ऐसी लागी लागन, प्रभु जी से लागी लागन

(Aisi Lagi Lagan, Prabhu Ji Se Lagi Lagan) – Meera Bhajan
🎤 गायक: पारंपरिक ✍️ रचना: मीरा बाई 🏷️ लेबल: भक्ति प्रवाह

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई रे

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई

प्रभु जी से लागी लागन, मैं तो पागल हो गई रे

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई॥

कोई कहे पगली, कोई कहे दीवानी

कोई कहे पगली, कोई कहे दीवानी

हरि बिना नहीं आवे नींदिया रैन

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई रे

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई॥

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर

बिन देखे मोरा मन है व्याकुल

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई रे

ऐसी लागी लागन, मैं तो पागल हो गई॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध मीरा भजन 'ऐसी लागी लागन' भगवान कृष्ण (गिरिधर नागर) के प्रति मीरा की अनन्य भक्ति और दीवानगी को दर्शाता है। प्रभु के प्रेम में वे खुद को भूल जाती हैं, संसार उन्हें पागल कहता है किंतु उन्हें तो बस अपने साँवरे की याद सताती है। यह भजन सिखाता है कि सच्ची भक्ति में लोक-लाज, मोह-माया सब समाप्त हो जाते हैं और साधक ईश्वरमय हो जाता है। मीरा कहती हैं कि बिना प्रभु के उन्हें नींद नहीं आती, उनका मन सदा व्याकुल रहता है – यही दशा है उस जीव की जो परमात्मा से प्रेम करता है।

'लागन' का अर्थ है लगन, आसक्ति। जब यह लगन प्रभु से लगती है तो सारी सांसारिक लगनें समाप्त हो जाती हैं। यह भजन भक्ति योग की पराकाष्ठा का सुंदर उदाहरण है।

🎵 संत कवयित्री: मीरा बाई

मीरा बाई 16वीं शताब्दी की कृष्ण भक्त कवयित्री थीं। उनके पद एवं भजन आज भी पूरे भारत में श्रद्धा से गाए जाते हैं। 'ऐसी लागी लागन' उनके सबसे लोकप्रिय भजनों में से एक है। इस भजन को कई प्रसिद्ध गायकों जैसे अनुप जलोटा, शुभा मुद्गल, कोरस आदि ने अपनी आवाज़ दी है। यहाँ प्रस्तुत संस्करण पारंपरिक स्वरों में है, जो मीरा की भाव-भक्ति को जीवंत करता है।