Amalaki Ekadashi

अमलकी एकादशी आरती और भजन: जरूरी श्लोक और मंत्र (Amalaki Ekadashi Aarti, Bhajan, Shlok & Mantra)

140 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🌿 अमलकी एकादशी : आरती, भजन, श्लोक और मंत्र

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

Amalaki Ekadashi: Divine Hymns, Bhajans & Mantras

आमलकी वृक्ष की पूजा, मोक्षदायिनी एकादशी

🌱 अमलकी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह व्रत भगवान विष्णु की आराधना और आंवले के वृक्ष (आमलकी) की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। इस दिन भक्त प्रभु के विभिन्न नामों का स्मरण करते हैं, व्रत कथाएँ सुनते हैं और विशेष रूप से आरती एवं भजनों के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

नीचे अमलकी एकादशी के पावन अवसर पर गाए जाने वाले प्रमुख भजन, आरती, आवश्यक श्लोक और मंत्र दिए गए हैं। इन्हें सच्चे मन से गाने और सुनने से व्रत का पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

🪔 अमलकी एकादशी विशेष आरती (Amalaki Ekadashi Aarti)

॥ श्री अमलकी एकादशी आरती ॥

जय अमलकी एकादशी, जय परम पुण्यदायिनी।
विष्णु प्रिया व्रतधारी, भव-भय-हारिणी॥

आंवले की पूजा करुं, लाऊंगी सजा सजा।
धूप-दीप नैवेद्य, मन में भक्ति बजा॥

तू ही है सुख-शांति दात्री, तू ही मोक्षदायिनी।
जय अमलकी एकादशी, जय परम पुण्यदायिनी॥

फाल्गुन कृष्णा यह तिथि, धरा पे आई रे।
नर-नारी सब ध्यावें, विष्णु के नाम ले॥

पाप-ताप सब हर ले, भवसागर तारिणी।
जय अमलकी एकादशी, जय परम पुण्यदायिनी॥

इस आरती को गाकर आमलकी वृक्ष और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें।

🎤 प्रमुख भजन (Amalaki Ekadashi Bhajan)

॥ भजन १: आओ करें आमलकी का पूजन ॥

आओ करें आमलकी का पूजन,
धरें व्रत करें भगवान का सुमिरन।
एकादशी है पावन आई,
विष्णु जी की कृपा बरसाई॥

फाल्गुन मास की यह तिथि भारी,
हरती है सब जन की भारी।
आंवले की छाँव में बैठ प्रभु का ध्यान,
मिट जाए संकट हो कल्याण॥

॥ भजन २: रंग दे अमलकी तूने ॥

रंग दे अमलकी तूने, मेरा मन रंग दिया रे।
विष्णु भक्ति का रस, आज यहाँ घोल दिया रे॥

हरे-भरे पत्ते तेरे, सुख-समृद्धि लाते।
फल तेरे आंवला, आरोग्य बढ़ाते॥
तू है धरती का भूषण, हर ले सब संताप,
अमलकी मैया तुझको, मेरा प्रणाम॥

📜 अमलकी एकादशी के जरूरी श्लोक (Important Shlokas)

1. आमलकी वृक्ष पूजन श्लोक

संस्कृत:
नमामि आमलकीं वृक्षं, ब्रह्मस्वरूपिणीम्।
विष्णुप्रियां जगद्धात्रीं, पापहारिणीम्॥

हिंदी अर्थ: हे ब्रह्मस्वरूपिणी, भगवान विष्णु को प्रिय, जगत की धात्री और पापों का हरण करने वाली आमलकी वृक्ष को मैं प्रणाम करता हूँ।

2. व्रत का संकल्प मंत्र

संस्कृत:
अमलक्येकादशीव्रतमहं करिष्ये।

अर्थ: मैं अमलकी एकादशी का व्रत करूंगा/करूंगी।

3. भगवान विष्णु स्तुति श्लोक

संस्कृत:
श्रीवल्लभ धराधीश, श्रीधरा प्रभु माधव।
अमलक्येकादशी व्रतेन, प्रीयतां मे सदा हरि॥

