Parvati Stotram

वोह पर्दे के पीछे जो पर्दा नशीं है (Woh parde ke peeshe jo parda nashin hai Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

180 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

पर्दा नशीं: प्रेम और भक्ति का संगीतमय अनुभव

हमारे अंतर्मन के पर्दे को हटाकर, प्रेम और भक्ति का ये भजन गाते हैं।

वोह पर्दे के पीछे जो पर्दा नशीं है उसकी महिमा को हम गाते हैं। वो फ़िरक़ा नशीं है, वो दीन नशीं है, जब तेरा नाम लेते हैं, दिल की धड़कन बढ़ाते हैं। तेरे दर पर आते हैं, तेरा नाम लेते हैं, तेरे साए में सब बुनियाद रखते हैं। जो तेरा हो सो तेरा है, तेरे सिवा सब बेकार है, वो पर्दा नशीं है, वो फ़िरक़ा नशीं है। कहाँ जाएं हम, किससे करें गुज़ारिश, जब तेरा ही नाम लिपटे हमें छोड़ कर। मोहब्बत की वो लहर बहे, देखो वो क्या रंग लाए, वो पर्दे के पीछे जो पर्दा नशीं है। दुनिया की तलब का क्या फायदा, जब तेरा ही साथ हो मेरे पास। तेरे रहम पर ही सब कुछ टिका है, तेरा ही नाम लेंगे तो सब कुछ होगा आसान। वो पर्दे के पीछे जो पर्दा नशीं है, उसकी महिमा को हम गाते हैं।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल विषय उस अदृश्य दिव्य सत्ता का गुणगान है, जो पर्दे के पीछे छिपा हुआ है। 'वो पर्दा नशीं है' का उल्लेख करते हुए, यह दर्शाता है कि ईश्वर की उपस्थिति हमेशा हमारे चारों ओर है, लेकिन हम अक्सर उस पर ध्यान नहीं देते। यहां 'पर्दा' एक रूपक है, जो हमें इस बात का एहसास कराता है कि भौतिक दुनिया के वर्चस्व से परे, एक सच्चाई है, जिसे केवल श्रद्धा और भक्ति के माध्यम से देखा जा सकता है। यह भजन भक्त को प्रेरित करता है कि वह अपने दिल की धड़कन को ईश्वर के नाम से संगीतमय बनाए, जिससे उसकी भक्ति और प्रेम जीवंत हो सके।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन उस प्रेम को दर्शाता है जो ईश्वर के प्रति लगा रहता है। भक्त यह स्वीकार कर रहा है कि जब हम अपने ईश्वर का नाम लेते हैं, हमारी आत्मा को अद्भुत शांति मिलती है। 'तेरे दर पर आते हैं, तेरा नाम लेते हैं' यह इस बात का प्रतीक है कि जब हम ईश्वर के पास आते हैं, तब हमारी सभी चिंताएं और उलझनें खत्म हो जाती हैं। यह एक अद्भुत एहसास है, जिससे पता चलता है कि केवल भक्ति और प्रेम ही इस संपूर्णता को प्राप्त करवा सकता है। भक्त की भावनाएं इस भजन में गहराई से छिपी हुई हैं, और वह हर एक पंक्ति में अपने प्रेम को व्यक्त करता है।

यह भजन भक्तिपथ की सच्चाई को उजागर करता है, जो कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम पर आधारित है। 'कहाँ जाएं हम, किससे करें गुज़ारिश' का उल्लेख करने से साफ है कि भक्त केवल अपने ईश्वर पर निर्भर है। चूँकि भक्ति का मार्ग सरल है, यह सिखाता है कि हम जब अपने ईश्वर की ओर रुख करते हैं, तो वह हमारे दुखों को समाप्त करता है और हमें सुकून पहुँचाता है। यहां ईश्वर को 'पर्दा नशीं' के रूप में वर्णित किया गया है, यह संकेत देता है कि जो वस्त्र उसे ढेर कर रखा है, वह हमारी अंतरात्मा की उन्नति के लिए जरूरी है। इसलिए इस भजन का प्रतिश्रुति है कि सिर्फ भक्ति ही हमें इस पर्दे के दूसरी तरफ देखने की क्षमता देती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय भक्ति परंपरा का फूल है, जिसमें भक्त की ईमानदारी और अपनी उच्चतम भावना को संबंधित किया गया है। हिन्दू धर्म में ईश्वर के भिन्न रूपों और नामों का उल्लेख मिलता है, और हर भजन या स्तोत्र में उन नामों के साथ अनन्य प्रेम का चित्रण होता है। इसी प्रकार 'वो पर्दा नशीं है' में भी भगवत प्रेम की परिभाषा प्रस्तुत है। पुराणों में, विशेषकर भगवद गीता में यह कहा गया है कि जो भी श्रद्धापूर्वक जीते हैं, वे अंत में ईश्वर को प्राप्त कर लेते हैं। यह भजन पाठकों को इस मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति, और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है। यह उच्च ऊर्जा स्तर का संचार करता है और तनाव को दूर करता है। भक्तों के लिए, यह एक अद्वितीय अनुभव है, जो भक्ति के द्वारा उपासना को और भी गहराई प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय या संध्या काल में किया जा सकता है, जब मन शांति में होता है। ध्यान के दौरान, एक दिया जलाएं और अपने मन को एकाग्रता की ओर लाएं। सही मुद्रा में बैठकर, अपने हृदय में प्रेम और भक्ति का भाव जगाएं, और फिर भजन का पाठ करें। इस प्रकार भक्ति का भाव और भी गहरा होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?

यह भजन एक सामान्य भक्ति गीत है जो निर्गुण ब्रह्म या अपने ईश्वर को समर्पित है, जो सभी में समाहित है।

भजन का क्या महत्व है?

यह भजन अदृश्य ईश्वर की महिमा का गुणगान करता है, जिससे भक्त जन्म, मृत्यु और आत्मा के विचारों में गहराई से जुड़ जाता है।

कब और कैसे इस भजन का पाठ करना चाहिए?

भजन को सुबह या संध्या समय में सही ध्यान और भक्ति भाव के साथ करना चाहिए, ताकि मानसिक स्थिति शुद्ध रहे और भक्ति में गहराई आए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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