प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 राजा दशरथ जी के घरवा – राम पहिरे फूलन को सेहरा
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।
(Raja Dashrath Ji Ke Gharwa – Ram Pahire Phoolan Ko Sehra) – अवधी लोकगीत
विवरण एवं मुख्य बिंदु
📜 लिरिक्स (अवधी-हिन्दी में)
॥ राम जन्मोत्सव ॥
राजा दशरथ जी के घरवा, आज जन्मे ललनवा,
जन्मे ललनवा री जन्मे ललनवा॥
रानी कौसल्या मन ही मन बिहसे,
जुग-जुग जीवे ललनवा, जन्मे ललनवा।
जन्मे ललनवा री जन्मे ललनवा,
राजा दशरथ जी के घरवा, आज जन्मे ललनवा॥
॥ सेहरा गीत – सीता स्वयंवर ॥
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
रघुवर पहिरे फूलन को सेहरा,
रघुवर पहिरे॥
राजा जनक ने प्रण ठानी है,
प्रण ठानी है गुइयाँ, प्रण ठानी है।
रख दियो धनुष, उठाए दियो झगड़ा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे॥
राजा दशरथ के चार पुत्र हैं,
चार पुत्र हैं जी, चार पुत्र हैं।
तोड़ दियो धनुष, मिटाए दियो झगड़ा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे॥
लखते दिल, लखते जिगर, नूर-ए-नज़र का सेहरा,
कैसा लगता है मेरे लाल, ओ गौहर का सेहरा॥
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे फूलन को सेहरा,
राम पहिरे॥
सुहाग बरसे बन्नी तोरे आँगनवा,
माई के आँगन सुहाग बन्नी माँगे,
सुहाग बन्नी माँगे, सुहाग बन्नी माँगे,
अमर करे राम बन्नी तोरे सिंदूरवा॥
🎵 लोकगीत : अवधी परम्परा से संकलित
🙏 गीत का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत लोकप्रिय अवधी लोकगीत राम जन्म के आनन्द और सीता स्वयंवर के उत्सव को एक साथ प्रस्तुत करता है। “राजा दशरथ जी के घरवा, आज जन्मे ललनवा” – यह पंक्ति अयोध्या में राम के जन्म की खुशी का वर्णन करती है। रानी कौसल्या का मन-ही-मन हर्षित होना और “जुग-जुग जीवे ललनवा” कहकर माता का आशीर्वाद दर्शाया गया है।
“राम पहिरे फूलन को सेहरा” – यह भाग राम के सीता स्वयंवर के अवसर पर वर रूप में सजने-संवरने का वर्णन है। सेहरा विवाह में दूल्हे द्वारा पहना जाने वाला फूलों का मुकुट होता है। लोकगीत में राजा जनक द्वारा धनुष तोड़ने की प्रतिज्ञा, धनुष उठाकर झगड़ा मोल लेने और अंत में राम द्वारा धनुष तोड़कर झगड़ा मिटाने का उल्लेख है।
“लखते दिल, लखते जिगर, नूर-ए-नज़र का सेहरा” – यह पंक्तियाँ राम के सेहरे की सुंदरता का वर्णन करती हैं। अंत में “सुहाग बरसे बन्नी तोरे आँगनवा” – सीता के सुहाग (विवाह) की बधाई और आशीर्वाद दिया गया है कि राम उनके सिंदूर को अमर करें।
🔍 गीत का विशेष महत्त्व
अवधी लोक संस्कृति की धरोहर: यह गीत अवध क्षेत्र की समृद्ध लोक परम्परा का प्रतीक है। रामनवमी, विवाह, और अन्य शुभ अवसरों पर महिलाएँ इसे सामूहिक रूप से गाती हैं।
राम जन्म और विवाह का संगम: आमतौर पर यह गीत दो अलग-अलग लोकगीतों के रूप में प्रचलित है, पर यहाँ दोनों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है – पहले राम के जन्म का आनन्द, फिर सीता स्वयंवर में राम के वर रूप का वर्णन।
सांस्कृतिक महत्व: “सेहरा” विवाह संस्कार का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह गीत दूल्हे-दुल्हन को आशीर्वाद देने की परम्परा को भी दर्शाता है।
💖 लोकगीत का सांस्कृतिक महत्व
🎯 संदेश
यह गीत राम के जन्म और विवाह के उत्सव को आम जनता की भाषा में प्रस्तुत करता है। यह दर्शाता है कि राम केवल पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य और लोक जीवन के अभिन्न अंग हैं।
✨ आस्था का प्रतीक
अवधी लोकगीतों में रामकथा का जीवंत रूप देखने को मिलता है। यह गीत सामूहिक रूप से गाने से भक्ति में आनंद और उल्लास का संचार होता है।
🙏 जय श्री राम ।। जय सीया राम ।। राम जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "राजा दशरथ जी के घरवा / राम पहिरे फूलन को सेहरा (अवधी लोकगीत) लिरिक्स | Raja Dashrath Ji Ke Gharwa Ram Pahire Phoolan Ko Sehra Lyrics" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?
भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ and अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?
हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।
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