अर्थ: हे श्रीवल्लभ, धरा के स्वामी, श्रीधर, प्रभु माधव! अमलकी एकादशी के इस व्रत से हे हरि, आप सदा मुझसे प्रसन्न रहें।

🕉️ प्रमुख मंत्र (Essential Mantras)

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

यह मूल मंत्र है। इस दिन अधिक से अधिक जाप करें।

ॐ विष्णवे नमः

भगवान विष्णु का सरल और प्रभावशाली मंत्र।

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

अमलकी गायत्री

ॐ आमलक्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि तन्नो वृक्षः प्रचोदयात्।।

(आंवले के वृक्ष की गायत्री)

📖 संक्षिप्त व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha)

प्राचीन काल में चित्रसेन नामक एक धार्मिक राजा थे। एक बार उनके राज्य में भयंकर अकाल पड़ा। राजा चिंतित होकर ऋषियों के पास गए। ऋषियों ने उन्हें अमलकी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने अपनी प्रजा सहित विधि-विधान से यह व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से राज्य में पुनः वर्षा हुई और सुख-समृद्धि लौट आई। तभी से इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया।

मान्यता: इस व्रत को करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

🌿 अमलकी एकादशी पूजा विधि (Worship Method)

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. व्रत का संकल्प लें (अमलक्येकादशीव्रतमहं करिष्ये)।
  3. आमलकी (आंवले) के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं।
  4. वृक्ष के समीप भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  5. उपरोक्त आरती, भजन, श्लोक और मंत्रों का उच्चारण करें।
  6. वृक्ष को लाल चुनरी या धागा बांधें और फल अर्पित करें।
  7. रात्रि में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।
  8. द्वादशी के दिन पारण करें (व्रत खोलें)।
विशेष: आंवले के वृक्ष की परिक्रमा (प्रदक्षिणा) करना अत्यंत शुभ माना गया है।

🎧 सुझावित भजन (Suggestion for Devotional Songs)

आप अमलकी एकादशी के दिन निम्नलिखित प्रसिद्ध भजन भी सुन सकते हैं:

  • "रुक्मिणी रमण विठ्ठल" - ज्ञानेश्वर माउली
  • "विष्णु सहस्रनाम" का पाठ
  • "आवो विठ्ठल आवो विठ्ठल" - भीमसेन जोशी
  • "ऐसी आनंदी एकादशी"

❓ अमलकी एकादशी: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्या स्त्री-पुरुष दोनों यह व्रत कर सकते हैं?

उत्तर: हाँ, कोई भी श्रद्धालु इस व्रत को कर सकता है।

प्रश्न: क्या इस दिन चावल खाना वर्जित है?

उत्तर: हाँ, सभी एकादशियों की तरह इस दिन भी चावल ग्रहण नहीं किए जाते।

प्रश्न: क्या मैं आंवले का पेड़ घर पर लगा सकता हूँ?

उत्तर: हाँ, आंवले का पेड़ बहुत शुभ माना जाता है। इसे घर के आँगन में लगाने से सुख-शांति आती है।

प्रश्न: क्या बिना आंवले के पेड़ के पूजा हो सकती है?

उत्तर: यदि वृक्ष उपलब्ध न हो, तो आंवले के फल या भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने भी पूजा कर सकते हैं।

✨ निष्कर्ष

अमलकी एकादशी का दिन भगवान विष्णु की आराधना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। इस दिन गाए जाने वाले आरती, भजन, श्लोक और मंत्र हमारे मन को शुद्ध करते हैं और हमें ईश्वर के और करीब ले जाते हैं। इस फाल्गुन मास की एकादशी का लाभ उठाएँ और अपने जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें।

🙏 ॐ विष्णवे नमः । सभी पर रहे प्रभु की कृपा ।।

🌿 अमलकी एकादशी : आरती और भजन
आंवले की छाँव में विष्णु भक्ति
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "अमलकी एकादशी आरती और भजन: जरूरी श्लोक और मंत्र (Amalaki Ekadashi Aarti, Bhajan, Shlok & Mantra)" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

श्रेणियां: Amalaki Ekadashi Evening Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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