Parvati Stotram

रंग हारा वाले दे चढ़ गए रंग होर चढ़के की लैना भजन (Rang haara bale de chadh gye rang hor chadha ke ki lainaa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

180 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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लोकप्रिय भजन

रंग हारा वाले दे चढ़ गए रंग होर चढ़के की लैना भजन (Rang haara bale de chadh gye rang hor chadha ke ki lainaa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

अपडेटेड: मार्च 2025 | साभार: भक्तलुक (Bhaktilok.in) संपादकीय टीम

सनातन संस्कृति और खाटू श्याम जी के दरबार में अनन्य प्रेम, भक्ति और पूर्ण समर्पण को दर्शाने वाला यह पावन भजन "रंग हारा वाले दे चढ़ गए रंग होर चढ़के की लैना" भक्तों के अंतर्मन को झंकृत कर देता है। कलियुग के धणी, हारे के सहारे श्री श्याम बाबा (खाटू श्याम जी) के चरणों में जब किसी भक्त का मन रम जाता है, तब उसे संसार के अन्य किसी भी रंग या आकर्षण की चाह नहीं रह जाती। यह भजन जीवात्मा की परमात्मा के प्रति अटूट निष्ठा, अगाध प्रेम और शरणागति का अनूठा प्रतीक है। इस विस्तृत लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालेंगे, जो आपके जीवन में भक्ति रस का संचार करेगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (Mukhda):

रंग हारा वाले दे चढ़ गए रंग,
होर चढ़के की लैना जी, होर चढ़के की लैना...
मेरे श्याम बाबा वाले दे चढ़ गए रंग,
होर चढ़के की लैना जी, होर चढ़के की लैना।

अंतरा 1:

दुनिया के रंग फीके पड़ जाए आगे इसके,
जो रंग चढ़ा मेरे खाटू वाले के!
पलकें झुका के जब दिल में बसाया,
जिंदगी को मैंने सांवरिया से सजाया।
रंग चरणों का ऐसा पक्का रंग,
होर चढ़के की लैना जी, होर चढ़के की लैना...

अंतरा 2:

हारे का सहारा है खाटू का राजा,
इसके बिना दिल मेरा कहीं और ना सजा!
कृपा की छटा जब नजर पर पड़ी है,
भक्तों की हर मुश्किल झटपट कटी है।
रंग ललन का ऐसा चढ़ा मेरे संग,
होर चढ़के की लैना जी, होर चढ़के की लैना...

अंतरा 3:

सुख-दुःख की धूप छांव सब इसने टाली,
श्याम नाम से भर दी झोली खाली!
अब तो इसी रंग में रंग जाना है हमको,
श्याम बाबा का दीवाना कहलाना है सबको।
रंग चढ़ गया मेरे सांवरिया के संग,
होर चढ़के की लैना जी, होर चढ़के की लैना...

समापन (Refrain):

रंग हारा वाले दे चढ़ गए रंग,
होर चढ़के की लैना जी, होर चढ़के की लैना!
जय श्री श्याम! हारे के सहारे की जय!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस लोकप्रिय भजन की पंक्तियों में गहन आध्यात्मिक अर्थ छिपा है। 'हारा वाला' शब्द भगवान श्री खाटू श्याम (जिन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है) के लिए प्रयुक्त हुआ है। भक्त यह बड़े ही प्रेम और आल्हाद के साथ कह रहा है कि जब उसके जीवन पर खाटू वाले श्याम बाबा की कृपा का रंग चढ़ गया है, तो उसे संसार की अन्य भौतिक वस्तुओं, मान-सम्मान या क्षणिक सुखों के किसी भी अन्य रंग की कोई आवश्यकता नहीं है।

संसार के सभी रंग नश्वर हैं, वे समय के साथ फीके पड़ जाते हैं, परंतु प्रभु के चरणों का अनुराग और उनकी भक्ति का रंग कभी नहीं उतरता। जब साधक का मन श्याम सुंदर के चरणों में लग जाता है, तब उसके सारे सांसारिक दुख और संताप स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यह भजन हमें यह सिखाता है कि ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। इसके साथ ही, आप हमारी अन्य प्रस्तुतियां जैसे श्री हनुमान चालीसा और ओम जय जगदीश हरे आरती के माध्यम से अपनी दैनिक पूजा को और अधिक फलदायी बना सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आराध्य देव: यह भजन कलियुग के अवतार भगवान श्री खाटू श्याम जी (श्री कृष्ण के रूप) को समर्पित है।
  • भक्ति का भाव: इसमें अनन्य प्रेम, पूर्ण समर्पण, और सांसारिक मोह-माया से विरक्ति का सुंदर भाव झलकता है।
  • कीर्तन परंपरा: श्याम संकीर्तन, फाल्गुन महोत्सव और जागरण के समय इस भजन को बहुत उत्साह और नृत्य के साथ गाया जाता है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर श्रवण से मन की व्याकुलता शांत होती है और प्रभु में विश्वास दृढ़ होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने या सुनने के लिए वैसे तो किसी विशेष समय की बंधन आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि भगवत स्मरण हर पल पवित्र है। फिर भी, निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष महत्व है:

