प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
अर्ज करो मंजूर
अर्ज करो मंजूर,सच्चियाँ ज्योतां वाली
माँ मेरी झंडियाँ वाली अर्ज करो मंजूर,
ऑगन बथेरे ने मइयाँ कोई गुण ना ही,
दर डिग्रियाँ दी ही फड़ लै तू बांह,
बकश दे मेरे कसूर माँ मेरी झंडिया वाली अर्ज करो मंजूर..
ना पूजा ना पाठ समधि जन्म जन्म दा मैया मैं अपराधी,
बक्श दे मेरे कसूर माँ मेरी झंडियाँ वाली,
अर्ज करो मंजूर...
दुःख बथेरे ने मइयाँ कहे नहीं जांदे,
इस जिंदड़ी दे उते सहे नहीं जाने,
करदे दिला दे दुःख दूर माँ मेरी झण्डियावली,
अर्ज करो मंजूर...
दुखा वेले ांडिया ने जदो याद मावा,
मावा बिना कौन पूछे दिला दियां हावा,
करदे दिला दे दुःख दूर माँ मेरी झण्डियावली,
अर्ज करो मंजूर...
छम छम अखियाँ चो नीर पेया आन्दा,
लाल निमाना दादी तरले पांदा,
भवन ते भुलाना जर्रूर, माँ मेरी झण्डियावली,
अर्ज करो मंजूर...
चारो पासे छाया नि माइयाँ धोर अँधेरा,
इस दुनिया विच कोई न मेरा,
तू माँ मेरी मैं बछड़ा तेरा, माँ मेरी झण्डियावली,
अर्ज करो मंजूर...
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह निर्गुण भजन माता की भक्ति और उनके प्रति अनन्य प्रेम की अभिव्यक्ति है। “अर्ज करो मंजूर” – यह पंक्ति माता से प्रार्थना कर रही है कि वे हमारे दुःखों को दूर करें और हमारी रक्षा करें। भजन में माता के प्रति भक्त की भावना और उनके प्रति समर्पण का वर्णन है। भजन का संदेश है कि माता हमेशा हमारे साथ हैं और हमारी रक्षा करती हैं।
यह भजन भक्ति और समर्पण की भावना को जागृत करता है और हमें याद दिलाता है कि माता हमेशा हमारे साथ हैं, चाहे हम किसी भी situation में हों।
🎵 गायक: रोशन जी (Roshan Ji)
रोशन जी उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध निर्गुण एवं भक्ति गायक हैं। उनकी मधुर एवं गंभीर आवाज़ ने ‘अर्ज करो मंजूर’, ‘चलती पवन कहे’, ‘जीवन है अनमोल’ जैसे अनेक भजनों को लोकप्रिय बनाया। वे पिछले 15 वर्षों से भजन संध्या और कीर्तन कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। ‘मधुर म्यूजिक’ लेबल ने उनके कई गीतों को प्रकाशित किया है।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Arj Karo Manjur Lyrics (Nirgun Bhajan) – अर्ज करो मंजूर" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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