🙏 ये चमक, ये दमक, सब कुछ सरकार तुम्हई से है
(Ye Chamak, Ye Damak – Sab Kuch Sarkar Tumhain Se Hai) – राम भजन
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
ये चमक, ये दमक, फूलवन मा महक,
सब कुछ सरकार, तुम्हई से है।
इठला के पवन चूमे सैयाँ के चरण,
बगियन मा बहार तुम्हई से है॥
तू है मोरा साजन, मैं हूँ तोरी,
अब लाज बलम रखियो मोरी।
चाहे इत जाऊँ, चाहे उत जाऊँ,
मेरे दिल को प्यार तुम्हई से है,
सब कुछ सरकार, तुम्हई से है॥
॥ अंतरा १ – थाम तोरी बहियाँ ॥
कहे जोगन, थाम तोरी बहियाँ,
तुम जानत हो सब कुछ सैयाँ।
तोरी प्रीत में रँग ये धाग लिया,
ये बनाव-श्रृंगार तुम्हई से है,
सब कुछ सरकार, तुम्हई से है॥
॥ अंतरा २ – प्रीत में रोवत नैना ॥
मैं तो भूल गई कुछ भी कहना,
तोरी प्रीत में रोवत हैं नैना।
रग-रग में बसी है प्रीत तोरी,
अँखियन मा खुमार तुम्हई से है,
सब कुछ सरकार, तुम्हई से है॥
॥ अंतरा ३ – दिल, जान, तन, मन सब अर्पण ॥
मेरा दिल ले लो, मेरी जान ले लो,
मेरा तन ले लो, मेरा मन ले लो।
मेरे इश्क़ को निस्बत है तुमसे,
मेरा हार-श्रृंगार तुम्हई से है,
सब कुछ सरकार, तुम्हई से है॥
ये चमक, ये दमक, फूलवन मा महक,
सब कुछ सरकार, तुम्हई से है।
इठला के पवन चूमे सैयाँ के चरण,
बगियन मा बहार तुम्हई से है,
सब कुछ सरकार, तुम्हई से है॥
🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / माधुर्य भक्ति गीत
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह राम भजन माधुर्य भक्ति परम्परा का सुंदर उदाहरण है, जहाँ भक्त राम को अपने प्रियतम (साजन, सैयाँ, सरकार) के रूप में संबोधित करता है। “ये चमक, ये दमक, फूलवन मा महक, सब कुछ सरकार, तुम्हई से है” – भक्त कहता है कि सृष्टि की सारी चमक, महक, बहार – सब कुछ सरकार (राम) की कृपा से ही है। “इठला के पवन चूमे सैयाँ के चरण” – हवा भी इठलाकर राम के चरण चूमती है।
भक्त कहता है – “तू है मोरा साजन, मैं हूँ तोरी” – तुम मेरे साजन हो, मैं तुम्हारी हूँ। वह प्रार्थना करती है – “अब लाज बलम रखियो मोरी” – हे बलम (प्रियतम), मेरी लाज रखना। चाहे जिधर भी जाऊँ, मेरे दिल को प्यार तुमसे ही है।
पहले अंतरे में “कहे जोगन” – साध्वी स्वरूप में कहती है – तुम मेरी बाँह थामो, तुम सब कुछ जानते हो। तुम्हारी प्रीत में मैंने रंग लिया (सज-धज ली), यह सब श्रृंगार तुमसे ही है।
दूसरे अंतरे में – प्रेम में नैन रोते हैं, रग-रग में तुम्हारी प्रीत बसी है, आँखों में यह खुमार (नशा) तुमसे ही है।
तीसरे अंतरे में पूर्ण समर्पण – मेरा दिल, जान, तन, मन सब ले लो। मेरे प्रेम (इश्क) का संबंध तुमसे है, मेरा हार-श्रृंगार तुमसे ही है।
यह भजन सिखाता है कि राम के प्रति सच्ची भक्ति में प्रेम, श्रृंगार और समर्पण का भाव अद्वितीय है। यह राम को केवल देवता के रूप में नहीं, बल्कि प्रियतम के रूप में भी अनुभव करने का मार्ग है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
माधुर्य भक्ति का रस: यह भजन राम भक्ति के माधुर्य रस का सशक्त उदाहरण है। यह राम को प्रेमी के रूप में संबोधित करता है, जो कृष्ण भक्ति की तर्ज पर है पर राम के लिए भी यह भाव प्रचलित है।
प्रकृति से जुड़ाव: “चमक, दमक, महक, बहार, पवन” – इन शब्दों के माध्यम से भक्त सृष्टि की सुंदरता को राम की कृपा का परिणाम बताता है।
पूर्ण समर्पण: “दिल, जान, तन, मन ले लो” – यह अष्टांग योग में “प्रणिधान” (सब कुछ ईश्वर को अर्पण कर देने) के भाव को दर्शाता है।
💖 माधुर्य भक्ति का संगम
🎯 संदेश
राम केवल राजा या देवता नहीं, वे हमारे सच्चे साजन, सैयाँ और सरकार हैं। उनके प्रति प्रेम का रस ही जीवन की सारी सुंदरता और समृद्धि का स्रोत है।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन राम भक्तों को यह अहसास कराता है कि भक्ति में श्रृंगार, प्रेम और सौंदर्य का भी उतना ही महत्व है जितना शास्त्रीय साधना का। माधुर्य भक्ति में डूबकर राम का साक्षात्कार किया जा सकता है।
🙏 जय श्री राम ।। राम सैयाँ की जय ।। सब कुछ सरकार तुम्हई से है ।।