डगर है मुश्किल, कठिन सफ़र है
डगर है मुश्किल, कठिन सफ़र है,
भ्रम में भुलाया क्यों भटके संवर है।
एक दिन ये तन मिट्टी में मिलना,
फिर क्यों करता अभिमान ये मन है॥
जो आया है, उसे जाना ही होगा,
कोई अपना ना यहाँ ठिकाना होगा।
नाम रोशन कर ले इतना जतन कर,
बाकी सब धोखा, बाकी सब ख्वाब है॥
माया के पीछे क्यूँ दौड़े इतना,
जब अंत में तुझे अकेले ही जाना।
सुमिरन करले उस एक दातार का,
यही है सच्चा, यही है ठिकाना॥
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह निर्गुण भजन जीवन की क्षणभंगुरता और सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठने की सीख देता है। “डगर है मुश्किल, कठिन सफ़र है” – यह पंक्ति बताती है कि संसार रूपी रास्ता कठिनाइयों से भरा है, लेकिन मनुष्य भ्रम में पड़कर अपने वास्तविक स्वरूप (संवर) से भटक जाता है। अंतिम पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि एक दिन यह शरीर मिट्टी में मिल जाएगा, फिर अहंकार कैसा? भजन में माया के पीछे भागने को निरर्थक बताया गया है और ईश्वर (दातार) के सुमिरन को ही एकमात्र सच्चा सहारा कहा गया है।
यह भजन संतों और महात्माओं की वाणी की तरह जीवन जीने की सही राह दिखाता है – प्रभु भक्ति और नेक कर्म ही ऐसे धन हैं जो अंत तक साथ देते हैं।
🎵 गायक: रोशन जी (Roshan Ji)
रोशन जी उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध निर्गुण एवं भक्ति गायक हैं। उनकी मधुर एवं गंभीर आवाज़ ने ‘डगर है मुश्किल’, ‘चलती पवन कहे’, ‘जीवन है अनमोल’ जैसे अनेक भजनों को लोकप्रिय बनाया। वे पिछले 15 वर्षों से भजन संध्या और कीर्तन कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। ‘मधुर म्यूजिक’ लेबल ने उनके कई गीतों को प्रकाशित किया है।