🙏 अवध की धूल चंदन है – अयोध्या भजन

(Awadh Ki Dhool Chandan Hai) – Ayodhya Bhajan

अवध की धूल चंदन है, यह तुलसीदास कहते हैं ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: राम भजन, अयोध्या भजन
📍 स्थान: अयोध्या

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ प्रस्तावना ॥

एक अयोध्या धाम।
कोटि तीर्थ से पावन वह रज,
जहाँ हुए हैं राम,
जहाँ हुए हैं राम॥

॥ स्थायी ॥

अवध की धूल चंदन है
यह तुलसीदास कहते हैं,
अवध की धूल चंदन है
यह तुलसीदास कहते हैं।
वहीं हमको भी रहना है,
वहीं हमको भी रहना है,
जहाँ श्रीराम रहते हैं,
हमारे राम रहते हैं।
अवध की धूल चंदन है
यह तुलसीदास कहते हैं॥

॥ अंतरा १ ॥

अवधपुरी का महिमा-मंडन
कहाँ हमारे बस का,
हाँ, अवधपुरी का महिमा-मंडन
कहाँ हमारे बस का।
इस नगरी का कण-कण साक्षी
रामचरितमानस का।
यहीं हनुमान ने सीना चीर दिखाई
राघव की तस्वीर,
भरत जी यहीं खड़ाऊँ
चूमके रोए।
ये तो है चौपाई से घाट
गवैए गाएँ इनके ठाट,
यहीं तो पाँव हमारे राम ने धोए।
ये सरयू माँ है इनके जल में
आशीर्वाद बहते हैं,
शुभ आशीर्वाद बहते हैं।
वहीं हमको भी रहना है,
जहाँ श्रीराम रहते हैं॥

॥ अंतरा २ ॥

नगर धरा पर अनगिन होंई,
अवधपुरी सब प्रिय नहीं कोई,
दक्षिण में है वन मनभावन,
उत्तर में वह सरयू पावन।
हर घर मंदिर राम-लला का,
हर पग जैसे राम शरा का,
अधिकारी शत-शत वंदन की
जन्मभूमि यह रघुनंदन की।
ये वह नगरी है, जिस नगरी में
चारों धाम रहते हैं,
हाँ, चारों धाम रहते हैं।
अवध की धूल चंदन है
यह तुलसीदास कहते हैं॥

वहीं हमको भी रहना है,
जहाँ श्रीराम रहते हैं,
हमारे राम रहते हैं।
वहीं हमको भी रहना है,
जहाँ श्रीराम रहते हैं,
हमारे राम रहते हैं,
जहाँ श्रीराम रहते हैं,
हमारे राम रहते हैं॥

🎵 अयोध्या भजन | राम भक्ति गीत

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन अयोध्या की महिमा और पवित्रता का गुणगान करता है। "अवध की धूल चंदन है, यह तुलसीदास कहते हैं" – अयोध्या की धूल (मिट्टी) ही चंदन के समान पवित्र है, यह बात स्वयं तुलसीदास जी कहते हैं। भक्त कहता है कि वहीं रहना चाहता है जहाँ श्रीराम रहते हैं।

"अवधपुरी का महिमा-मंडन कहाँ हमारे बस का" – अयोध्या की महिमा का वर्णन हमारे वश की बात नहीं है। इस नगरी का कण-कण रामचरितमानस का साक्षी है।

भजन में अयोध्या की लीलाओं का स्मरण है – "यहीं हनुमान ने सीना चीर दिखाई राघव की तस्वीर, भरत जी यहीं खड़ाऊँ चूमके रोए"। यहीं राम ने अपने पाँव धोए थे, सरयू माँ का जल आशीर्वाद बहाता है।

"हर घर मंदिर राम-लला का, हर पग जैसे राम शरा का" – अयोध्या का हर घर राम-लला का मंदिर है, हर कदम मानो राम के बाणों की सी गति से चलता है। यह जन्मभूमि रघुनंदन की है, जिसमें चारों धाम (बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी, रामेश्वरम) भी निवास करते हैं।

अंत में भक्त बार-बार कहता है – "वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं"

📍 अयोध्या – राम की जन्मभूमि

अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है। सरयू नदी के तट पर बसी यह पवित्र नगरी हिन्दुओं के सात मोक्षदायिनी पुरियों में से एक है।

भजन में उल्लिखित प्रसंग:

  • हनुमान का सीना चीरना: संकटमोचन हनुमान ने सीता जी को आश्वस्त करने के लिए अपना सीना चीरकर राम-सीता का चित्र दिखाया था।
  • भरत की खड़ाऊँ: भरत जी ने राम के वनवास के दौरान उनकी खड़ाऊँ को राजसिंहासन पर रखकर शासन किया और राम के लौटने तक अयोध्या की रक्षा की।
  • सरयू नदी: अयोध्या की पावन नदी, जहाँ राम ने अपने पाँव धोए थे।
  • चारों धाम: अयोध्या में चारों धामों की आध्यात्मिक उपस्थिति मानी जाती है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🏞️ अवध की धूल = चंदन

भजन की मूल पंक्ति "अवध की धूल चंदन है" यह दर्शाती है कि अयोध्या की मिट्टी कितनी पवित्र है। राम के चरणों की धूल होने के कारण यह चंदन से भी श्रेष्ठ है।

🕊️ वहीं रहना है

"वहीं हमको भी रहना है" – भक्त की सबसे बड़ी अभिलाषा है कि वह अयोध्या में ही रहे, जहाँ श्रीराम रहते हैं। यह मुक्ति की कामना से भी बढ़कर है।

🎯 संदेश : अयोध्या की धूल चंदन है, इसके कण-कण में रामचरितमानस बसता है। हनुमान, भरत, सरयू सब यहाँ के साक्षी हैं। यह नगरी रघुनंदन की जन्मभूमि है, जहाँ चारों धाम वास करते हैं। भक्त की एक ही कामना है – वहीं रहना जहाँ श्रीराम रहते हैं।

॥ अवध की धूल चंदन है ॥
॥ वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं ॥