  • प्रातःकाल उठकर स्नान के पश्चात अपने मंदिर में दीपक प्रज्वलित करते समय।
  • संध्या आरती के समय जब परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होते हैं।
  • खाटू श्याम बाबा के दरबार में कीर्तन, जागरण अथवा मासिक एकादशी के पावन अवसर पर।
  • जब भी आपका मन अशांत हो या जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई महसूस हो।

इसे पूरी तल्लीनता, ताली बजाकर और भाव-विभोर होकर गाना चाहिए, जिससे अंतर्मन शुद्ध होता है। इसके साथ आप शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करके अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को और बढ़ा सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन पूर्णतः भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है। महाभारत काल में पांडو पुत्र भीम के पौत्र बर्बरीक ने अपनी अपार वीरता और भगवान श्री कृष्ण को दिए गए वचन के कारण अपना शीश दान कर दिया था। उनकी इस महानिष्ठा से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें कलियुग में अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था।

जो भी भक्त पूरी श्रद्धा से उनकी शरण में जाता है, बाबा उसे 'हारे का सहारा' बनकर उबारते हैं। इस प्रकार यह भजन सीधे तौर पर श्याम भक्ति की महान परंपरा से जुड़ा हुआ है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा बेहद सरल, मधुर और आम जनमानस के हृदय को छूने वाली हिंदी-राजस्थानी मिश्रित लोक भाषा (ब्रज-हरियाणवी पुट के साथ) है। इसमें रूपक अलंकार और उपमाओं का सुंदर प्रयोग किया गया है। 'रंग चढ़ना' यहाँ प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। शब्दों की लयबद्धता इतनी सशक्त है कि सुनते ही श्रोता झूम उठता है और स्वतः ही नृत्य करने को प्रेरित होता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन के माध्यम से हमें निम्नलिखित अमूल्य जीवन सीख मिलती हैं:

  1. एकनिष्ठ भक्ति: जीवन में अनेक आकर्षण हो सकते हैं, परंतु यदि एक बार सच्चे गुरु या भगवान का आश्रय मिल जाए, तो मन को भटकाना नहीं चाहिए।
  2. सांसारिक मोह का त्याग: भौतिक वस्तुएं क्षणिक हैं, जबकि प्रभु का प्रेम शाश्वत और आनंददायी है।
  3. शरणागति: संकट के समय अपनी चिंताओं को भगवान पर छोड़कर पूर्ण रूप से उनके प्रति समर्पित हो जाना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
हारा वाला जो हारे हुए का सहारा बने श्री खाटू श्याम बाबा
रंग चढ़ना प्रेम या भक्ति में लीन होना ईश्वर के प्रति अनन्य अनुराग
होर चढ़के की लैना दूसरा रंग चढ़ाने से क्या लाभ अन्य किसी आकर्षण की आवश्यकता न होना
सांवरिया सांवले रंग वाले प्रभु श्री कृष्ण / श्याम बाबा

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम रंग हारा वाले दे चढ़ गए रंग होर चढ़के की लैना
आराध्य देव भगवान श्री खाटू श्याम जी (श्याम बाबा)
संगीत शैली श्याम संकीर्तन एवं लोक भजन शैली
भाषा सरल हिंदी / ब्रज / लोक भाषा
मुख्य भाव प्रेम, भक्ति, शरणागति और आनंद
उपयुक्त अवसर श्याम जागरण, एकादशी, फाल्गुन मेला, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन भजन कलियुग के अवतार भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य के जीवन में भगवान की भक्ति और उनके प्रेम का रंग चढ़ जाता है, तो उसे संसार की अन्य भौतिक वस्तुओं की चाह नहीं रहती।

'हारा वाला' अर्थात 'हारे का सहारा', यह उपाधि श्री खाटू श्याम बाबा को दी जाती है क्योंकि वे हर हारे हुए और निराश भक्त की सहायता करते हैं।

इस भजन को श्याम संकीर्तन, खाटू श्याम जागरण, एकादशी उत्सव और फाल्गुन मेलों के दौरान बहुत उत्साह से गाया जाता है।

हाँ, आप इसे अपनी दैनिक पूजा के समय या शाम की आरती के पश्चात आसानी से गा सकते हैं, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए फाल्गुन मास का मेला और एकादशी-द्वादशी की तिथियां सबसे उत्तम मानी जाती हैं, हालांकि आप वर्ष में कभी भी जा सकते हैं।

भक्ति संगीत और भगवान के नाम का संकीर्तन मन के विकारों और तनाव को दूर करता है, जिससे चित्त शांत और प्रसन्न होता है।

भक्तलुक पर आपको हनुमान चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, ओम जय जगदीश हरे आरती, और विभिन्न देवी-देवताओं के प्रसिद्ध भजन व चालीसा शुद्ध लिरिक्स के साथ मिल जाएंगे।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख और भजन के बोल सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा, लोक भक्ति और श्री खाटू श्याम जी के भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, प्रेरणादायक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुंचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन धर्म की संकीर्तन और भजन परंपरा
  • खाटू श्याम जी की महिमा एवं लोक कथाएं
  • भक्तलुक (Bhaktilok.in) पावन ग्रंथ एवं भजन संग्रह

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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