसिद्ध चौपाइयाँ – “मंगल भवन अमंगल हारी” से प्रारम्भ, राम-सिया के नाम के साथ

📜 चौपाई लिरिक्स (हिन्दी में)

मंगल भवन अमंगल हारी,
द्रबहुसु दसरथ अजर बिहारी।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

होइ है वही जो राम रच राखा,
को करे तर्क बढ़ाए साखा।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू,
सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

धीरज धरम मित्र अरु नारी,
आपद काल परखिये चारी।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

जाकी रही भावना जैसी,
प्रभु मूरति देखी तिन तैसी,
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

रघुकुल रीत सदा चली आई,
प्राण जाए पर वचन न जाई।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता
कहहि सुनहि बहुविधि सब संता।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम,
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

🎤 गायक : लखबीर सिंह लक्खा जी

📖 मूल रचना: श्री गोस्वामी तुलसीदास जी (रामचरितमानस)

🙏 चौपाइयों का अर्थ और महत्व

यह चौपाइयाँ श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड से ली गई हैं। “मंगल भवन अमंगल हारी” – जो मंगल के भवन हैं और अमंगल को हरने वाले हैं। “द्रबहुसु दसरथ अजर बिहारी” – वे दशरथ के कुल को अजर (अमर) बिहारी (विहार करने वाले) हैं।

दूसरी चौपाई – “होइ है वही जो राम रच राखा” – वही होता है जो राम की रचना में है (जो प्रभु की इच्छा है), कोई तर्क या शाखा बढ़ाने से कुछ नहीं होता।

तीसरी – जिसका जिस पर सच्चा प्रेम है, वह उसे मिलता है – इसमें कोई संदेह नहीं।

चौथी – चार चीजें आपदकाल में परखी जाती हैं – धैर्य, धर्म, मित्र और नारी।

पाँचवीं – जैसी भक्त की भावना होती है, वैसा ही प्रभु का रूप उसे दिखता है।

छठी – रघुकुल की रीत है – प्राण जाए पर वचन न जाए (वचन की रक्षा करना प्राणों से भी बढ़कर)।

सातवीं – हरि अनंत हैं, उनकी कथा भी अनंत है; संत उन्हें बहुत प्रकार से कहते और सुनते हैं।

इन चौपाइयों के बीच-बीच में “राम सियाराम सियाराम, जय जय राम” का जयघोष किया गया है, जो राम-सीता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है।

🔍 चौपाई का विशेष महत्त्व

“मंगल भवन अमंगल हारी” – सर्वाधिक लोकप्रिय चौपाई: यह चौपाई रामचरितमानस की सबसे प्रसिद्ध चौपाइयों में से एक है, जिसे प्रायः प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है।

राम सियाराम का जप: चौपाइयों के बीच “राम सियाराम” का उच्चारण करने से मन को शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।

लखबीर सिंह लक्खा का स्वर: लक्खा जी के भावपूर्ण स्वर में यह चौपाई और भी मन को छू लेने वाली बन गई है।

💖 राम भक्ति का सार

🎯 संदेश

राम ही मंगल के सच्चे भवन हैं और सब अमंगल को हरने वाले हैं। उनकी कृपा से सब कुछ संभव है। “राम सियाराम” का जप करते रहने से जीवन में सुख-शांति आती है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह चौपाई लाखों राम भक्तों के हृदय में बसी हुई है। लखबीर सिंह लक्खा के स्वर में यह और भी जीवंत हो उठती है।

🙏 जय श्री राम ।। जय सीया राम ।। मंगल भवन अमंगल हारी ।।

॥ इति रामचरितमानस चौपाई भजनम् ॥
॥ मंगल भवन अमंगल हारी – राम सियाराम सियाराम, जय जय राम ॥