डगर है मुश्किल, कठिन सफ़र है

(Dagar Hai Mushkil, Kathin Safar Hai) – Nirgun Bhajan 2025
🎤 गायक: Roshan Ji ✍️ गीत: Traditional 🏷️ लेबल: Madhur Music

नी ओह तेरा की lagda

नी ओह तेरा, की lagda,

जेहड़ा, लुक्किया, नज़र नहीं आउंदा ॥

नी ओह तां मेरा, श्याम lagda,

जेहड़ा, परदे च, लुक्किया रहिंदा ॥

मेरा, मोहन, परदे च लुक्किया,

छुप-छुप, दर्शन दिखावे ।

वृंदावन विच, रहिंदा नी सईयो,

खिच, कलेजा पावे ॥

जद मैं, उसदा, दर्शन पावां ॥

जिओंदे, जी मर जावां,

नी ओह तां मेरा, श्याम lagda,

जेहड़ा, परदे च, लुक्किया रहिंदा ।

नी ओह तेरा, की lagda...

बरसाने विच, राधा रहिंदी,

श्याम दा, दिल तड़फावे ।

श्याम तां, मेरा, राधा वल्ल नूं

दौड़ा-दौड़ा जावे ॥

जद, एह जोड़ी, दर्शन दिखावे ॥

ओ ओथे ही, सांसां थम जावें ।

नी ओह तां मेरा, श्याम lagda,

जेहड़ा, परदे च, लुक्किया रहिंदा ।

नी ओह तेरा, की lagda...

श्याम, मेरे दा, परदा सईयो,

कोई, हटावे, कोई लावे ।

जद, कोई, परदा, हटावे ओहदे,

पिछे-पिछे, नस के जावे ॥

ताहियों तां, मेरा, श्याम नी सखियो,

अंख-मिचौली खेले ।

नी ओह तां मेरा, श्याम lagda,

जेहड़ा, परदे च, लुक्किया रहिंदा ।

नी ओह तेरा, की lagda...

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह निर्गुण भजन जीवन की क्षणभंगुरता और सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठने की सीख देता है। “डगर है मुश्किल, कठिन सफ़र है” – यह पंक्ति बताती है कि संसार रूपी रास्ता कठिनाइयों से भरा है, लेकिन मनुष्य भ्रम में पड़कर अपने वास्तविक स्वरूप (संवर) से भटक जाता है। अंतिम पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि एक दिन यह शरीर मिट्टी में मिल जाएगा, फिर अहंकार कैसा? भजन में माया के पीछे भागने को निरर्थक बताया गया है और ईश्वर (दातार) के सुमिरन को ही एकमात्र सच्चा सहारा कहा गया है।

यह भजन संतों और महात्माओं की वाणी की तरह जीवन जीने की सही राह दिखाता है – प्रभु भक्ति और नेक कर्म ही ऐसे धन हैं जो अंत तक साथ देते हैं।

🎵 गायक: रोशन जी (Roshan Ji)

रोशन जी उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध निर्गुण एवं भक्ति गायक हैं। उनकी मधुर एवं गंभीर आवाज़ ने ‘डगर है मुश्किल’, ‘चलती पवन कहे’, ‘जीवन है अनमोल’ जैसे अनेक भजनों को लोकप्रिय बनाया। वे पिछले 15 वर्षों से भजन संध्या और कीर्तन कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। ‘मधुर म्यूजिक’ लेबल ने उनके कई गीतों को प्रकाशित किया है।