दुनिया मतलब का गरजी अब मोहि जान परी (Duniya matlab ka garzi ab mohi jaan pari Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

दुनिया मतलब का गरजी अब मोहि जान परी (Duniya matlab ka garzi ab mohi jaan pari Lyrics in Hindi) - 


दुनिया मतलब का गरजी, 

अब मोहि जान परी ।

जौ लौं बैल लदे बनियाँ के, 

तौ लो चाह धनी ।

थकित भया कोइ बात न पूछे, 

फिरता गली गली । 


मोह भरम से सती होत है, 

पिय के फंद पड़ी ।

हरदम साहब नहि पहचाना, 

मुरदा संग जली । 


हरे वृक्ष पक्षी द्वै बैठे, 

किया मनोरथ की ।

पत्ता झर गौ पक्षी उड़गौ, 

यही रीत जग की । 


कहैं कबीर सुनो भाई साधो , 

मनसा विषय भरी ।

मनुवा तो कुछ औरहि डोलै , 

जपता हरि हरी ।