जीवन है अनमोल, न जाने कब छूटे
जीवन है अनमोल, न जाने कब छूटे,
झूठे मोह में क्यों जीवन लूटे।
सांसों की डोर कमजोर है,
पल में टूटे, पल में टूटे॥
धन दौलत और ये जवानी,
छाया की तरह संग चले ना पानी।
राम नाम ही एक सहारा,
बाकी सब है बहाना॥
सुन बावरे मन, समझ ले एक दिन,
बिना बुलाए यमराज ले जाए।
तेरे कर्म ही संग चलेंगे,
सच यही है, झूठ ना कहाए॥
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह निर्गुण भजन मनुष्य को जीवन की अनमोलता और उसके क्षणभंगुर स्वरूप का बोध कराता है। “जीवन है अनमोल, न जाने कब छूटे” – यह पंक्ति हमें सचेत करती है कि यह जीवन बहुमूल्य है और पता नहीं कब समाप्त हो जाए। फिर भी हम झूठे मोह-माया में उलझकर इसे व्यर्थ गँवा देते हैं। भजन आगे कहता है कि धन, यौवन और भौतिक सुख क्षणिक हैं, वे अंत तक साथ नहीं जाते। केवल राम नाम और हमारे कर्म ही अंतिम सत्य हैं। यह भजन मन को समझाने का प्रयास है कि इस नश्वर शरीर का घमंड न करें और सच्चे मार्ग पर चलें।
जीवन की नश्वरता का स्मरण कराते हुए यह भजन हमें प्रभु भक्ति और सत्कर्मों की ओर प्रेरित करता है।
🎵 गायक: रोशन जी (Roshan Ji)
रोशन जी उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध निर्गुण एवं भक्ति गायक हैं। उनकी मधुर एवं गंभीर आवाज़ ने ‘डगर है मुश्किल’, ‘चलती पवन कहे’, ‘जीवन है अनमोल’ जैसे अनेक भजनों को लोकप्रिय बनाया। वे पिछले 15 वर्षों से भजन संध्या और कीर्तन कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। ‘मधुर म्यूजिक’ लेबल ने उनके कई गीतों को प्रकाशित किया है।