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मंगल भवन अमंगल हारी चौपाई (राम सियाराम) लिरिक्स | Mangal Bhavan Amangal Haari Chaupai Ram Siya Ram Lyrics

532 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 मंगल भवन अमंगल हारी – राम सियाराम

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

(Mangal Bhavan Amangal Haari – Ram Siya Ram Chaupai) – श्री राम भजन

🎤 गायक: लखबीर सिंह लक्खा जी | रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाइयाँ

विवरण एवं मुख्य बिंदु

🎤 गायक:लखबीर सिंह लक्खा जी
🏷️ श्रेणी:राम भजन / चौपाई / रामचरितमानस
🎶 भाव:श्रद्धा, भक्ति, आशीर्वाद
📀 विशेषता:तुलसीदास रचित रामचरितमानस की सुप्रसिद्ध चौपाइयाँ – “मंगल भवन अमंगल हारी” से प्रारम्भ, राम-सिया के नाम के साथ

📜 चौपाई लिरिक्स (हिन्दी में)

मंगल भवन अमंगल हारी,
द्रबहुसु दसरथ अजर बिहारी।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

होइ है वही जो राम रच राखा,
को करे तर्क बढ़ाए साखा।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू,
सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

धीरज धरम मित्र अरु नारी,
आपद काल परखिये चारी।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

जाकी रही भावना जैसी,
प्रभु मूरति देखी तिन तैसी,
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

रघुकुल रीत सदा चली आई,
प्राण जाए पर वचन न जाई।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता
कहहि सुनहि बहुविधि सब संता।
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम,
राम सियाराम सियाराम,
जय जय राम।।

🎤 गायक : लखबीर सिंह लक्खा जी

📖 मूल रचना: श्री गोस्वामी तुलसीदास जी (रामचरितमानस)

🙏 चौपाइयों का अर्थ और महत्व

यह चौपाइयाँ श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड से ली गई हैं। “मंगल भवन अमंगल हारी” – जो मंगल के भवन हैं और अमंगल को हरने वाले हैं। “द्रबहुसु दसरथ अजर बिहारी” – वे दशरथ के कुल को अजर (अमर) बिहारी (विहार करने वाले) हैं।

दूसरी चौपाई – “होइ है वही जो राम रच राखा” – वही होता है जो राम की रचना में है (जो प्रभु की इच्छा है), कोई तर्क या शाखा बढ़ाने से कुछ नहीं होता।

तीसरी – जिसका जिस पर सच्चा प्रेम है, वह उसे मिलता है – इसमें कोई संदेह नहीं।

चौथी – चार चीजें आपदकाल में परखी जाती हैं – धैर्य, धर्म, मित्र और नारी।

पाँचवीं – जैसी भक्त की भावना होती है, वैसा ही प्रभु का रूप उसे दिखता है।

छठी – रघुकुल की रीत है – प्राण जाए पर वचन न जाए (वचन की रक्षा करना प्राणों से भी बढ़कर)।

सातवीं – हरि अनंत हैं, उनकी कथा भी अनंत है; संत उन्हें बहुत प्रकार से कहते और सुनते हैं।

इन चौपाइयों के बीच-बीच में “राम सियाराम सियाराम, जय जय राम” का जयघोष किया गया है, जो राम-सीता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है।

🔍 चौपाई का विशेष महत्त्व

“मंगल भवन अमंगल हारी” – सर्वाधिक लोकप्रिय चौपाई: यह चौपाई रामचरितमानस की सबसे प्रसिद्ध चौपाइयों में से एक है, जिसे प्रायः प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है।

राम सियाराम का जप: चौपाइयों के बीच “राम सियाराम” का उच्चारण करने से मन को शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।

लखबीर सिंह लक्खा का स्वर: लक्खा जी के भावपूर्ण स्वर में यह चौपाई और भी मन को छू लेने वाली बन गई है।

💖 राम भक्ति का सार

🎯 संदेश

राम ही मंगल के सच्चे भवन हैं और सब अमंगल को हरने वाले हैं। उनकी कृपा से सब कुछ संभव है। “राम सियाराम” का जप करते रहने से जीवन में सुख-शांति आती है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह चौपाई लाखों राम भक्तों के हृदय में बसी हुई है। लखबीर सिंह लक्खा के स्वर में यह और भी जीवंत हो उठती है।

🙏 जय श्री राम ।। जय सीया राम ।। मंगल भवन अमंगल हारी ।।

॥ इति रामचरितमानस चौपाई भजनम् ॥
॥ मंगल भवन अमंगल हारी – राम सियाराम सियाराम, जय जय राम ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "मंगल भवन अमंगल हारी चौपाई (राम सियाराम) लिरिक्स | Mangal Bhavan Amangal Haari Chaupai Ram Siya Ram Lyrics" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ and अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

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