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Aisi Lagi Lagan Lyrics (Meera Bhajan) – ऐसी लागी लागन, प्रभु जी से लागी लागन

229 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

ऐसी लागी लागन, प्रभु जी से लागी लागन

(Aisi Lagi Lagan, Prabhu Ji Se Lagi Lagan) – Meera Bhajan
🎤 गायक: पारंपरिक ✍️ रचना: मीरा बाई 🏷️ लेबल: भक्ति प्रवाह

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई रे

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई

प्रभु जी से लागी लागन, मैं तो पागल हो गई रे

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई॥

कोई कहे पगली, कोई कहे दीवानी

कोई कहे पगली, कोई कहे दीवानी

हरि बिना नहीं आवे नींदिया रैन

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई रे

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई॥

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर

बिन देखे मोरा मन है व्याकुल

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई रे

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई॥

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध मीरा भजन 'ऐसी लागी लागन' भगवान कृष्ण (गिरिधर नागर) के प्रति मीरा की अनन्य भक्ति और दीवानगी को दर्शाता है। प्रभु के प्रेम में वे खुद को भूल जाती हैं, संसार उन्हें पागल कहता है किंतु उन्हें तो बस अपने साँवरे की याद सताती है। यह भजन सिखाता है कि सच्ची भक्ति में लोक-लाज, मोह-माया सब समाप्त हो जाते हैं और साधक ईश्वरमय हो जाता है। मीरा कहती हैं कि बिना प्रभु के उन्हें नींद नहीं आती, उनका मन सदा व्याकुल रहता है – यही दशा है उस जीव की जो परमात्मा से प्रेम करता है।

'लागन' का अर्थ है लगन, आसक्ति। जब यह लगन प्रभु से लगती है तो सारी सांसारिक लगनें समाप्त हो जाती हैं। यह भजन भक्ति योग की पराकाष्ठा का सुंदर उदाहरण है।

🎵 संत कवयित्री: मीरा बाई

मीरा बाई 16वीं शताब्दी की कृष्ण भक्त कवयित्री थीं। उनके पद एवं भजन आज भी पूरे भारत में श्रद्धा से गाए जाते हैं। 'ऐसी लागी लागन' उनके सबसे लोकप्रिय भजनों में से एक है। इस भजन को कई प्रसिद्ध गायकों जैसे अनुप जलोटा, शुभा मुद्गल, कोरस आदि ने अपनी आवाज़ दी है। यहाँ प्रस्तुत संस्करण पारंपरिक स्वरों में है, जो मीरा की भाव-भक्ति को जीवंत करता है।

🚩 मीरा भजन • कृष्ण भक्ति 📅 प्रकाशित: फरवरी 2026
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Aisi Lagi Lagan Lyrics (Meera Bhajan) – ऐसी लागी लागन, प्रभु जी से लागी लागन" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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