प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 हमारे साथ श्री रघुनाथ तो, किस बात की चिंता
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।
(Hamare Saath Shri Raghunath To – Kis Baat Ki Chinta) – राम भजन
विवरण एवं मुख्य बिंदु
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
हमारे साथ श्री रघुनाथ तो,
किस बात की चिंता,
शरण में रख दिया जब माथ तो,
किस बात की चिंता ॥
॥ अंतरा १ – स्वामी को हर बात की चिंता ॥
किया करते हो तुम दिन रात क्यों,
बिन बात की चिंता..
तेरे स्वामी, तेरे स्वामी
तेरे स्वामी को रहती है,
तेरी हर बात की चिंता..
हमारे साथ श्री रघुनाथ तो,
किस बात की चिंता ॥
॥ अंतरा २ – हर स्वाँस पर राम नाम की चिंता ॥
ना खाने की ना पीने की,
ना मरने की ना जीने की..
रहे हर स्वाँस, रहे हर स्वाँस
रहे हर स्वाँस पर भगवान के,
प्रिय नाम की चिंता..
हमारे साथ श्री रघुनाथ तो,
किस बात की चिंता ॥
॥ अंतरा ३ – विभीषण को अभय वर ॥
विभीषण को अभय वर दे किया,
लंकेश पल भर में..
उन्ही का कर रहे गुणगान तो,
किस बात की चिंता..
हमारे साथ श्री रघुनाथ तो,
किस बात की चिंता ॥
॥ अंतरा ४ – ब्रजेश (प्रह्लाद?) पर कृपा – दास बनाया ॥
हुई ब्रजेश पर कृपा,
बनाया दास प्रभु अपना..
उन्ही के हाथ, उन्ही के हाथ
उन्ही के हाथ में अब हाथ तो,
किस बात की चिंता..
हमारे साथ श्री रघुनाथ तो,
किस बात की चिंता ॥
हमारे साथ श्री रघुनाथ तो,
किस बात की चिंता,
शरण में रख दिया जब माथ तो,
किस बात की चिंता ॥
🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / राम भक्ति काव्य
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत आश्वासन देने वाला राम भजन है। “हमारे साथ श्री रघुनाथ तो, किस बात की चिंता” – भक्त कहता है कि जब स्वयं रघुनाथ (श्री राम) हमारे साथ हैं, तो फिर किसी बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपना माथा (शीश) राम की शरण में रख दिया है, अब वे निश्चिंत हैं।
पहले अंतरे में कहा गया है कि तुम बिना बात की चिंता क्यों करते हो? तुम्हारे स्वामी (राम) को तुम्हारी हर बात की चिंता रहती है। अर्थात राम स्वयं अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं, फिर भक्त क्यों चिंता करे?
दूसरे अंतरे में – न खाने की चिंता, न पीने की, न मरने की, न जीने की। केवल एक ही चिंता रहे – हर सांस पर भगवान के प्रिय नाम (राम नाम) की चिंता, यानी राम नाम सदा स्मरण में रहे।
तीसरे अंतरे में विभीषण का उदाहरण – जिन्हें राम ने पल भर में लंकेश बना दिया (अभय वर देकर)। जब हम उन्हीं राम का गुणगान कर रहे हैं, तो किस बात की चिंता?
चौथे अंतरे में “ब्रजेश” (संभवतः प्रह्लाद या किसी भक्त) पर कृपा का उल्लेख – प्रभु ने उन्हें अपना दास बनाया। जब उनके हाथ में हमारा हाथ है, तो चिंता कैसी?
यह भजन राम भक्ति में पूर्ण विश्वास और समर्पण का संदेश देता है – जिसने सच्चे मन से राम को अपना सहारा बना लिया, उसे किसी भी बात की चिंता नहीं रहती।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
चिंता मुक्ति का सशक्त मंत्र: यह भजन उन सभी के लिए है जो जीवन में चिंता, भय या अवसाद से ग्रस्त हैं। यह आश्वासन देता है कि राम साथ हैं तो सब ठीक है।
शरणागति का भाव: “शरण में रख दिया जब माथ तो, किस बात की चिंता” – राम की शरण में जाने के बाद सारी चिंताएँ समाप्त हो जाती हैं।
विभीषण प्रसंग: विभीषण ने राम की शरण ली और रावण का वध होने पर वे लंकेश बने। यह उदाहरण बताता है कि राम की शरण में जाने वाले का कभी अहित नहीं होता।
💖 राम भक्ति का विश्वास
🎯 संदेश
जब प्रभु स्वयं हमारे साथ हैं और हमारी हर बात की चिंता करते हैं, तो हमें किसी भी बात की चिंता नहीं करनी चाहिए। बस एक ही चिंता हो – हर सांस में राम नाम का स्मरण।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन राम भक्तों को आत्मबल और निश्चिंतता प्रदान करता है। यह गीत मानसिक शांति और आध्यात्मिक सुरक्षा का अहसास कराता है।
🙏 जय श्री राम ।। श्री रघुनाथ की जय ।। हमारे साथ श्री रघुनाथ तो, किस बात की चिंता ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "हमारे साथ श्री रघुनाथ तो, किस बात की चिंता (राम भजन) लिरिक्स | Hamare Saath Shri Raghunath To Kis Baat Ki Chinta Ram Bhajan Lyrics" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?
भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ and अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?
हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।
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